बच्चों की परवरिश में न करें ये 5 गलतियां, मन में घर कर सकती है हीन भावना
punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 03:40 PM (IST)
नारी डेस्क : हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा आत्मविश्वासी, खुश और मानसिक रूप से मजबूत बने। इसके लिए वे बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित माहौल देने की पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें और अनजाने में कही गई बातें बच्चों के मन पर गहरा असर छोड़ सकती हैं। बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। माता-पिता का व्यवहार उनके आत्मविश्वास, भावनाओं और सोच को प्रभावित करता है। अगर उनकी भावनाओं को बार-बार नजरअंदाज किया जाए या उन्हें समझने की कोशिश न की जाए, तो वे धीरे-धीरे अपनी बातें छिपाने लगते हैं और खुद को अकेला महसूस कर सकते हैं। आइए जानते हैं माता-पिता की ऐसी 5 आदतों के बारे में, जिनसे बचना बेहद जरूरी है।
बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज करना
कई बार बच्चे छोटी-सी बात पर रोने लगते हैं या परेशान हो जाते हैं। ऐसे में अगर माता-पिता उनकी भावनाओं को समझने के बजाय कह देते हैं, "इतनी सी बात पर रो रहे हो" या "ड्रामा मत करो" तो बच्चे को लग सकता है कि उसकी भावनाएं मायने नहीं रखतीं। जो बात बड़ों को छोटी लगती है, वह बच्चे के लिए बहुत बड़ी हो सकती है। इसलिए बच्चों को डांटने से पहले उनकी बात सुनना और उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है।

बार-बार किए गए वादे पूरे न करना
बच्चे अपने माता-पिता पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। अगर उनसे बार-बार कोई वादा किया जाए और उसे पूरा न किया जाए, तो धीरे-धीरे उनका भरोसा कमजोर हो सकता है। अगर किसी कारण से प्लान बदल जाए, तो बच्चे को प्यार से इसकी वजह समझाएं। इससे उसे महसूस होगा कि उसकी भावनाओं और इच्छाओं की कद्र की जा रही है।
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बच्चे के व्यवहार के पीछे की वजह समझे बिना डांटना
बच्चे कई बार अपनी परेशानी शब्दों में नहीं बता पाते। उनका गुस्सा, जिद, चिड़चिड़ापन या ज्यादा रोना किसी भावनात्मक जरूरत का संकेत हो सकता है। हर बार डांटने या चिल्लाने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि बच्चा ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है। इससे बच्चे को भरोसा मिलेगा कि माता-पिता उसकी समस्या समझना चाहते हैं।

गलती पर सबके सामने शर्मिंदा करना
गलतियां बच्चों के सीखने का हिस्सा होती हैं। लेकिन अगर किसी गलती पर उन्हें रिश्तेदारों या दोस्तों के सामने डांटा जाए, उनका मजाक उड़ाया जाए या बार-बार ताने दिए जाएं, तो इससे उनके आत्मसम्मान को चोट पहुंच सकती है। ऐसे व्यवहार से बच्चे के मन में यह भावना आ सकती है कि गलती सिर्फ उसके काम में नहीं बल्कि उसमें ही है। आगे चलकर यही सोच आत्मविश्वास की कमी और हीन भावना का कारण बन सकती है।
बच्चों की तुलना दूसरों से करना
कई माता-पिता अनजाने में अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते हैं। जैसे- "देखो, वह बच्चा कितना अच्छा करता है" या "तुम उससे क्यों पीछे हो? बार-बार तुलना करने से बच्चे खुद को कम समझने लग सकते हैं और उनके अंदर असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। हर बच्चे की अपनी क्षमता और सीखने का तरीका अलग होता है।
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बच्चों को चाहिए प्यार, भरोसा और सम्मान
बच्चों को परफेक्ट माता-पिता नहीं चाहिए, बल्कि ऐसे माता-पिता चाहिए जो उनकी बात सुनें, उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें सम्मान दें। गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन गुस्से में बोले गए शब्द बच्चे के मन पर लंबे समय तक असर छोड़ सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आत्मविश्वासी, भावनात्मक रूप से मजबूत और अपनी बात खुलकर रखने वाला बने, तो उसके साथ धैर्य और प्यार से पेश आएं। अच्छी परवरिश की नींव प्यार, भरोसे और सम्मान से ही मजबूत होती है।

