इस बार खेलें केमिकल-फ्री होली, घर पर ही तैयार करें नैचुरल कलर्स
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 01:21 PM (IST)
नारी डेस्क : होली भारतीय संस्कृति का एक रंगीन और खुशियों से भरा त्योहार है, जो आपसी भाईचारे और उमंग का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग रंगों के साथ जश्न मनाते हैं, लेकिन अक्सर यह नहीं सोचते कि बाजार में मिलने वाले रंग कितने सुरक्षित हैं। कई केमिकल युक्त रंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं, आंखों में जलन, एलर्जी और रैशेज की समस्या पैदा कर सकते हैं। इतना ही नहीं, ये रंग पानी और मिट्टी को भी प्रदूषित करते हैं।
ऐसे में इस बार होली 2026 को सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए घर पर बने प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें। नैचुरल कलर्स न सिर्फ स्किन के लिए सुरक्षित होते हैं, बल्कि बच्चों और बड़ों। दोनों के लिए पूरी तरह सेफ माने जाते हैं। आइए जानते हैं घर पर आसानी से बनने वाले कुछ हर्बल रंग।
हल्दी से बनाएं हर्बल पीला गुलाल
हल्दी में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद हैं।
तरीका: हल्दी पाउडर में बेसन या कॉर्नफ्लोर मिलाएं और अच्छे से छान लें। इससे सूखा पीला गुलाल तैयार हो जाएगा।
गीला रंग बनाने के लिए हल्दी को पानी में घोल लें।
चुकंदर से तैयार करें गुलाबी रंग
चुकंदर से मिलने वाला गुलाबी रंग बेहद खूबसूरत और पूरी तरह नैचुरल होता है।
तरीका: चुकंदर को कद्दूकस करके पानी में उबालें। ठंडा होने पर छान लें। यह गीला गुलाबी रंग तैयार है।
सूखा रंग बनाने के लिए चुकंदर के टुकड़ों को धूप में सुखाकर पीस लें।
पत्तियों और मेहंदी से बनाएं हरा रंग
हरा रंग बनाने के लिए पालक या धनिया की पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
तरीका: पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाएं, इससे गीला हरा रंग बनेगा।
सूखे हरे रंग के लिए बिना केमिकल वाली मेहंदी में थोड़ा कॉर्नफ्लोर मिलाएं।
फूलों से बनाएं सुगंधित और प्राकृतिक गुलाल
गेंदा, गुलाब और पलाश के फूल प्राकृतिक रंगों का बेहतरीन स्रोत हैं।
तरीका: फूलों को छांव में सुखाकर पीस लें। इससे खुशबूदार गुलाल तैयार होगा।
पलाश के फूलों को रातभर पानी में भिगोने से सुंदर केसरिया रंग मिलता है।
पर्यावरण के लिए क्यों बेहतर हैं नैचुरल रंग?
घर में बने रंग पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल होते हैं। ये न तो पानी को प्रदूषित करते हैं और न ही मिट्टी को नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही, ये स्किन-फ्रेंडली होते हैं और एलर्जी का खतरा भी कम रहता है।इस बार होली को सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि सुरक्षा और जिम्मेदारी का त्योहार बनाएं। केमिकल-फ्री नैचुरल रंग अपनाकर न केवल अपनी त्वचा का ख्याल रखें, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखें।

