Heart पेशेंट के पैरों में सूजन क्यों होती है, जानें इसके 6 कारण
punjabkesari.in Saturday, Mar 14, 2026 - 02:11 PM (IST)
नारी डेस्क: पैरों और टखनों में सूजन (एडिमा) आम बात लग सकती है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बनी रहे और उंगली दबाने पर गड्ढा बन जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है और यह अक्सर दिल की समस्या, खासकर कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (CHF) का संकेत देता है। जब दिल ब्लड को सही तरीके से पंप नहीं कर पाता, तो नसों में दबाव बढ़ जाता है और फ्लूइड पैरों में जमा होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप टखनों और पैरों में सूजन देखने को मिलती है।
दिल के रोगियों में पैरों की सूजन के 6 मुख्य कारण
हार्ट फेलियर (CHF)
कंजेस्टिव हार्ट फेलियर दिल की विफलता का सबसे आम कारण है। जब हृदय ब्लड को पर्याप्त मात्रा में पंप नहीं कर पाता, तो फ्लूइड शरीर के निचले हिस्सों में जमा होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप पैरों और टखनों में सूजन दिखाई देती है। अक्सर यह दाहिने या बाएं हिस्से की विफलता के कारण होता है और इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

वाल्वुलर हार्ट डिजीज
दिल में चार वाल्व होते हैं – मिट्रल, एओर्टिक, ट्राइकस्पिड और पल्मोनरी। यदि इनमें से कोई एक या अधिक वाल्व सही तरीके से काम नहीं करते, तो ब्लड फ्लो में बाधा आती है। इससे नसों में दबाव बढ़ जाता है और पैरों में फ्लूइड जमा होकर सूजन का कारण बनता है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन
यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें फेफड़ों की धमनियों में उच्च रक्तचाप होता है। इसके कारण दिल का दाहिना हिस्सा अतिरिक्त दबाव झेलता है। इस वजह से शरीर में फ्लूइड जमा होने लगता है और पैरों में सूजन शुरू हो जाती है। खासकर महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है।
पेरिपार्टम कार्डियोमायोपैथी
यह स्थिति मुख्य रूप से गर्भावस्था के अंतिम महीनों या डिलीवरी के तुरंत बाद विकसित होती है। इसमें हार्ट फेलियर के लक्षण दिखाई देते हैं जैसे सांस फूलना, थकान और पैरों में सूजन। अक्सर लोग इसे गर्भावस्था के बाद की सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन सही इलाज न मिलने पर यह गंभीर हो सकती है।
डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT)
डीवीटी एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैरों की नसों में खून के थक्के जम जाते हैं। इससे पैरों में अचानक सूजन आती है और यह कार्डियक इमरजेंसी का संकेत हो सकता है। इसे नजरअंदाज करना बहुत खतरनाक हो सकता है, क्योंकि थक्का टूटकर हृदय या फेफड़ों तक जा सकता है।

एंटीहाइपरटेंसिव दवाइयां
ब्लड प्रेशर कम करने के लिए ली जाने वाली कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स दवाएं कभी-कभी पैरों और टखनों में फ्लूइड जमा कर सकती हैं। यह पैडल एडिमा कहलाती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से दवा बदलने या डोज कम करने पर विचार किया जा सकता है।
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पैरों में सूजन के लक्षण
पैरों में सूजन केवल दिखने में ही समस्या नहीं होती। इसके साथ कई संकेत मिलते हैं टखनों या पैरों में सूजन जो शाम तक या लंबे समय खड़े रहने के बाद बढ़ जाती है। सूजन वाले हिस्से पर उंगली दबाने पर गड्ढा बनना। अचानक 24–48 घंटों में 1-2 किलो वजन बढ़ जाना। सांस लेने में तकलीफ, थकान और शारीरिक गतिविधियों को करने में कमजोरी। त्वचा का शाइनी, खिंची हुई और छूने पर गर्म महसूस होना। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, खासकर यदि परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है।
पैरों में सूजन से बचाव के उपाय
नमक का सेवन कम करें: प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से बचें। ज्यादा नमक फ्लूइड जमा होने की समस्या बढ़ा सकता है।
एक्टिव रहें: रोजाना टहलें, योग करें या हल्की एक्सरसाइज करें। यह ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है और फ्लूइड जमा होने से रोकता है।
ब्लड प्रेशर और डायबिटीज कंट्रोल करें: उच्च रक्तचाप और डायबिटीज हार्ट फेलियर के प्रमुख कारण हैं। इन्हें नियंत्रित रखना जरूरी है।
नियमित हेल्थ चेकअप कराएं: समय-समय पर हार्ट और बॉडी चेकअप कराना पैरों में सूजन जैसी समस्याओं का जल्दी पता लगाने में मदद करता है।
लाइफस्टाइल में बदलाव: संतुलित भोजन, तनाव नियंत्रण और एक्टिव रूटीन से हार्ट हेल्थ सुधार सकते हैं और पैरों में सूजन की समस्या कम होती है।

पैरों में सूजन केवल थकान या लंबे समय तक खड़े रहने की वजह से नहीं होती। यह दिल की गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। समय रहते सावधानी और लाइफस्टाइल बदलाव से इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। यदि पैरों में लगातार सूजन है, तो हेल्थ एक्सपर्ट से मिलकर सही इलाज करवाना बेहद जरूरी है।

