गणेश स्थापना के समय जानें कलश में क्या रखें, छोटी-सी गलती से अधूरी रह सकती है पूजा
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 12:16 PM (IST)
नारी डेस्क : गणेश चतुर्थी के दिन घर में बप्पा की स्थापना को लेकर भक्तों में खास उत्साह रहता है। इस दौरान सिर्फ गणेश जी की मूर्ति स्थापित करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि पूजा की शुरुआत कलश स्थापना और संकल्प से भी जुड़ी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश में देवताओं और पवित्र नदियों का आवाहन किया जाता है, इसलिए गणेश स्थापना के समय कलश की तैयारी को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं कलश में क्या रखना चाहिए और बप्पा की स्थापना की सही विधि क्या है।
कलश में क्या रखें?
गणेश स्थापना के लिए सबसे पहले साफ और शुद्ध तांबे, पीतल या किसी अन्य उपयुक्त पात्र का कलश लें। इसमें स्वच्छ जल भरें। धार्मिक परंपरा के अनुसार कलश में अक्षत, सुपारी, दूर्वा और एक सिक्का रखा जा सकता है। इसके बाद कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उनके ऊपर नारियल स्थापित करें। नारियल को लाल कपड़े या मौली से बांधकर रखना शुभ माना जाता है। कलश का पूजन गंध, अक्षत और पुष्प से किया जाता है।
गणेश चतुर्थी पर बप्पा की स्थापना कैसे करें?

सबसे पहले पूजा स्थान तैयार करें
गणेश स्थापना से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। एक साफ चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। इसके ऊपर अक्षत यानी चावल की छोटी-सी वेदी बनाकर गणपति की स्थापना के लिए स्थान तैयार किया जा सकता है।
कलश की स्थापना करें
अब चौकी के पास कलश स्थापित करें। कलश में स्वच्छ जल, अक्षत, सुपारी, दूर्वा और सिक्का आदि रखें। इसके मुख पर आम के पत्ते और ऊपर नारियल रखें। इसके बाद गंध, अक्षत और पुष्प से कलश का पूजन करें। धार्मिक विधि में कलश के माध्यम से देवताओं और पवित्र नदियों का आवाहन करने की परंपरा भी बताई गई है।
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संकल्प लें
कलश पूजन के बाद आचमन करके गणपति पूजन का संकल्प लें। संकल्प में परिवार के सुख-शांति, मंगल और कल्याण की कामना की जाती है। इसके बाद गणेश जी की पूजा और स्थापना की आगे की विधि शुरू की जाती है।
गणपति की मूर्ति स्थापित करें
अब गणेश जी की मूर्ति को स्वच्छ चौकी पर अक्षत के ऊपर स्थापित करें। मूर्ति स्थापित करते समय भगवान गणेश का आवाहन करें। वैदिक परंपरा में गणपति के आवाहन के लिए ऋग्वेद का यह मंत्र भी प्रसिद्ध है—
“गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥”

प्राणप्रतिष्ठा और पूजन करें
इसके बाद परंपरा के अनुसार आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य आदि उपचारों से गणपति का पूजन किया जाता है। प्राणप्रतिष्ठा की विस्तृत विधि अलग-अलग परंपराओं और परिवार की पूजा-पद्धति के अनुसार अलग हो सकती है।
दूर्वा और मोदक चढ़ाएं
गणेश जी को दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य नैवेद्य अर्पित करें। गणपति पूजा में दूर्वा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसके बाद गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ किया जा सकता है।
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अंत में करें आरती
पूजा पूरी होने के बाद गणेश जी की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य बप्पा से बुद्धि, विवेक, सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना करें।
गणेश स्थापना के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि सही मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकता है, इसलिए अपने स्थान के पंचांग को प्राथमिकता दें। बप्पा की स्थापना के बाद पूजा स्थल और घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। जिन परिवारों में स्थापना के दिनों में विशेष नियम या सात्विक आहार की परंपरा होती है, वे उसी के अनुसार पूजा करें। लहसुन-प्याज का सेवन न करने या ब्रह्मचर्य जैसे नियम सभी परिवारों में समान नहीं होते, इसलिए इन्हें सार्वभौमिक नियम के बजाय परिवार या परंपरा से जुड़े धार्मिक नियम के रूप में समझना चाहिए।कलश में रखी पूजा सामग्री को विसर्जन के समय विधि और स्थानीय परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक विसर्जित या उचित तरीके से प्रवाहित करें। इसे इधर-उधर फेंकने से “10 दिन की पूजा का फल नहीं मिलता” जैसी बात को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए, निश्चित धार्मिक तथ्य के रूप में नहीं।

गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। आपके दिए पंचांग विवरण के अनुसार गणेश स्थापना के लिए मध्याह्न पूजा का समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। हालांकि पूजा का सटीक समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय जरूर मिलाएं।

