मशहूर निर्देशक के इकलौते बेटे के निधन के बाद बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में हुए एडमिट
punjabkesari.in Sunday, Jan 04, 2026 - 10:16 AM (IST)
नारी डेस्क: साउथ इंडियन सिनेमा के जाने-माने निर्देशक भरतिराजा इन दिनों अस्पताल में भर्ती हैं। 80 साल की उम्र में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें चेन्नई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि वह पिछले साल अपने इकलौते बेटे के निधन के बाद से गहरे सदमे में हैं और उसी का असर अब उनकी सेहत पर भी दिखने लगा है।
बेटे के निधन से टूट गए थे भरतिराजा
मार्च 2025 में भरतिराजा के इकलौते बेटे मनोज भरतिराजा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। मनोज खुद भी एक निर्देशक थे। बेटे की मौत से भरतिराजा पूरी तरह टूट गए थे और वह इस दुख से उबर नहीं पाए। कुछ समय के लिए वह अपनी बेटी के पास मलेशिया भी चले गए थे, लेकिन बाद में चेन्नई लौट आए।
#WATCH | Veteran director Bharathiraja has been admitted to a private hospital in Chennai, and he has been undergoing treatment for the past three days, according to his family. The 84-year-old was deeply affected and has been unwell after the death of his son Manoj in March this… pic.twitter.com/B6iK6lrKcu
— The Federal (@TheFederal_News) December 29, 2025
क्यों हुए अस्पताल में भर्ती?
कुछ दिन पहले भरतिराजा को सांस लेने में तकलीफ हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। परिवार के लोगों का कहना है कि उनकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है, क्योंकि वह अब भी बेटे को खोने के गम से बाहर नहीं आ पाए हैं।
कौन हैं भरतिराजा?
भरतिराजा साउथ सिनेमा के सबसे सम्मानित और सफल निर्देशकों में से एक हैं। उन्होंने ‘16 वयथिनिले’ जैसी यादगार फिल्म बनाई, जो आज भी क्लासिक मानी जाती है। उन्होंने राधिका, राधा और कार्तिक जैसे कई कलाकारों को फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिलाई। भरतिराजा ने- रजनीकांत, कमल हासन, श्रीदेवी जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया है।
एक्टिंग में भी दिखा हुनर
निर्देशन के साथ-साथ भरतिराजा ने अभिनय भी किया है। धनुष की फिल्म ‘तिरुचित्रमबलम’ में उन्होंने धनुष के दादा का किरदार निभाया था, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। राष्ट्रीय सम्मान भरतिराजा ने तमिल, तेलुगु और हिंदी फिल्मों का निर्देशन किया है। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें साल 2004 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा था।

