इस पीएम ने कहा और मनोज कुमार ने बना दी किसानों पर फिल्म, "मेरे देश की धरती" गाने ने तोड़े थे सारे रिकॉर्ड
punjabkesari.in Friday, Apr 04, 2025 - 11:02 AM (IST)

नारी डेस्क: बॉलीवुड में मनोज कुमार का नाम ऐसे फिल्मकार-अभिनेता के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण फिल्मों के जरिये दर्शकों के दिलों पर राज किया। मनोज कुमार मूल नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी का जन्म 24 जुलाई 1937 को हुआ था। मनोज कुमार की बतौर निर्देशक पहली फिल्म उपकार थी, जिसे उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पर बनाई थी। कहा जाता है कि 24 घंटे में फिल्म की कहानी लिख दी गई थी।
बचपन के दिनों में मनोज कुमार ने दिलीप कुमार अभिनीत फिल्म ..शबनम ..देखी थी, इसमें दिलीप कुमार के निभाये किरदार से वह इस कदर प्रभावित हुये कि उन्होंने भी फिल्म अभिनेता बनने का फैसला कर लिया । बतौर अभिनेता मनोज कुमार ने अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म ..फैशन ..से की। दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता कुमार को "दो बदन", "हरियाली और रास्ता" और "गुमनाम" जैसी हिट फिल्मों के लिए भी जाना जाता था।
1965 में, उन्होंने भगत सिंह के जीवन पर आधारित "शहीद" फिल्म रिलीज़ की। यह एक बड़ी सफलता थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भी इस पर ध्यान दिया। शास्त्री के साथ बातचीत ने कुमार को पीएम के लोकप्रिय नारे "जय जवान, जय किसान" पर एक कहानी तलाशने के लिए प्रेरित किया और इस तरह 1967 में "उपकार" का जन्म हुआ, जो उनकी निर्देशन वाली पहली फिल्म थी। यह फिल्म एक ब्लॉकबस्टर थी और इसका गाना "मेरे देश की धरती" आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर संगीत प्रेमियों के बीच पसंदीदा है।
लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था कि सेना का शौर्य सबने देख लिया लेकिन किसान की अहमियत भी समझना जरूरी है। मनोज शास्त्री फिल्म बनाने का वादा कर दिल्ली से मुंबई के लिए रवाना हो गए और सफर के दौरान ही उन्होंने ट्रेन में ही कहानी लिखना शुरू कर दी और मुंबई पहुंचने से पहले उसे पूरा भी कर दिया. ये फिल्म किसानों के इर्द गिर्द घूमती है। उस दौर में फिल्म ने 6.80 करोड़ रु. का कलेक्शन किया।
अपनी देशभक्ति फिल्मों के बीच, कुमार ने "हिमालय की गोद में", "दो बदन", "सावन की घटा" और थ्रिलर "गुमनाम" जैसी फिल्मों में रोमांटिक लीड की भूमिका निभाई। 1970 में उन्होंने पूर्व और पश्चिम के बीच सांस्कृतिक अंतर के विषय पर "पूरब और पश्चिम" फिल्म बनाई, जो उनके करियर की एक और बड़ी सफलता थी। देशभक्ति और सामाजिक रूप से जागरूक फिल्मों के प्रति उनके प्रेम के कारण उन्हें "भारत कुमार" के रूप में जाना जाने लगा, एक ऐसा विषय जिसे उन्होंने "रोटी कपड़ा और मकान" और क्रांति में आगे बढ़ाया।