बिना सिर के विराजमान हैं गणेश जी, इस अनोखे मंदिर में होती है मुंडकटिया गणेश की पूजा
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 04:36 PM (IST)
नारी डेस्क : गणेश चतुर्थी के मौके पर देशभर में गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनसे अलग-अलग पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां भगवान गणेश की बिना सिर वाली प्रतिमा के दर्शन किए जाते हैं। इसे मुंडकटिया गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान से भगवान गणेश और भगवान शिव से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा का संबंध है। आइए जानते हैं इस अनोखे मंदिर की कहानी और यहां कैसे पहुंच सकते हैं।
कहां स्थित है मुंडकटिया गणेश मंदिर?
मुंडकटिया गणेश मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदार घाटी क्षेत्र में स्थित है। यह सोनप्रयाग और गौरीकुंड के आसपास के क्षेत्र में आता है। यहां गणेश जी की बिना सिर वाली प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर से जुड़ी मान्यता इसे भगवान शिव और गणेश जी की उस कथा से जोड़ती है, जिसमें माता पार्वती ने गणेश जी को अपने द्वार की रक्षा के लिए नियुक्त किया था।

क्यों है गणेश जी की बिना सिर वाली प्रतिमा?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उन्होंने अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण डाल दिए। यही बालक आगे चलकर गणेश कहलाए। माता पार्वती ने गणेश जी को द्वार पर पहरा देने और किसी को भी अंदर न आने देने का आदेश दिया। इसी दौरान भगवान शिव वहां पहुंचे। गणेश जी ने माता पार्वती के आदेश का पालन करते हुए भगवान शिव को अंदर जाने से रोक दिया। इससे भगवान शिव और गणेश जी के बीच विवाद हुआ। कथा के अनुसार, क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर अलग कर दिया। बाद में माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मुंडकटिया वही स्थान है जहां इस घटना का संबंध माना जाता है। इसी वजह से यहां बिना सिर वाली गणेश प्रतिमा के दर्शन की परंपरा बताई जाती है।
'मुंडकटिया' नाम का क्या अर्थ है?
'मुंडकटिया' नाम को दो शब्दों से जोड़कर देखा जाता है—'मुंड' यानी सिर और 'कटिया' यानी कटा हुआ। इसी नाम के आधार पर स्थानीय मान्यता में इस स्थान को भगवान गणेश के कटे हुए सिर से जुड़ी कथा से जोड़ा जाता है।
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मंदिर के आसपास क्या-क्या देख सकते हैं?
मुंडकटिया मंदिर की यात्रा के दौरान आसपास के कई धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को भी देखा जा सकता है।
गौरीकुंड: गौरीकुंड केदारनाथ यात्रा के प्रमुख पड़ावों में से एक है और धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है।
त्रियुगीनारायण मंदिर: रुद्रप्रयाग क्षेत्र में स्थित यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।
पहाड़ और प्राकृतिक खूबसूरती: मंदिर के आसपास हिमालयी क्षेत्र की हरियाली, पहाड़ और प्राकृतिक दृश्य यात्रा को खास बना देते हैं।

कैसे पहुंचें मुंडकटिया गणेश मंदिर?
मुंडकटिया मंदिर जाने के लिए पहले सोनप्रयाग या आसपास के प्रमुख स्थानों तक पहुंचना होता है। वहां से स्थानीय वाहन या टैक्सी की मदद ली जा सकती है। सड़क मार्ग से ऋषिकेश, हरिद्वार या देहरादून की ओर से यात्रा की योजना बनाई जा सकती है। ट्रेन से आने वाले यात्रियों के लिए ऋषिकेश और आसपास के रेलवे स्टेशन प्रमुख विकल्प हो सकते हैं। हवाई यात्रा के लिए देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट निकटतम प्रमुख एयरपोर्ट है। पहाड़ी इलाकों में मौसम और सड़क की स्थिति बदल सकती है, इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय स्थिति की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
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गणेश उत्सव में क्यों खास है यह मंदिर?
गणेश जी की सामान्य प्रतिमाओं से अलग यहां बिना सिर वाली प्रतिमा की मान्यता इस मंदिर को विशेष बनाती है। गणेश चतुर्थी के दौरान जब देशभर में गजानन के विभिन्न स्वरूपों की पूजा होती है, तब मुंडकटिया मंदिर से जुड़ी यह पौराणिक कथा भक्तों के बीच खास जिज्ञासा पैदा करती है।

