फूड पॉइजनिंग बनी BJP नेता की मौत की वजह! कब मामूली लापरवाही बन सकती है जानलेवा
punjabkesari.in Wednesday, May 13, 2026 - 11:02 AM (IST)
नारी डेस्क: समाजवादी पार्टी के संस्थापक दिवंगत Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और बीजेपी नेत्री Aparna Yadav के पति Prateek Yadav का महज 38 साल की उम्र में निधन हो गया। फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर चर्चित रहने वाले प्रतीक यादव की अचानक मौत ने हर किसी को हैरान कर दिया है। शुरुआती जानकारी में अस्पताल प्रशासन ने इसे ‘सस्पेक्टेड पॉइजनिंग’ यानी संदिग्ध जहर या फूड पॉइजनिंग का मामला बताया है। हालांकि, मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी। परिवार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस घटना के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या फूड पॉइजनिंग जैसी सामान्य दिखने वाली समस्या भी किसी की जान ले सकती है? विशेषज्ञों की मानें तो कई बार दूषित भोजन शरीर पर इतना गंभीर असर डालता है कि स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है।
आखिर क्या होती है फूड पॉइजनिंग?
जब कोई व्यक्ति ऐसा खाना या पानी ग्रहण करता है जिसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या उनके द्वारा पैदा किए गए टॉक्सिन्स मौजूद हों, तो शरीर उसे नुकसानदायक मानकर प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है। यही स्थिति फूड पॉइजनिंग कहलाती है। आमतौर पर यह समस्या बाहर का बासी खाना, अधपका मांस, दूषित पानी, लंबे समय तक खुले में रखा भोजन या खराब डेयरी प्रोडक्ट्स खाने से होती है। कई बार साफ-सफाई में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर संक्रमण का कारण बन जाती है।
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार सुबह करीब 6 बजे उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। हालांकि अभी तक परिवार की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। pic.twitter.com/K2vzTOAy4X
— हनुमान की सेना (@ganpatjat87) May 13, 2026
फूड पॉइजनिंग के लक्षण कितनी जल्दी दिखाई देते हैं?
फूड पॉइजनिंग के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि संक्रमण किस प्रकार के बैक्टीरिया या वायरस से हुआ है। कुछ मामलों में लक्षण कुछ घंटों में दिखने लगते हैं, जबकि कई बार एक-दो दिन बाद तक भी सामने आ सकते हैं।
इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं
बार-बार उल्टी होना
पेट में तेज दर्द या मरोड़
दस्त लगना
कमजोरी और थकान
बुखार आना
सिर चकराना
भूख न लगना
कई लोगों में यह समस्या 1-2 दिन में ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में शरीर तेजी से बिगड़ने लगता है।

कब जानलेवा बन जाती है फूड पॉइजनिंग?
विशेषज्ञों के अनुसार, फूड पॉइजनिंग का सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की गंभीर कमी है। लगातार उल्टी और दस्त की वजह से शरीर जरूरी फ्लूइड और मिनरल्स खो देता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो किडनी, दिमाग और दिल पर भी असर पड़ सकता है। कुछ बैक्टीरिया जैसे E.coli शरीर में गंभीर संक्रमण फैला सकते हैं, जिससे किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं Listeria जैसे संक्रमण गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं और गर्भपात या मृत शिशु जन्म जैसी स्थितियां पैदा कर सकते हैं। कई दुर्लभ मामलों में संक्रमण दिमाग और नसों तक पहुंचकर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी पैदा कर सकता है।
किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा रहता है?
हर व्यक्ति का शरीर संक्रमण से एक जैसी लड़ाई नहीं लड़ पाता। जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें फूड पॉइजनिंग ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है। इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए -5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं कैंसर, डायबिटीज या ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित लोग, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीज।
ये भी पढ़ें: आने वाला है इस फल का सीजन, शुगर कंट्रोल में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं इसके बीज
कौन से संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
अगर फूड पॉइजनिंग के दौरान नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
102°F से ज्यादा तेज बुखार
उल्टी या मल में खून आना
बार-बार बेहोशी या चक्कर आना
पेशाब बहुत कम होना या गहरे रंग का आना
सांस लेने में परेशानी
भ्रम या धुंधला दिखना
ऐसे मामलों में तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी होता है।
फूड पॉइजनिंग से बचने के आसान तरीके
फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए खानपान में साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाएं। फल और सब्जियों को साफ पानी से धोने के बाद ही इस्तेमाल करें। कच्चे मांस और अंडों को बाकी खाने की चीजों से अलग रखें। बचा हुआ खाना दो घंटे के भीतर फ्रिज में रख दें और लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचें। अगर फूड पॉइजनिंग हो जाए तो शरीर में पानी की कमी न होने दें। ORS, नारियल पानी और पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहें। बिना डॉक्टर की सलाह के दस्त रोकने वाली दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए।
समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव
फूड पॉइजनिंग को अक्सर लोग मामूली पेट खराब समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही लापरवाही भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है। खासकर जब मरीज लगातार कमजोर महसूस कर रहा हो या शरीर में पानी की कमी तेजी से बढ़ रही हो, तब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

