बच्चे का सूजा चेहरा और आंखों में आंसू, लेकर डॉक्टर के पास पहुंची मां, डॉक्टर भी रह गए हैरान

punjabkesari.in Wednesday, Jun 17, 2026 - 04:19 PM (IST)

नारी डेस्क:  दांतों में दर्द को अक्सर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही छोटी-सी समस्या बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। हाल ही में एक मां अपने 10 साल के बेटे को लेकर डॉक्टर के पास पहुंची। बच्चे का चेहरा सूजा हुआ था और दर्द की वजह से उसकी आंखों में आंसू थे। पूरी रात दांत दर्द से परेशान रहने के बाद मां को लगा कि अब विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। जांच में पता चला कि बच्चे के दांतों में कैविटी काफी बढ़ चुकी थी और संक्रमण दांत की जड़ तक पहुंच गया था। इसके बाद उसे जरूरी डेंटल ट्रीटमेंट दिया गया और साथ ही कुछ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपाय अपनाने की सलाह दी गई, जिससे उसके ओरल हेल्थ में सुधार हुआ।

क्या है डेंटल कैविटी और क्यों होती है

डेंटल कैविटी यानी दांतों में सड़न एक ऐसी समस्या है, जो मुंह में बैक्टीरिया बढ़ने और दांतों की सही सफाई न होने के कारण होती है। जब खाने के कण दांतों के बीच फंस जाते हैं और समय पर साफ नहीं किए जाते, तो बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं। यह एसिड धीरे-धीरे दांतों की बाहरी परत यानी इनेमल को नुकसान पहुंचाता है। आयुर्वेद के अनुसार, दांतों की सड़न का संबंध कफ दोष के असंतुलन से भी माना जाता है।

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क्या आयुर्वेद कैविटी को पूरी तरह ठीक कर सकता है

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि दांत में बड़ा छेद बन चुका है या संक्रमण जड़ तक पहुंच गया है, तो रूट कैनाल या फिलिंग जैसे डेंटल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है। आयुर्वेद क्षतिग्रस्त इनेमल को दोबारा नहीं बना सकता, लेकिन यह दांतों को और अधिक खराब होने से बचाने और दर्द कम करने में मदद कर सकता है।

आयुर्वेदिक उपायों से

दांत दर्द और संवेदनशीलता कम हो सकती है। मसूड़ों को मजबूती मिल सकती है। मुंह के बैक्टीरिया कम हो सकते हैं। नई कैविटी बनने का खतरा घट सकता है।

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ऑयल पुलिंग: मुंह की सफाई का पुराना तरीका

आयुर्वेद में गंडूष और कवल यानी ऑयल पुलिंग को ओरल हेल्थ के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। सुबह खाली पेट एक चम्मच तिल या नारियल तेल मुंह में लेकर 5 से 10 मिनट तक घुमाएं। इसके बाद तेल बाहर थूक दें और गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। यह उपाय मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया को कम करने और मसूड़ों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।

हर्बल दंत चूर्ण का करें इस्तेमाल

रासायनिक टूथपेस्ट के बजाय कुछ आयुर्वेदिक पाउडर दांतों की सफाई और मसूड़ों की मजबूती में सहायक माने जाते हैं।

इनमें शामिल हैं

त्रिफला पाउडर – मसूड़ों और दांतों के लिए लाभकारी
नीम पाउडर – प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर
लौंग पाउडर – दर्द में राहत देने वाला
मुलेठी पाउडर – दांतों की सफाई में मददगार

इनका इस्तेमाल हल्के हाथों से मसाज के रूप में किया जा सकता है।

लौंग से मिल सकती है दर्द में राहत

लौंग को दांत दर्द का पारंपरिक उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व अस्थायी रूप से दर्द कम करने में मदद कर सकते हैं। यदि लौंग का तेल इस्तेमाल करें, तो उसे सीधे लगाने के बजाय थोड़ा पानी मिलाकर या रूई की सहायता से प्रभावित हिस्से पर लगाएं।

त्रिफला का माउथवॉश

त्रिफला पाउडर को पानी में उबालकर ठंडा कर लें और उससे कुल्ला करें। इससे मुंह की दुर्गंध कम हो सकती है और मसूड़ों की सूजन में राहत मिल सकती है। नीम की दातुन भी है फायदेमंद नीम को प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल माना जाता है। नीम की दातुन या नीम युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल मुंह के बैक्टीरिया को कम करने में सहायक हो सकता है।

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खानपान का रखें विशेष ध्यान

आयुर्वेद के अनुसार, दांतों का स्वास्थ्य हमारे भोजन से गहराई से जुड़ा होता है।

इन चीजों से बचें

ज्यादा मिठाइयां
सॉफ्ट ड्रिंक्स
चिपचिपी चॉकलेट
मैदा से बनी चीजें
अत्यधिक चीनी वाले स्नैक्स
डाइट में शामिल करें:
ताजे फल और हरी सब्जियां
आंवला
तिल के बीज

कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ

आंवला विशेष रूप से मसूड़ों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। कब तुरंत डेंटिस्ट से मिलना चाहिए यदि निम्न लक्षण दिखाई दें, तो आयुर्वेदिक उपायों के साथ डेंटिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है- दांत में काला या भूरा छेद दिखना, लगातार तेज दर्द होना, मसूड़ों या चेहरे पर सूजन आना, कई दिनों तक सेंसिटिविटी बने रहना। विशेषज्ञों का मानना है कि कैविटी के शुरुआती चरण में सही इलाज और अच्छी ओरल केयर अपनाने से दांतों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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