किसी की Gym करते तो किसी की नाचते हुई गई जान, 50% लोगों को दबे पांव आता है Heart Attack
punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 09:30 AM (IST)
नारी डेस्क: जिम में कसरत करते हुए किसी की जान चली गई। खेलते हुए किसी के दिल की धड़कन अचानक रुक गई। नाचते-गाते हुए किसी की आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई। पोस्ट-कोविड दौर और सोशल मीडिया के ज़माने में, आपने ऐसे कई वीडियो देखे होंगे। तो दिल की सेहत का बेहतर ख्याल रखने के लिए क्या किया जाना चाहिए? इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग डिज़ीज़ (IHLD) के चेयरमैन और कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉ. राहुल चंदोला कहते हैं कि जीवनशैली (लाइफस्टाइल) सबसे बड़े कारकों में से एक है। अच्छा पोषण, पूरी नींद और तनाव का प्रबंधन दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं।
हार्ट अटैक को लेकर ये हैं आंकड़ें
इसके अलावा, 40 साल की उम्र के बाद, दिल की सेहत की नियमित जांच (स्क्रीनिंग) ज़रूरी हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि 50% हार्ट अटैक के मामले बिना किसी पहले की चेतावनी के होते हैं। नींद की कमी, अत्यधिक तनाव, अनियमित जीवनशैली, प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाने का ज़्यादा सेवन, और कसरत की कमी ये सभी दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं। अलग-अलग समय पर किए गए कई अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं।
आपकी रोज़ाना की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए?
7 से 7.5 घंटे की नींद लें, तेज़ चाल से चलें जिससे आपको पसीना आए, हर हफ़्ते कसरत के लिए कम से कम 150 मिनट निकालें, खाने का एक नियमित समय तय करें और सेहतमंद खाना खाएं। सर्जन ने कहा कि समय बदल रहा है पहले लोग बीमार पड़ने के बाद ही अस्पताल जाते थे, लेकिन अब वे कोई बीमारी होने से पहले ही जांच के लिए जा रहे हैं। ECG, Echo और खून की जांच जैसे टेस्ट दिल की असली हालत का पता लगाने में उतने असरदार नहीं होते, जितनी कि एंजियोग्राफी। हालांकि, एंजियोग्राफी थोड़ी असहज हो सकती है और यह हर किसी के लिए सही नहीं होती।
इसका विकल्प क्या है?
प्रिवेंटिव केयर (निवारक देखभाल) के तहत अगर लोग अपने दिल की सेहत की असली स्थिति समझना चाहते हैं, तो वे iLive Connect की मदद ले सकते हैं। यह एक बायो-सेंसर डिवाइस है जो शरीर पर एक पैच की तरह काम करता है और 5 दिनों तक लगातार आपकी सेहत पर नज़र रखता है चाहे आप सो रहे हों, जाग रहे हों, बैठे हों या काम कर रहे हों और सटीक नतीजे देता है।

