शरीर पर दाद को न करें नजरअंदाज, हो सकता है स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा!
punjabkesari.in Sunday, Oct 04, 2026 - 10:18 AM (IST)
नारी डेस्क: शरीर पर दाद, जलन या छोटे-छोटे फफोले निकलना देखकर अक्सर लोग इसे सामान्य त्वचा की समस्या समझ लेते हैं। लेकिन अगर दानों के साथ तेज दर्द, जलन, चुभन या झुनझुनी हो रही है और ये शरीर के सिर्फ एक हिस्से में दिखाई दे रहे हैं, तो यह शिंगल्स हो सकता है। शिंगल्स को आम भाषा में एक तरह का दर्दनाक दाद भी कहा जाता है। यह बीमारी सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं रहती। कुछ अध्ययनों में शिंगल्स के बाद स्ट्रोक और दिल से जुड़ी समस्याओं के जोखिम में अस्थायी बढ़ोतरी देखी गई है। खासतौर पर संक्रमण के शुरुआती दिनों और हफ्तों में यह जोखिम अधिक बताया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शिंगल्स होने वाले हर व्यक्ति को स्ट्रोक या हार्ट अटैक होगा।
क्या होता है शिंगल्स
शिंगल्स वैरिसेला-जोस्टर वायरस के कारण होता है। यही वायरस चिकनपॉक्स का कारण भी बनता है। जब किसी व्यक्ति को चिकनपॉक्स होता है और वह ठीक हो जाता है, तब वायरस शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं होता। यह नसों में निष्क्रिय अवस्था में रह सकता है। कई साल बाद जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है या उम्र बढ़ती है, तो यह वायरस दोबारा सक्रिय हो सकता है। इसके बाद शिंगल्स के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसमें आमतौर पर शरीर या चेहरे के एक तरफ दर्द, जलन, खुजली या झुनझुनी महसूस होती है। इसके बाद उसी हिस्से में छोटे-छोटे लाल दाने और पानी वाले फफोले निकल सकते हैं। ये फफोले कुछ समय बाद सूखकर पपड़ी में बदल जाते हैं और आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं।
दाने ठीक होने के बाद भी रह सकता है दर्द
शिंगल्स में सिर्फ त्वचा पर निकलने वाले दाने ही परेशानी नहीं देते। कुछ लोगों में दाने ठीक होने के बाद भी नसों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है। इसे पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया कहा जाता है। इसमें प्रभावित हिस्से में जलन, चुभन या दर्द कई महीनों तक रह सकता है। उम्र बढ़ने के साथ इस समस्या का खतरा भी बढ़ता है। अगर शिंगल्स चेहरे या आंखों के आसपास हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे मामलों में आंखों और नजर पर असर पड़ने का खतरा हो सकता है। बहुत दुर्लभ मामलों में संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचकर गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
शिंगल्स से स्ट्रोक का क्या संबंध है
कुछ शोधों में शिंगल्स के बाद स्ट्रोक का खतरा बढ़ने की बात सामने आई है। यह खतरा संक्रमण के शुरुआती समय में ज्यादा देखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक संभावित कारण वायरस के कारण रक्त वाहिकाओं में होने वाली सूजन हो सकती है। इससे रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है और कुछ लोगों में स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, यह एक संभावित संबंध है और हर शिंगल्स मरीज में ऐसा होना जरूरी नहीं है। व्यक्ति की उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां और दूसरे जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है
कुछ अध्ययनों में शिंगल्स के बाद हार्ट अटैक और दूसरी हृदय संबंधी घटनाओं के जोखिम में भी बढ़ोतरी देखी गई है। माना जाता है कि संक्रमण के दौरान शरीर में होने वाली सूजन और रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाला असर इसमें भूमिका निभा सकता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को शिंगल्स हुआ है और साथ ही सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे केवल शिंगल्स का असर मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
शिंगल्स से बचाव कैसे करें
शिंगल्स से बचाव के लिए टीकाकरण एक महत्वपूर्ण उपाय है। खासतौर पर अधिक उम्र के लोगों और कुछ स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों में डॉक्टर से शिंगल्स वैक्सीन के बारे में सलाह ली जा सकती है। अगर घर में किसी व्यक्ति को शिंगल्स है, तो उसके फफोलों को सीधे छूने से बचें। प्रभावित हिस्से को साफ रखें और संभव हो तो ढककर रखें। चिकनपॉक्स न होने वाले या उसका टीका न लगवाने वाले लोगों के लिए संक्रमित फफोलों के सीधे संपर्क से बचना खास तौर पर जरूरी है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
अगर शरीर के एक हिस्से में अचानक दर्द, जलन और फफोलों के साथ दाने निकल रहे हैं, तो जल्द डॉक्टर को दिखाएं। खासकर चेहरे, आंख या कान के आसपास शिंगल्स होने पर देरी नहीं करनी चाहिए। शिंगल्स का इलाज शुरुआती चरण में शुरू करना अधिक फायदेमंद हो सकता है। इसलिए शरीर पर दर्दनाक दाने या फफोले निकलने को सिर्फ सामान्य दाद समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज न करें।

