आंगनवाड़ी की रसोइया ने जान पर खेल कर मधुमक्खी के हमले से 20 बच्चों की जान बचाई

punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 04:49 PM (IST)

नारी डेस्क : मध्य प्रदेश के नीमच जिले से मानवता और साहस की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। मदावड़ा पंचायत के रणपुर गांव स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यरत रसोइया कंचन बाई मेघवाल ने मधुमक्खियों के हमले के दौरान लगभग 20 मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।

अचानक हुआ मधुमक्खियों का हमला

घटना उस समय हुई जब आंगनवाड़ी केंद्र परिसर में बच्चे खेल रहे थे। तभी अचानक मधुमक्खियों का एक विशाल झुंड वहां आ धमका और बच्चों पर हमला कर दिया। बच्चों की चीख-पुकार सुनते ही केंद्र की रसोइया कंचन बाई बिना एक पल सोचे आगे बढ़ीं।

बच्चों के लिए बनीं ढाल

कंचन बाई ने पास पड़ी तिरपाल और चटाई उठाई और एक-एक बच्चे को अपने शरीर से ढकते हुए सुरक्षित रूप से आंगनवाड़ी भवन के अंदर पहुंचाने लगीं। इस दौरान उन्होंने खुद को मधुमक्खियों और बच्चों के बीच खड़ा कर लिया। सैकड़ों मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया, लेकिन वे तब तक नहीं रुकीं जब तक आखिरी बच्चा सुरक्षित नहीं हो गया।

यें भी पढ़ें : जानें कौन-सी है वो बीमारी, जिसे देखकर डॉक्टर ने कहा आपकी बेटी ‘कांच की गुड़िया’ है

 

सैकड़ों डंक, लेकिन पीछे नहीं हटीं

मधुमक्खियों के अनगिनत डंक लगने से कंचन बाई गंभीर रूप से घायल हो गईं। जब तक गांव वाले मदद के लिए पहुंचे, वे बेहोश हो चुकी थीं। कांस्टेबल कलुनाथ और पायलट राजेश राठौर उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके शरीर पर मधुमक्खियों के सैकड़ों डंक के निशान थे, जो उनकी बहादुरी की गवाही दे रहे थे।

सिर्फ रसोइया नहीं, पूरे परिवार की रीढ़ थीं कंचन बाई

कंचन बाई केवल आंगनवाड़ी में भोजन बनाने वाली रसोइया ही नहीं थीं, बल्कि जय माता दी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष भी थीं। उनके पति शिवलाल लकवाग्रस्त हैं और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। वे अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियों को छोड़ गई हैं। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जब उनका पार्थिव शरीर रणपुर गांव पहुंचा, तो पूरा गांव मौन होकर उस मां जैसी महिला को श्रद्धांजलि देता नजर आया, जिसने दूसरों के बच्चों के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी।

यें भी पढ़ें : रिपोर्ट में हुआ खुलासा: इन दो ब्लड ग्रुप वालों को सबसे ज्यादा Heart Attack का खतरा!

गांव में अब भी दहशत

घटना के बाद गांव में भय का माहौल है। आंगनवाड़ी केंद्र के पास एक पेड़ पर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता अब भी लटका हुआ है, वहीं पास में गांव का एकमात्र हैंडपंप भी है। हमले के डर से ग्रामीणों ने वहां जाना बंद कर दिया है। लोग प्रशासन से छत्ता हटाने और कंचन बाई के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं।
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Monika

Related News

static