‘शरीर में दर्द होता है…’ मां बनने के बाद दिव्यांका त्रिपाठी ने 5 महीने के जुड़वां बच्चों को लेकर कही ये बात
punjabkesari.in Tuesday, Oct 13, 2026 - 03:59 PM (IST)
नारी डेस्क: टीवी की मशहूर एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी इन दिनों अपनी जिंदगी के एक नए दौर से गुजर रही हैं। मां बनने के बाद जहां उनकी खुशियां बढ़ी हैं, वहीं अब बच्चों की देखभाल के साथ काम संभालना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। दिव्यांका और उनके पति विवेक दहिया के जुड़वां बच्चे अब पांच महीने के हो चुके हैं। इस बीच एक्ट्रेस ने काम पर वापसी के बाद आने वाली परेशानियों के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि मां बनने के बाद काम करना बाहर से जितना आसान नजर आता है, असल में उतना होता नहीं है।
बच्चों को कुछ मिनटों के लिए भी अकेला छोड़ना मुश्किल
दिव्यांका त्रिपाठी इन दिनों अपने पति विवेक दहिया के साथ रियलिटी शो 'पति पत्नी और पंगा' में नजर आ रही हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि शो की शूटिंग के लिए वापस काम शुरू करना उनके लिए कितना मुश्किल रहा है। एक्ट्रेस के मुताबिक, इस उम्र में बच्चों की देखभाल करना कुछ हद तक आसान होता है, क्योंकि वे ज्यादातर समय सोते हैं या दूध पीते हैं। लेकिन धीरे-धीरे बच्चे एक्टिव होने लगे हैं और आगे बढ़ने की कोशिश भी कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें अकेला छोड़ना आसान नहीं है। दिव्यांका ने बताया कि उनके लिए बच्चों को दो-चार मिनट के लिए भी अकेला छोड़ना मुश्किल होता है। यही वजह है कि उन्हें कई बार बच्चों को अपने साथ शूटिंग सेट पर ले जाना पड़ता है। हालांकि, बच्चों को साथ लेकर काम करना भी अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है।
'शरीर में दर्द होता है, दिमाग सुस्त हो जाता है'
मां बनने के बाद महिलाओं को होने वाली परेशानियों पर बात करते हुए दिव्यांका ने कहा कि यह सोचना गलत है कि महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद आसानी से काम पर लौट सकती हैं। उन्होंने बताया कि कैमरे के सामने काम करते हुए भले ही सब कुछ सामान्य दिखाई दे, लेकिन इसके पीछे कई तरह की चुनौतियां होती हैं। एक्ट्रेस ने कहा कि काम के दौरान शरीर में दर्द होता है और दिमाग भी सुस्त महसूस करता है। इसके बावजूद महिलाओं को अपनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। उनके मुताबिक, हो सकता है कि उन्हें इतनी जल्दी काम पर वापस न लौटना पड़ता, लेकिन अब वह काम कर रही हैं और अपनी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।
दिव्यांका ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी महिला की तुलना दूसरी महिला से नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला बच्चे के जन्म के बाद जल्दी काम शुरू कर देती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि दूसरी महिला भी उतनी ही जल्दी ऐसा कर पाएगी। हर महिला की परिस्थितियां अलग होती हैं और हर किसी को अपनी सहूलियत के हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए।
काम पर लौटने के लिए खुद पर दबाव न डालें महिलाएं
दिव्यांका की बातों से साफ है कि वह नई मांओं को एक जरूरी संदेश देना चाहती हैं। अक्सर बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वे जल्द से जल्द अपनी पुरानी दिनचर्या में लौट आएं। लेकिन बच्चे की देखभाल, नींद की कमी और शरीर में होने वाले बदलावों के बीच खुद के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। एक्ट्रेस का मानना है कि किसी दूसरी महिला को देखकर खुद पर जल्दी काम शुरू करने का दबाव नहीं डालना चाहिए। हर महिला का अनुभव अलग होता है, इसलिए उसे अपनी स्थिति और जरूरतों के अनुसार फैसला लेना चाहिए। दिव्यांका खुद भी इसी तरह धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं।
विवेक और परिवार के सपोर्ट से मिल रही हिम्मत
दिव्यांका ने अपनी इस नई जिम्मेदारी को निभाने का श्रेय पति विवेक दहिया और अपने परिवार को भी दिया। उन्होंने बताया कि विवेक हर कदम पर उनका साथ देते हैं। परिवार भी उन्हें हिम्मत देता है और भरोसा दिलाता है कि वह काम और बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बना सकती हैं। दिव्यांका के मुताबिक, कई बार किसी काम को शुरू करने से पहले हम उसके सही समय का इंतजार करते रहते हैं। लेकिन लगातार इंतजार करने से शुरुआत करना भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे में परिवार का साथ और प्रोत्साहन उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता है।
मेंटल हेल्थ के लिए भी जरूरी है काम करना
दिव्यांका ने यह भी बताया कि काम करना उनकी मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा है। बच्चों की देखभाल के साथ अपने काम से जुड़े रहना उन्हें मानसिक रूप से बेहतर महसूस कराता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर महिला के लिए काम पर जल्दी लौटना जरूरी है। हर किसी की जरूरतें और परिस्थितियां अलग होती हैं। दिव्यांका की यह बात उन महिलाओं के लिए खास है, जो मां बनने के बाद परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। उनका अनुभव बताता है कि मां बनने के बाद जिंदगी में कई बदलाव आते हैं और इस दौरान खुद को समय देना भी उतना ही जरूरी है, जितना बच्चों और परिवार का ध्यान रखना।
दिव्यांका त्रिपाठी की बातों से यही संदेश मिलता है कि मां बनने के बाद काम पर लौटना किसी प्रतियोगिता की तरह नहीं है। हर महिला को अपनी गति से आगे बढ़ने और अपनी जरूरतों को समझने का पूरा हक है।

