मां दुर्गा के तीसरे नवरात्रि से शुरू होता है कश्मीरी महिलाओं का नववर्ष, मां पार्वती से जुड़ी कश्मीरी पंडित परंपरा
punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 09:15 PM (IST)
नारी डेस्कः इन दिनों मां दुर्गा के नवरात्रे बहुत धूमधाम से मनाए जा रहे हैं। मां दुर्गा के आज तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, वहीं कश्मीरी महिलाएं मां दुर्गा के तीसरे नवरात्रि से नववर्ष (नवरेह) की शुरुआत मानती हैं और परंपरा के अनुसार, कश्मीरी महिलाएं इस दिन अपने मायके जाती हैं। इस पर केंद्रित ये उत्सव मनाया जाता है। यह बेटियों और बहनों को सम्मान देने का दिन है जिसे अक्सर महिला दिवस की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। जालंधर में भी कश्मीरी समुदाय की महिलाओं ने इस त्योहार को धूमधाम से मनाया। होटल बसंत में कश्मीरी समुदाय द्वारा इस उत्सव को आयोजित किया गया ताकि जो कश्मीरी महिलाएं व बेटियां अपने मायके (घर) नहीं जा सकती वह यहीं पर इस परंपरा को मना सके।

नवरेह का तीसरा दिन जिसे कहते जांग त्राई या जांग त्रेत
कश्मीरी पंडित परंपरा के अनुसार, कश्मीरी नव वर्ष (नवरेह) के तीसरे दिन को “ज्येष्ठ अष्टमी” या “जांग त्राई” (जांग त्रेत) के नाम से मनाया जाता है जो अक्सर तीसरे नवरात्रि के साथ या उसके आस-पास पड़ता है। इस अवसर पर अक्सर नवविवाहित बेटियों को उनके मायके बुलाया जाता है। यह दिन महिलाओं के अपने मायके जाने पर केंद्रित उत्सव है और बेटियों और बहनों के सम्मान का दिन है, जिसे अक्सर महिला दिवस की परंपरा से जोड़ा जाता है।

जांग त्राई (नव वर्ष-नवरेह का तीसरा दिन) के प्रमुख पहलू
अनुष्ठानिक यात्रा: कश्मीरी हिंदू महिलाएं आमतौर पर पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने, शुभकामनाएं देने और अपने ससुराल लौटने के अनुष्ठान के रूप में अपने मायके जाती हैं। कश्मीरी महत्व व मान्यताओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी पार्वती अपने माता-पिता के घर गई थीं। माता-पिता अपनी बेटियों को घर लौटने पर शुभ संकेत, स्नेह और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में नकद और कुछ पैसे (“आताना”) देते हैं।

नवरात्रि नौ रातों का त्योहार है, लेकिन कश्मीरी पंडितों के लिए इस तीसरे दिन का सांस्कृतिक केंद्र मुख्य रूप से जांग त्राई परंपरा पर होता है, जो उनके क्षेत्रीय कैलेंडर और सामाजिक रीति-रिवाजों को दर्शाता है।

