पहले मामूली बुखार, फिर बिगड़ने लगती है हालत! बच्चों को शिकार बनाता है यह छोटा कीड़ा
punjabkesari.in Wednesday, Oct 21, 2026 - 11:31 AM (IST)
नारी डेस्क: गांवों में घरों के आसपास पेड़-पौधे, घनी घास और झाड़ियां होना आम बात है। बच्चे अक्सर इन्हीं जगहों पर खेलते हैं, लेकिन कई बार इन जगहों पर मौजूद छोटे-छोटे कीड़े स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। ऐसा ही एक बेहद छोटा कीड़ा माइट है, जिसके काटने से कुछ मामलों में टाइफस, खासकर स्क्रब टाइफस जैसे संक्रमण का खतरा हो सकता है। परेशानी की बात यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में परिवार बीमारी की गंभीरता को समझने में देर कर सकता है। हालांकि, समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
क्या है माइट और कहां पाया जाता है?
बेगूसराय सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण कुमार ने लोकल 18 को बताया कि माइट बेहद छोटा कीड़ा होता है। इसकी कुछ प्रजातियों के लार्वा के काटने से स्क्रब टाइफस संक्रमण हो सकता है। इस तरह के कीड़ों का खतरा गर्मी और बरसात के मौसम में बढ़ सकता है। ये अक्सर झाड़ियों, घनी घास और ऐसे इलाकों में पाए जाते हैं, जहां पेड़-पौधे ज्यादा होते हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए इन जगहों पर खेलते समय सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि, हर माइट के काटने से टाइफस नहीं होता। संक्रमण का खतरा कीड़े की प्रजाति और दूसरी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

माइट के काटने पर कैसे दिखते हैं लक्षण?
डॉक्टर के मुताबिक, कुछ मामलों में कीड़े के काटने वाली जगह पर छोटा घाव या काले रंग की पपड़ी जैसा निशान बन सकता है। शुरुआत में परिवार के लोग इसे मामूली कीड़े का काटना समझकर नजरअंदाज कर सकते हैं। इसके बाद बच्चे को बुखार और कमजोरी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
संक्रमण होने पर दिखाई देने वाले कुछ संभावित लक्षण इस प्रकार हैं
तेज बुखार: बच्चे को लगातार या अचानक तेज बुखार आ सकता है।
शरीर में कमजोरी: बच्चा सामान्य से ज्यादा थका हुआ महसूस कर सकता है या सुस्ती दिखा सकता है।
आंखों में लालिमा: कुछ बच्चों में आंखें लाल होने की शिकायत भी हो सकती है।
काटने वाली जगह पर निशान: त्वचा पर छोटा घाव या काली पपड़ी जैसा निशान दिखाई दे सकता है, हालांकि यह हर मरीज में नहीं होता।
अन्य लक्षण: सिरदर्द, शरीर में दर्द और कभी-कभी त्वचा पर चकत्ते भी दिखाई दे सकते हैं।
ध्यान रखें कि ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं। केवल बुखार या घाव देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि बच्चे को टाइफस ही है। इसके लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है।
समय पर पहचान क्यों है जरूरी
स्क्रब टाइफस जैसे संक्रमण की शुरुआत में लक्षण सामान्य बुखार से मिलते-जुलते हो सकते हैं। इस वजह से बीमारी की पहचान करना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है। अगर संक्रमण का समय पर इलाज न हो, तो कुछ मामलों में यह गंभीर रूप ले सकता है और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। गंभीर स्थिति में दिमाग से जुड़ी जटिलताएं भी हो सकती हैं।
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डॉ. कृष्ण कुमार के अनुसार, पहले टाइफस को कम देखी जाने वाली बीमारी माना जाता था, लेकिन उनके पास अब ऐसे बच्चों के मामले भी आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले करीब दो महीनों में इस तरह के लगभग 50 मामलों में बच्चों का इलाज किया गया। उनके मुताबिक, समय पर बीमारी की पहचान होने से बच्चों को बचाने में मदद मिली। बच्चे को लगातार तेज बुखार हो, वह बहुत सुस्त हो जाए या त्वचा पर किसी घाव के साथ बुखार भी दिखाई दे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बीमारी की पुष्टि और इलाज में देरी करना खतरनाक हो सकता है।

बच्चे की हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाना पड़ा
इस बीमारी को लेकर मुंगेर जिले के मेदनी चौकी निवासी राम बालक के परिवार का अनुभव भी सामने आया है। परिवार के मुताबिक, उनके बच्चे की तबीयत खराब होने पर पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन बीमारी की सही पहचान नहीं हो पाई। बाद में बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे दूसरे अस्पताल में रेफर करना पड़ा। परिवार ने बताया कि उनका घर बांध के किनारे है और आसपास पेड़-पौधे तथा झाड़ियां मौजूद हैं। ऐसे में उन्हें आशंका है कि बच्चे को माइट ने इसी आसपास के इलाके में काटा होगा। हालांकि, केवल आसपास झाड़ियां होने के आधार पर संक्रमण का स्रोत निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि बच्चों में लगातार बुखार रहने पर केवल सामान्य बुखार समझकर इलाज करते रहना सही नहीं है। अगर दवा के बाद भी हालत में सुधार न हो या नए लक्षण सामने आएं, तो दोबारा चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
बच्चों को माइट के काटने से कैसे बचाएं?
माइट और दूसरे कीड़ों के संपर्क में आने का खतरा कम करने के लिए माता-पिता कुछ आसान सावधानियां अपना सकते हैं।
झाड़ियों और घनी घास में खेलने से बचाएं: बच्चों को ऐसी जगहों पर खेलने से रोकें, जहां बहुत ज्यादा झाड़ियां या घास हो। घर के आसपास की घास और झाड़ियों को साफ रखें।
पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं: घास या पेड़-पौधों वाले इलाके में जाते समय बच्चों को पूरी बांह के कपड़े, लंबी पैंट और बंद जूते पहनाना बेहतर है।
खेलने के बाद शरीर की जांच करें: बाहर से लौटने पर बच्चे के कपड़ों और त्वचा की जांच करें। खासतौर पर हाथ-पैर, कमर और शरीर के उन हिस्सों पर ध्यान दें, जहां कीड़े छिप सकते हैं।
बुखार और घाव को नजरअंदाज न करें: अगर बच्चे को बुखार के साथ शरीर पर असामान्य निशान या घाव दिखाई दे, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। डॉक्टर को यह भी बताएं कि बच्चा हाल में झाड़ियों या घनी घास वाले इलाके में गया था या नहीं।
खुद से दवा न दें: बच्चे को लगातार तेज बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं न दें। सही इलाज के लिए बीमारी की पहचान जरूरी है।
डॉक्टरों को भी इन लक्षणों पर देना चाहिए ध्यान
ग्रामीण इलाकों में बच्चों को बुखार होने पर डॉक्टरों के लिए उनकी रहने की जगह, हाल में बाहर खेलने और कीड़ों के संपर्क में आने की जानकारी उपयोगी हो सकती है। यदि लक्षण और जांच के आधार पर संदेह हो, तो डॉक्टर स्क्रब टाइफस सहित अन्य संभावित संक्रमणों की जांच करा सकते हैं।
सबसे जरूरी बात: माइट बहुत छोटा हो सकता है, लेकिन कुछ प्रजातियों के काटने से होने वाला संक्रमण गंभीर हो सकता है। फिर भी हर बुखार या हर कीड़े के काटने को टाइफस समझना सही नहीं है। बच्चों में लगातार तेज बुखार, असामान्य सुस्ती या दूसरे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर जल्द चिकित्सकीय मदद लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

