4 महीने की बच्ची को आया कार्डियक अरेस्ट, डॉक्टरों ने बताए इसके पीछे की वजह
punjabkesari.in Sunday, Jun 21, 2026 - 03:33 PM (IST)
नारी डेस्क: हाल ही में एक 4 महीने की बच्ची को कार्डियक अरेस्ट आने की खबर ने सभी को चिंता में डाल दिया है। आमतौर पर यह समस्या वयस्कों या बुजुर्गों में देखी जाती है, लेकिन बच्चों में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर इतनी कम उम्र में भी यह गंभीर स्थिति क्यों पैदा हो सकती है और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं।
क्या शिशुओं में भी हो सकता है कार्डियक अरेस्ट
डॉक्टर्स के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट किसी भी उम्र में हो सकता है, यहां तक कि नवजात और शिशुओं में भी। यह स्थिति तब होती है जब दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है, जिससे शरीर में खून का संचार रुक जाता है और दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। अगर तुरंत इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

जन्मजात दिल की समस्याएं बन सकती हैं बड़ा कारण
कई बच्चे जन्म से ही दिल से जुड़ी समस्याओं के साथ पैदा होते हैं। इसमें दिल में छेद, हार्ट वाल्व की गड़बड़ी या ब्लड सर्कुलेशन में दिक्कत जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों में बच्चे का दिल सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता और गंभीर मामलों में कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है। कुछ बच्चों में दिल की धड़कन सामान्य नहीं होती कभी बहुत तेज, कभी बहुत धीमी या पूरी तरह अनियमित। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में अतालता (Arrhythmia) कहा जाता है। अगर समय रहते इसका पता न चले और इलाज न हो, तो यह आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है। नवजात और छोटे बच्चों में निमोनिया, सेप्सिस या अन्य गंभीर संक्रमण भी दिल पर असर डाल सकते हैं। इन बीमारियों के कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे हार्ट पर दबाव बढ़ता है और स्थिति बिगड़ सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जोखिम और बढ़ जाता है।

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सांस रुकने की समस्या से भी बढ़ता है खतरा
शिशुओं में कभी-कभी लंबे समय तक सांस रुकने की समस्या देखी जाती है। जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो यह दिल के कार्य को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में आनुवंशिक (genetic) कारण भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं, जिससे ऐसी गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर किसी बच्चे में अचानक बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, दूध पीने में दिक्कत या भूख में कमी जैसे लक्षण दिखें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे संकेत किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिशुओं में हार्ट से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है। नियमित जांच और लक्षणों पर ध्यान देकर कई गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है। माता-पिता को किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि शुरुआती कदम ही बच्चे की जान बचा सकते हैं।


