सर्जरी के बाद फिर लौटा शारिब हाशमी की पत्नी का ओरल कैंसर, कितनी बार वापस आ सकती है ये बीमारी?

punjabkesari.in Thursday, May 14, 2026 - 11:22 AM (IST)

नारी डेस्क: Sharib Hashmi की पत्नी नसरीन हाशमी एक बार फिर ओरल कैंसर का सामना कर रही हैं। ‘द फैमिली मैन’ से पहचान बनाने वाले शारिब हाशमी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपनी पत्नी की बीमारी को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि नसरीन को अब तक पांच बार सर्जरी से गुजरना पड़ा है और अब छठी बार कैंसर वापस लौट आया है। इस खुलासे के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठने लगा है कि आखिर कैंसर कितनी बार लौट सकता है?

2018 में पहली बार चला था बीमारी का पता

शारिब हाशमी और उनकी पत्नी नसरीन ने बातचीत के दौरान बताया कि साल 2018 में पहली बार ओरल कैंसर का पता चला था। शुरुआती इलाज और सर्जरी के बाद सबकुछ सामान्य लगने लगा था, लेकिन कुछ समय बाद बीमारी दोबारा लौट आई। इसके बाद लगातार कई बार सर्जरी करनी पड़ी।शारिब ने बताया कि इस बार कैंसर काफी एग्रेसिव हो चुका है और शरीर के कई हिस्सों तक फैल गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इलाज जारी है और परिवार पूरी उम्मीद के साथ इस मुश्किल दौर का सामना कर रहा है।

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कैंसर दोबारा क्यों लौट आता है

कैंसर का दोबारा लौटना मेडिकल भाषा में “रिकरेंट कैंसर” कहलाता है। ऐसा तब होता है जब इलाज के दौरान कुछ कैंसर सेल्स पूरी तरह खत्म नहीं हो पातीं। ये बेहद छोटी सेल्स टेस्ट या स्कैन में नजर नहीं आतीं और धीरे-धीरे दोबारा बढ़ने लगती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कैंसर सेल्स समय के साथ बदलती रहती हैं। कई बार वे म्यूटेट होकर पहले वाले इलाज के प्रति असरहीन हो जाती हैं। यही वजह है कि कुछ मरीजों में कैंसर बार-बार वापस लौट सकता है।

आखिर कितनी बार हो सकता है कैंसर

इस सवाल का कोई तय जवाब नहीं है। मेडिकल साइंस में ऐसा कोई निश्चित आंकड़ा नहीं है कि कैंसर कितनी बार वापस आ सकता है। कुछ लोगों में यह एक या दो बार लौटता है, जबकि कई मामलों में पांच या उससे ज्यादा बार भी कैंसर दोबारा हो सकता है। डॉक्टर्स का कहना है कि हर बार लौटने वाला कैंसर पहले से ज्यादा जटिल हो सकता है, क्योंकि शरीर और कैंसर सेल्स दोनों की स्थिति बदलती रहती है। ऐसे में हर बार इलाज का तरीका भी अलग हो सकता है।

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रिकरेंट कैंसर के अलग-अलग प्रकार

कैंसर के दोबारा लौटने के भी कई प्रकार होते हैं। अगर बीमारी उसी जगह दोबारा होती है जहां पहले थी, तो उसे लोकल रिकरेंस कहा जाता है। अगर कैंसर आसपास के लिम्फ नोड्स या टिश्यू तक फैल जाए, तो उसे रीजनल रिकरेंस माना जाता है। वहीं जब कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच जाता है, तो उसे डिस्टेंट रिकरेंस या मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है। इस स्थिति में इलाज और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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क्या दोबारा अलग कैंसर भी हो सकता है?

डॉक्टर्स के अनुसार, एक कैंसर के बाद मरीज को दूसरा नया कैंसर भी हो सकता है। इसे रिकरेंट कैंसर नहीं बल्कि “सेकंड प्राइमरी कैंसर” कहा जाता है। यह शरीर के उसी हिस्से या किसी दूसरे अंग में विकसित हो सकता है। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जैसे पहले इलाज में इस्तेमाल की गई रेडिएशन या कीमोथेरेपी, जेनेटिक बदलाव, तंबाकू सेवन, खराब लाइफस्टाइल या पर्यावरण से जुड़े कारण।

हिम्मत और उम्मीद भी इलाज का बड़ा हिस्सा

शारिब हाशमी और उनकी पत्नी की कहानी सिर्फ बीमारी की नहीं, बल्कि हिम्मत और उम्मीद की भी है। लगातार सर्जरी और इलाज के बावजूद दोनों सकारात्मक बने हुए हैं। डॉक्टर भी मानते हैं कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में दवाओं के साथ मरीज की मानसिक ताकत और इच्छाशक्ति का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है।  


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Content Editor

Priya Yadav

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