बच्चे को लग जाए लू तो तुरंत अपनाएं ये टिप्स!
punjabkesari.in Friday, Jun 12, 2026 - 03:38 PM (IST)
नारी डेस्क : गर्मियों में चलने वाली तेज लू बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का शरीर बड़ों की तुलना में तापमान को नियंत्रित करने में कम सक्षम होता है, इसलिए वे जल्दी हीट स्ट्रेस, हीट एग्जॉशन और हीटस्ट्रोक जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकते हैं। लू लगने पर बच्चे को चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी और यहां तक कि बेहोशी जैसी गंभीर परेशानियां भी हो सकती हैं। ऐसे में बढ़ते तापमान के दौरान माता-पिता के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि बच्चों को लू से कैसे बचाया जाए और किन बातों का विशेष ध्यान रखा जाए।
बच्चों को कैसे लगती है लू?
हीट स्ट्रेस (Heat Stress)
हीट स्ट्रेस लू लगने की शुरुआती अवस्था मानी जाती है। जब बच्चा लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहता है या तेज धूप के संपर्क में आता है, तो उसका शरीर तापमान को नियंत्रित करने के लिए अधिक पसीना निकालने लगता है। इस दौरान बच्चे को अत्यधिक गर्मी महसूस हो सकती है, वह चिड़चिड़ा या बेचैन हो सकता है और सामान्य से ज्यादा थका हुआ नजर आ सकता है। अगर इस स्थिति में बच्चे को तुरंत ठंडी जगह पर आराम न दिया जाए और पर्याप्त पानी न पिलाया जाए, तो समस्या आगे बढ़कर हीट एग्जॉशन या हीटस्ट्रोक का रूप ले सकती है।

हीट एग्जॉशन (Heat Exhaustion)
जब शरीर लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहता है और पानी तथा जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है, तो हीट एग्जॉशन की स्थिति पैदा हो सकती है। इस अवस्था में बच्चे को अत्यधिक थकान, सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी या मतली जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। कुछ बच्चों को कमजोरी, ज्यादा पसीना आना और ध्यान केंद्रित करने में भी परेशानी हो सकती है। यह संकेत है कि शरीर गर्मी से प्रभावित हो रहा है और यदि समय रहते देखभाल न की जाए, तो स्थिति गंभीर होकर हीटस्ट्रोक में बदल सकती है।
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हीटस्ट्रोक (Heat Stroke)
हीटस्ट्रोक लू की सबसे गंभीर और खतरनाक अवस्था होती है, जिसमें शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम काम करना बंद कर सकता है। इस स्थिति का असर सीधे दिमाग और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। बच्चे को तेज बुखार, भ्रम की स्थिति, अत्यधिक कमजोरी, चलने-फिरने में दिक्कत, बेहोशी या दौरे पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हीटस्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत बच्चे को ठंडी जगह पर ले जाएं और बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।

बच्चों को लू से कैसे बचाएं?
दोपहर में बाहर भेजने से बचें: सुबह या शाम के समय ही बच्चों को बाहर खेलने या किसी गतिविधि के लिए भेजें।
शरीर को हाइड्रेट रखें: बच्चे को हमेशा पानी की बोतल साथ दें और समय-समय पर पानी पीने की आदत डालें।
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वॉटर-रिच फूड्स खिलाएं: खीरा, तरबूज, खरबूजा और अन्य पानी से भरपूर फल बच्चों को जरूर खिलाएं।
छाछ और आम पन्ना दें: छाछ और आम पन्ना शरीर को ठंडा रखने और लू से बचाने में मदद कर सकते हैं।
हल्के और सूती कपड़े पहनाएं: बच्चों को ढीले और कॉटन के कपड़े पहनाएं ताकि शरीर को हवा मिलती रहे।

बच्चों को क्या नहीं देना चाहिए?
ज्यादा चाय, कॉफी और कैफीन युक्त ड्रिंक्स
अधिक शुगर वाले ड्रिंक्स
सिंथेटिक और टाइट कपड़े, जो पसीने को रोककर रखते हैं।
ध्यान रखें : अगर बच्चे को तेज गर्मी के बाद चक्कर, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी या दौरे जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज ही हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचा सकता है।

