जानें क्यों कहलाए गणेश एकदंत, जानें इसके पीछे की कथा
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 03:53 PM (IST)
नारी डेस्क : भगवान गणेश को कई नामों से जाना जाता है, लेकिन 'एकदंत' नाम उनकी सबसे खास पहचान में से एक है। गणेश जी के स्वरूप में उनका एक टूटा हुआ दांत हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है। आखिर उनका एक दांत कैसे टूटा और इसके पीछे क्या वजह थी? इसे लेकर अलग-अलग पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा में इसका संबंध भगवान परशुराम से बताया जाता है, दूसरी में भाई कार्तिकेय से, जबकि तीसरी कथा के अनुसार गणेश जी ने स्वयं अपना दांत तोड़कर उसे कलम के रूप में इस्तेमाल किया था। आइए जानते हैं इन तीनों कथाओं के बारे में...
परशुराम से युद्ध में टूटा दांत
सबसे प्रचलित मान्यताओं में से एक भगवान गणेश और परशुराम से जुड़ी है। कथा के अनुसार, एक बार भगवान परशुराम भगवान शिव से मिलने के लिए कैलाश पहुंचे। उस समय गणेश जी द्वार पर पहरा दे रहे थे। उन्होंने परशुराम को अंदर जाने से रोक दिया। परशुराम ने गणेश जी को समझाने की कोशिश की, लेकिन गणेश जी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे। बात बढ़ने पर परशुराम ने उन्हें युद्ध की चुनौती दे दी। गणेश जी ने भी इस चुनौती को स्वीकार कर लिया। दोनों के बीच युद्ध हुआ और इसी दौरान परशुराम के फरसे के वार से गणेश जी का एक दांत टूट गया। इसी घटना के बाद उन्हें 'एकदंत' नाम से भी जाना जाने लगा।

भाई कार्तिकेय से जुड़ी एक और कथा
गणेश जी के एकदंत बनने को लेकर एक अन्य पौराणिक कथा का संबंध उनके बड़े भाई कार्तिकेय से बताया जाता है। इस कथा में गणेश जी और कार्तिकेय के स्वभाव को एक-दूसरे से काफी अलग बताया गया है। गणेश जी बचपन में शरारती थे, जबकि कार्तिकेय शांत और सरल स्वभाव के माने जाते थे। मान्यता के अनुसार, दोनों भाइयों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान कार्तिकेय ने गणेश जी को सबक सिखाने के लिए उन्हें दंड दिया, जिससे उनका एक दांत टूट गया। इसी वजह से गणेश जी को एकदंत कहा जाने लगा।
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महाभारत लिखने के लिए खुद तोड़ा दांत
एक अन्य प्रसिद्ध कथा महाभारत के लेखन से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा सुनाने के लिए गणेश जी से उसे लिखने का आग्रह किया। गणेश जी ने शर्त रखी कि वे कथा लिखते समय रुकेंगे नहीं और वेदव्यास को भी लगातार बोलना होगा। कथा के अनुसार, महाभारत लिखते समय गणेश जी की कलम टूट गई। लेखन रुक न जाए, इसलिए उन्होंने अपना एक दांत तोड़कर उसे कलम के रूप में इस्तेमाल किया और महाभारत लिखना जारी रखा। इस कथा के कारण भी गणेश जी के 'एकदंत' नाम की व्याख्या की जाती है।

एकदंत नाम के पीछे हैं कई मान्यताएं
भगवान गणेश के एक दांत से जुड़ी ये अलग-अलग कथाएं भारतीय पौराणिक परंपराओं में प्रचलित हैं। अलग-अलग ग्रंथों और लोकमान्यताओं में इनके विवरण में अंतर भी मिलता है। इन कथाओं के जरिए गणेश जी के त्याग, कर्तव्य और दृढ़ संकल्प जैसे गुणों को भी दर्शाया जाता है।

