हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन? इसे मामूली थकान समझने की भूल न करें, हो सकता है ब्रेन अटैक

punjabkesari.in Wednesday, Oct 07, 2026 - 01:11 PM (IST)

 नारी डेस्क:   कभी-कभी काम की थकान या ज्यादा देर तक एक ही स्थिति में बैठे रहने के बाद हाथ-पैर सुन्न पड़ सकते हैं। लेकिन अगर चेहरे, हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो और खासकर यह शरीर के एक तरफ हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह स्ट्रोक यानी ब्रेन अटैक का चेतावनी संकेत हो सकता है। स्ट्रोक एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें दिमाग के किसी हिस्से तक खून की सप्लाई रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। खून और ऑक्सीजन की कमी से मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से प्रभावित होने लगती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है।

आखिर कैसे होता है ब्रेन अटैक?

स्ट्रोक मुख्य रूप से दो तरह का होता है। एक स्थिति में खून का थक्का या किसी अन्य रुकावट के कारण दिमाग तक रक्त पहुंचना कम या बंद हो जाता है। इसे इस्केमिक स्ट्रोक कहा जाता है। दूसरी स्थिति में मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और दिमाग में रक्तस्राव होने लगता है। इसे हेमरेजिक स्ट्रोक कहा जाता है।दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं और इनमें तुरंत चिकित्सीय सहायता की जरूरत होती है।

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चेहरे, हाथ या पैर का अचानक सुन्न होना हो सकता है बड़ा संकेत

स्ट्रोक के सबसे आम संकेतों में चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन शामिल है। खासकर अगर परेशानी शरीर के सिर्फ एक तरफ महसूस हो रही हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। कई बार व्यक्ति का चेहरा एक तरफ झुक जाता है। मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा ठीक से ऊपर नहीं उठता। इसी तरह दोनों हाथ ऊपर उठाने पर एक हाथ नीचे की ओर गिर सकता है या उसमें कमजोरी महसूस हो सकती है। यही वजह है कि अचानक हुए ऐसे बदलाव को सिर्फ थकान, कमजोरी या नस दबने की समस्या मानकर घर पर इंतजार करना ठीक नहीं है।

बोलने में अचानक दिक्कत भी हो सकती है स्ट्रोक का संकेत

अगर कोई व्यक्ति अचानक ठीक से बोल नहीं पा रहा है, उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी है या उसे दूसरों की बात समझने में परेशानी हो रही है, तो यह भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में व्यक्ति सही शब्द बोल नहीं पाता या अचानक भ्रमित नजर आने लगता है। ऐसे लक्षण अचानक शुरू हों तो समय गंवाए बिना इमरजेंसी मदद लेनी चाहिए।

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अचानक धुंधला दिखाई देना या संतुलन बिगड़ना

स्ट्रोक का असर केवल हाथ-पैर या बोलने पर ही नहीं पड़ता। अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देना, देखने में परेशानी होना, चक्कर आना, चलने में दिक्कत या शरीर का संतुलन बिगड़ना भी चेतावनी संकेत हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को अचानक चलने में परेशानी होने लगे या वह बिना वजह लड़खड़ाने लगे, तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर आराम करने के लिए छोड़ना सही नहीं है।

बिना वजह अचानक तेज सिरदर्द भी हो सकता है संकेत

कुछ लोगों में स्ट्रोक के दौरान अचानक बहुत तेज सिरदर्द हो सकता है, खासकर जब सिरदर्द का कोई स्पष्ट कारण समझ में न आए। इसके साथ उल्टी, बेहोशी या दूसरी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसा सिरदर्द अचानक शुरू हुआ हो और सामान्य से बिल्कुल अलग महसूस हो रहा हो, तो तुरंत चिकित्सीय मदद लेना जरूरी है।

कुछ मिनट बाद लक्षण ठीक हो जाएं तो भी खतरा खत्म नहीं होता

कई बार स्ट्रोक जैसे लक्षण कुछ मिनटों के बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं। लोग इसे देखकर सोच लेते हैं कि शायद कमजोरी या थकान की वजह से ऐसा हुआ था। लेकिन यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक यानी टीआईए, जिसे आम भाषा में मिनी स्ट्रोक कहा जाता है, हो सकता है। टीआईए के लक्षण थोड़े समय में खत्म हो सकते हैं, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक है। यह भविष्य में होने वाले बड़े स्ट्रोक की चेतावनी हो सकता है। शुरुआत में यह पता लगाना भी संभव नहीं होता कि लक्षण टीआईए के हैं या बड़े स्ट्रोक के, इसलिए दोनों ही स्थितियों में तुरंत मेडिकल जांच जरूरी है।

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किन लोगों में बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा

स्ट्रोक का खतरा कई स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े कारणों से बढ़ सकता है। इनमें खास तौर पर शामिल हैं

हाई ब्लड प्रेशर

डायबिटीज

बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल

धूम्रपान या तंबाकू का सेवन

ज्यादा शराब पीना

मोटापा

शारीरिक गतिविधि की कमी

अस्वस्थ खान-पान

इनमें से कुछ जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर पर नजर रखना, संतुलित खान-पान और नियमित शारीरिक गतिविधि स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो क्या करें

अगर किसी व्यक्ति के चेहरे, हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन या कमजोरी हो, बोलने में दिक्कत हो, नजर धुंधली हो जाए या अचानक संतुलन बिगड़ जाए, तो इंतजार न करें। तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। लक्षण किस समय शुरू हुए थे, इसका समय नोट कर लें, क्योंकि अस्पताल में डॉक्टरों के लिए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। स्ट्रोक के इलाज में समय बहुत मायने रखता है और कुछ उपचार लक्षण शुरू होने के बाद सीमित समय के भीतर ही अधिक प्रभावी होते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि मरीज को अपनी तरफ से कोई दवा देकर इलाज करने की कोशिश न करें। स्ट्रोक का प्रकार जानने के लिए डॉक्टरों को जांच और अक्सर ब्रेन इमेजिंग की जरूरत होती है। इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर सीधे अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचना ही सबसे जरूरी कदम है।

एक बात हमेशा याद रखें

अचानक सुन्नपन, कमजोरी, बोलने में दिक्कत, चेहरे का टेढ़ा होना या संतुलन बिगड़ना—इनमें से कोई भी लक्षण अचानक दिखाई दे तो उसे मामूली थकान समझकर समय न गंवाएं। स्ट्रोक में जल्दी इलाज मिलने से गंभीर नुकसान का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
  
 


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Content Editor

Priya Yadav

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