सिया-केतन जैसे मामले अचानक नहीं होते! रिश्तों में प्यार, भरोसा और भ्रम के बीच फर्क समझना जरूर

punjabkesari.in Monday, Jun 29, 2026 - 12:02 PM (IST)

नारी डेस्क: हाल ही में सामने आए पुणे के चर्चित हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। शुरुआती जांच के अनुसार, सिया गोयल की शादी व्यवसायी केतन अग्रवाल से तय थी, लेकिन आरोप है कि उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन को गहरी खाई में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी। इस घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कोई व्यक्ति, जो कभी किसी के साथ जीवन बिताने का वादा करता है, वह इतनी भयावह घटना को कैसे अंजाम दे सकता है? क्या ऐसे मामलों के संकेत पहले से दिखाई देते हैं या सब कुछ अचानक होता है? रिलेशनशिप और इमोशनल बिहेवियर पर काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक घटना को सभी रिश्तों पर लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन कई बार ऐसे मामलों में कुछ मनोवैज्ञानिक संकेत पहले से मौजूद होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

क्या प्यार इंसान को सच देखने से रोक देता है?

जब कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से किसी के बहुत करीब होता है, तो अक्सर वह सामने वाले की कमियों और व्यवहार में मौजूद चेतावनी संकेतों को भी अनदेखा कर देता है। इंसान केवल शब्दों पर भरोसा करने लगता है, जबकि वास्तविकता कई बार व्यवहार में छिपी होती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ हमेशा कहते हैं कि किसी रिश्ते को केवल प्रेम के आधार पर नहीं, बल्कि उसके व्यवहारिक पक्ष को देखकर भी समझना चाहिए।

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एक युवती की कहानी जिसने रिश्तों का दूसरा पहलू दिखाया

एक काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कुछ वर्ष पहले एक युवती उनके पास इलाज के लिए आई थी। वह लगातार अवसाद और अकेलेपन से जूझ रही थी। शुरुआती बातचीत में मामला सामान्य डिप्रेशन का लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह सामने आया कि वह एक ही समय में कई लोगों के साथ भावनात्मक रिश्तों में थी। वह सुबह किसी व्यक्ति से घंटों बात करती, शाम किसी दूसरे के साथ समय बिताती और इसके बावजूद खुद को अकेला महसूस करती थी। जब उससे इस व्यवहार की वजह पूछी गई तो उसने कहा कि उसे हर रिश्ते में कुछ समय बाद खालीपन महसूस होने लगता था। जैसे ही एक रिश्ता उसकी भावनात्मक जरूरत पूरी नहीं कर पाता, वह दूसरे रिश्ते की तलाश शुरू कर देती थी।

अपराधबोध था, लेकिन आदत नहीं छूट रही थी

विशेषज्ञ के अनुसार, जब युवती से पूछा गया कि क्या उसे अपने व्यवहार पर पछतावा होता है, तो वह रो पड़ी। उसने स्वीकार किया कि उसे अपराधबोध होता था, लेकिन वही अपराधबोध उसे फिर किसी नए रिश्ते में सुकून खोजने के लिए मजबूर कर देता था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि उसके साथी अक्सर उसके व्यवहार पर सवाल नहीं उठाते थे। यदि कभी किसी ने पूछा कि वह पूरे दिन कहां थी या फोन क्यों नहीं उठाया, तो वह सामान्य बहाना बना देती थी। कई बार वह मजाक में सच्चाई भी बता देती थी, लेकिन सामने वाला व्यक्ति उस पर विश्वास ही नहीं करता था।

समस्या रिश्तों में नहीं, बचपन के अधूरे भावनात्मक घावों में थी

काउंसलिंग के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि युवती का व्यवहार केवल उसके वर्तमान रिश्तों से जुड़ा नहीं था। उसके बचपन में उसे पर्याप्त प्यार, सुरक्षा और भावनात्मक स्वीकार्यता नहीं मिली थी। यही कमी बड़े होने के बाद उसके रिश्तों में दिखाई देने लगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति के भीतर बचपन के भावनात्मक घाव अनसुलझे रह जाते हैं, तो वह बार-बार नए रिश्तों में वही सुकून खोजने की कोशिश करता है। लेकिन कोई भी नया रिश्ता उस खालीपन को स्थायी रूप से नहीं भर सकता। कई महीनों तक थेरेपी, परिवार के साथ बेहतर संवाद और आत्म-समझ विकसित करने के बाद युवती के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आया और उसने रिश्तों को लेकर अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया।

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क्यों नजरअंदाज हो जाते हैं रिश्तों के रेड फ्लैग

विशेषज्ञों का कहना है कि इंसान का दिमाग एक मनोवैज्ञानिक फिल्टर की तरह काम करता है, जो तय करता है कि किस बात पर विश्वास करना है और किस पर नहीं। लेकिन जब कोई व्यक्ति हमारी भावनात्मक जरूरतों, अकेलेपन या असुरक्षा को भरने जैसा महसूस कराता है, तब यही फिल्टर कमजोर पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में लोग झूठ, असंगत व्यवहार या अन्य चेतावनी संकेतों को भी प्यार का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

बदलते समाज के साथ बदल रही हैं रिश्तों की चुनौतियां

आज का समाज तेजी से बदल रहा है। आर्थिक दबाव, करियर की प्राथमिकताएं, बदलती जीवनशैली और रिश्तों से बढ़ती अपेक्षाएं लोगों के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर भावनात्मक परवरिश अब भी पारंपरिक सोच से जुड़ी हुई है। यही विरोधाभास कई रिश्तों में तनाव और गलतफहमियों की वजह बनता है।

स्वस्थ रिश्ते की असली नींव क्या है

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल प्यार किसी रिश्ते को सफल नहीं बना सकता। एक मजबूत रिश्ते के लिए विश्वास, पारदर्शिता, सम्मान, भावनात्मक परिपक्वता और खुला संवाद उतना ही जरूरी है। यदि किसी रिश्ते में बार-बार झूठ, नियंत्रण, डर, भावनात्मक दबाव या भ्रम की स्थिति बन रही है, तो उसे केवल प्रेम का नाम देकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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व्यवहार को शब्दों से ज्यादा महत्व दें

कोई व्यक्ति क्या कहता है, उससे ज्यादा जरूरी यह है कि वह व्यवहार में कैसा है। इंसान कुछ समय तक शब्द बदल सकता है, लेकिन उसका वास्तविक व्यवहार लंबे समय तक छिपाया नहीं जा सकता।

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परिवार और दोस्तों के सामने आपका सम्मान करता है या नहीं

ध्यान दें कि सामने वाला व्यक्ति आपको अपने परिवार और दोस्तों के बीच किस तरह प्रस्तुत करता है। यदि वह हर जगह अलग-अलग बातें करता है या रिश्ते को स्वीकार करने से बचता है, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है।

मुश्किल समय में उसका व्यवहार देखें

किसी व्यक्ति की असली पहचान उसके अच्छे समय में नहीं, बल्कि तनाव, आर्थिक संकट या मतभेद के दौरान सामने आती है। यदि वह ऐसे समय में अपमान, धमकी, चुप्पी या भावनात्मक दबाव का सहारा लेता है, तो यह रिश्ते के लिए खतरे का संकेत हो सकता है। हर रिश्ते में मतभेद होना सामान्य है, लेकिन बहस के दौरान इस्तेमाल किए गए शब्द व्यक्ति की सोच और व्यक्तित्व को उजागर करते हैं। यदि विवाद के दौरान सम्मान खत्म हो जाता है, तो रिश्ते की नींव भी कमजोर होने लगती है।

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रिश्ते जीतने के लिए नहीं, निभाने के लिए होते हैं

हर रिश्ते में यह तय करना जरूरी नहीं कि कौन सही है और कौन गलत। मजबूत रिश्ते विश्वास, सम्मान, करुणा और संवाद पर टिके होते हैं। जहां दोनों लोग एक-दूसरे को समझने और साथ मिलकर समाधान खोजने की कोशिश करते हैं, वहां कठिन परिस्थितियां भी रिश्ते को मजबूत बना सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई रिश्ता आगे नहीं बढ़ सकता, तो उसे ईमानदारी और सम्मान के साथ समाप्त करना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में हिंसा, छल या विश्वासघात कभी भी समाधान नहीं हो सकता।
  
 
 
 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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