Ganesh Chaturthi 2026: इस शुभ मुहूर्त में करें बप्पा की स्थापना, जानें पूजा विधि और तारीख
punjabkesari.in Monday, Sep 07, 2026 - 02:03 PM (IST)
नारी डेस्क : भगवान गणेश को हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणपति की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश उत्सव की शुरुआत होती है। इस दौरान घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और श्रद्धालु विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी की तिथि, स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और विसर्जन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन उनकी मूर्ति की स्थापना और पूजा के लिए दोपहर का समय विशेष शुभ माना जाता है।
गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026, सोमवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर 2026 को सुबह 7:44 बजे
मुख्य गणेश विसर्जन: 25 सितंबर 2026, शुक्रवार

गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणपति स्थापना का मुहूर्त शहर और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार प्रमुख शहरों में स्थापना का समय इस प्रकार है:
नई दिल्ली: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
मुंबई: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक
पुणे: सुबह 11:16 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक
कोलकाता: सुबह 10:18 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक
ध्यान दें: पूजा और स्थापना का मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकता है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
गणेश स्थापना से पहले ऐसे करें तैयारी
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा के लिए लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर स्वास्तिक बनाकर अक्षत रखें। इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करने की तैयारी करें।
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गणेश जी की स्थापना और पूजा विधि
सबसे पहले लें संकल्प: पूजा शुरू करने से पहले हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद जल को छोड़ दें।
शुभ मुहूर्त में करें मूर्ति स्थापना: निर्धारित शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद मूर्ति पर गंगाजल का छिड़काव करें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
कलश की स्थापना करें: गणेश जी की मूर्ति के पास पानी से भरा तांबे का कलश रखें। इसमें सिक्का और सुपारी डालें। कलश में आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखा जा सकता है।

गणपति को अर्पित करें ये चीजें: भगवान गणेश को रोली, कुमकुम, चंदन और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद मौली, फूल और दूर्वा चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी को दूर्वा विशेष प्रिय मानी जाती है। लाल गुड़हल का फूल भी अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान गणेश की आराधना करें।
लगाएं मोदक का भोग: गणपति पूजा में मोदक और लड्डू का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान गणेश को पंचमेवा, मिश्री और फल के साथ मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद गणेश चतुर्थी की कथा और धार्मिक परंपरा के अनुसार स्यामंतक मणि की कथा का पाठ किया जा सकता है। अंत में भगवान गणेश की आरती करें।
गणेश उत्सव के दौरान कितनी बार करें आरती?
मान्यता के अनुसार, जितने दिनों तक भगवान गणेश घर में विराजमान रहते हैं, उतने दिनों तक नियमित रूप से पूजा और आरती की जाती है। कई परिवारों में सुबह और शाम दोनों समय आरती करने की परंपरा है। गणपति को घर में अतिथि के रूप में विराजमान करने की धार्मिक मान्यता के चलते इस दौरान श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी सेवा करते हैं।
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गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री
गणपति स्थापना और पूजा के लिए आप अपनी परंपरा के अनुसार इन चीजों की व्यवस्था कर सकते हैं:
भगवान गणेश की मूर्ति
गंगाजल, तांबे का कलश
रोली और कुमकुम
चंदन, अक्षत और मौली धागा
दूर्वा घास, फूल, विशेष रूप से लाल फूल
सुपारी हल्दी की गांठ और नारियल
आम के पत्ते, देसी घी और कपूर
पंचमेवा, मिश्री और फल
मोदक या लड्डू
धूप, दीपक और आरती की थाली।

कब होगा गणपति विसर्जन?
गणेश उत्सव के दौरान अलग-अलग परिवार और स्थान अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन, 10 दिन या अन्य निर्धारित अवधि के बाद गणपति विसर्जन करते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को है, जिसे गणपति विसर्जन के प्रमुख दिनों में माना जाता है। विसर्जन की तिथि और विधि स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
नोट : गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की भक्ति और आस्था से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बप्पा की पूजा श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

