दिव्यांका त्रिपाठी बनीं Twins बेटों की मां, जुड़वा बच्चों की परवरिश करने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स
punjabkesari.in Tuesday, Jun 02, 2026 - 06:36 PM (IST)
नारी डेस्क : टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी के शादी के 10 साल बाद जुड़वा बच्चों की मां बनी। वैसे भी माता-पिता बनने का एहसास जिंदगी के सबसे खूबसूरत अनुभवों में से एक माना जाता है। एक नन्हा मेहमान घर में आते ही घर को खुशियों से भर देता है, लेकिन जब एक साथ दो बच्चों की किलकारियां गूंजती हैं तो खुशियां भी दोगुनी हो जाती हैं और जिम्मेदारियां भी। आमतौर पर एक बच्चे की देखभाल करना ही आसान नहीं होता, ऐसे में जुड़वा बच्चों की परवरिश कई माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। दोनों बच्चों की जरूरतों, खान-पान, नींद और देखभाल का एक साथ ध्यान रखना काफी मेहनत और धैर्य मांगता है। हालांकि सही योजना, परिवार के सहयोग और कुछ स्मार्ट पैरेंटिंग टिप्स की मदद से जुड़वा बच्चों की परवरिश को आसान और आनंददायक बनाया जा सकता है। अगर आपके घर भी जुड़वा बच्चों ने जन्म लिया है, तो ये आसान टिप्स आपकी Parenting Journey को काफी हद तक आसान बना सकते हैं।
जुड़वा बच्चों की परवरिश करते समय ध्यान रखें ये बातें

दोनों बच्चों के लिए एक जैसा शेड्यूल बनाएं
जुड़वा बच्चों की परवरिश में समय का सही Management बहुत जरूरी होता है। ऐसे में कोशिश करें कि दोनों बच्चों के खाने, सोने, नहाने और खेलने का समय लगभग एक जैसा हो। इससे आपको बार-बार अलग-अलग काम नहीं करने पड़ेंगे और बच्चों की देखभाल भी आसानी से हो सकेगी। एक तय रूटीन होने से बच्चे भी धीरे-धीरे उसी दिनचर्या के अनुसार ढल जाते हैं, जिससे माता-पिता का काम काफी आसान हो जाता है।
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दूसरे पेरेंट्स से सलाह लें
अगर आपको जुड़वा बच्चों की परवरिश में किसी तरह की परेशानी हो रही है तो उन माता-पिता से बात करें जो पहले से इस अनुभव से गुजर चुके हैं। उनके अनुभव और सुझाव आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।

दोनों बच्चों को अलग-अलग पहचान दें
जुड़वा बच्चे भले ही देखने में एक जैसे लगते हों, लेकिन उनकी सोच, पसंद-नापसंद, स्वभाव और रुचियां एक-दूसरे से अलग हो सकती हैं। इसलिए उन्हें हमेशा एक ही नजरिए से न देखें। हर बच्चे की अपनी अलग पहचान और व्यक्तित्व होता है, जिसे समझना और सम्मान देना बेहद जरूरी है। उनकी पसंद और जरूरतों के अनुसार व्यवहार करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे खुद को खास महसूस करते हैं।
जिम्मेदारियां आपस में बांटें
जुड़वा बच्चों की परवरिश में जिम्मेदारियां भी दोगुनी हो जाती हैं, इसलिए सभी काम एक ही व्यक्ति पर छोड़ना सही नहीं है। माता-पिता को मिलकर बच्चों की देखभाल, खिलाने-पिलाने, सुलाने और अन्य जरूरी कामों की जिम्मेदारी बांट लेनी चाहिए। इससे न केवल काम का दबाव कम होता है, बल्कि दोनों माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताने और उनके साथ मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनाने का मौका भी मिलता है।

बच्चों की तुलना करने से बचें
अक्सर माता-पिता अनजाने में जुड़वा बच्चों की तुलना एक-दूसरे से करने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना बच्चों के आत्मविश्वास और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह समझना जरूरी है कि हर बच्चा अपनी अलग खूबियों, क्षमताओं और प्रतिभाओं के साथ बड़ा होता है। कोई बच्चा पढ़ाई में अच्छा हो सकता है, तो दूसरा खेल या किसी अन्य गतिविधि में बेहतर हो सकता है। इसलिए उनकी तुलना करने के बजाय उनकी विशेषताओं को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
खुद का भी ध्यान रखें
जुड़वा बच्चों की देखभाल में माता-पिता अक्सर अपनी सेहत और आराम को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए आपका शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है। जरूरत पड़ने पर परिवार और दोस्तों की मदद लेने में संकोच न करें।
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जुड़वा बच्चों की परवरिश निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन सही योजना, धैर्य और सहयोग के साथ यह सफर बेहद खूबसूरत बन सकता है। बच्चों को उनकी अलग पहचान दें, उनकी तुलना न करें और जिम्मेदारियों को मिलकर निभाएं। ऐसा करने से न सिर्फ बच्चों का विकास बेहतर होगा बल्कि परिवार में भी खुशियों का माहौल बना रहेगा।

