इस गंभीर बीमारी के चलते एक्टर Manoj Kumar का हुआ निधन, जाने लक्षण और बचाव के उपाय

punjabkesari.in Friday, Apr 04, 2025 - 03:00 PM (IST)

नारी डेस्क: भारतीय अभिनेता और फिल्म निर्देशक मनोज कुमार का शुक्रवार को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मृत्यु कार्डियोजेनिक शॉक के कारण हुई, जो एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (गंभीर दिल का दौरा) के कारण हुआ। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, मनोज कुमार कुछ महीनों से डीकंपेंसेटेड लिवर सिरोसिस (लिवर की गंभीर बीमारी) से पीड़ित थे, जिससे उनका स्वास्थ्य कमजोर हो गया था। कार्डियोजेनिक शॉक दिल से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है। आइए जानते हैं इस गंभीर स्थिति के बारे में अधिक जानकारी और इससे बचाव के उपायों के बारे में:

कार्डियोजेनिक शॉक क्या है?

कार्डियोजेनिक शॉक एक जानलेवा स्थिति है, जो तब होती है जब हृदय शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ब्लड पंप नहीं कर पाता है। इस स्थिति में, हृदय से ब्लड का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे शरीर के अन्य अंगों में ब्लड की कमी हो जाती है और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति अक्सर एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (AMI), जिसे गंभीर दिल का दौरा भी कहा जाता है।

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कार्डियोजेनिक शॉक के कारण

मायोकार्डियल इंफार्क्शन (दिल का दौरा): दिल का दौरा तब होता है जब हृदय में रक्त का प्रवाह रुक जाता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों को नुकसान होता है। यह स्थिति कार्डियोजेनिक शॉक का कारण बन सकती है।

हार्ट फेलियर (दिल का विफल होना): जब हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो वह पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पातीं, जिससे शरीर में रक्त की आपूर्ति में कमी आती है।

कम रक्तचाप (हाइपोटेंशन): जब हृदय पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता, तो रक्तचाप गिर सकता है, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को रक्त का सही प्रवाह नहीं मिलता।

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कार्डियोजेनिक शॉक के लक्षण

सीने में दर्द: सीने में तेज दर्द या बेचैनी, जो अक्सर बाहों, पीठ या जबड़े तक फैल सकता है।

सांस फूलना: सांस लेने में कठिनाई या घुटन महसूस होना, जैसे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही हो।

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थकान: शरीर में अत्यधिक थकान या कमजोरी महसूस होना, जैसे शरीर पूरी तरह से टूट गया हो।

भ्रम: मानसिक स्पष्टता में कमी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न होना, जिससे व्यक्ति को सही से सोचने या समझने में कठिनाई होती है।

तेज़ हृदय गति: हृदय की धड़कन में वृद्धि होना, जिससे दिल बहुत तेजी से धड़कने लगता है।

कार्डियोजेनिक शॉक का उपचार

आपातकालीन चिकित्सा: कार्डियोजेनिक शॉक एक जीवन-धातक स्थिति है, जिससे व्यक्ति की स्थिति गंभीर हो सकती है। अत: तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है।

कार्डियक कैथीटेराइजेशन: यह एक प्रक्रिया है, जिसमें अवरुद्ध कोरोनरी धमनियों को खोला जाता है ताकि रक्त प्रवाह को सामान्य किया जा सके।

दवाएं: हृदय के कार्य को सहारा देने, दर्द को नियंत्रित करने और आगे की क्षति को रोकने के लिए दवाएं दी जाती हैं।

गहन देखभाल (ICU): गंभीर स्थितियों में, रोगी को गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) में रखा जाता है, जहाँ उसकी नज़दीकी निगरानी की जाती है और आवश्यक चिकित्सा प्रदान की जाती है।

लिवर सिरोसिस क्या है?

लिवर सिरोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर के ऊतकों में स्थायी क्षति होती है और लिवर में सूजन और निशान बन जाते हैं। यह बीमारी लिवर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है और अंतिम चरण में लिवर फेलियर (लिवर का काम करना बंद कर देना) का कारण बन सकती है। लीवर सिरोसिस के प्रमुख कारणों में पुरानी शराब की लत, वायरल हेपेटाइटिस बी और सी, और गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (NAFLD) शामिल हैं।लीवर सिरोसिस के लक्षण: थकान, पीलिया, पेट में सूजन, आसानी से चोट लगना

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लिवर सिरोसिस का उपचार

जीवनशैली में बदलाव: शराब से परहेज, स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम से लिवर की कार्यप्रणाली को सुधारा जा सकता है।

दवाएं: लीवर सिरोसिस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवाएं दी जाती हैं, जो बीमारी की प्रगति को धीमा कर सकती हैं।

लिवर प्रत्यारोपण: अगर लिवर सिरोसिस उन्नत अवस्था में पहुँच चुका हो, तो लिवर प्रत्यारोपण (लिवर ट्रांसप्लांट) की आवश्यकता हो सकती है।

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प्रारंभिक पहचान और उपचार: लिवर सिरोसिस का जल्दी पता चलने और उचित उपचार से लिवर फेलियर और अन्य जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

कार्डियोजेनिक शॉक और लिवर सिरोसिस दोनों ही गंभीर और जानलेवा स्थितियां हैं, जिनका समय रहते इलाज और देखभाल से बचाव किया जा सकता है। यदि इन स्थितियों के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। एक स्वस्थ जीवनशैली और नियमित स्वास्थ्य जांच से इन समस्याओं से बचने में मदद मिल सकती है।


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Content Editor

PRARTHNA SHARMA

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