क्या नाक के रास्ते निकाला जा सकता है ब्रेन ट्यूमर? जानिए किन ट्यूमर में अपनाई जाती है यह सर्जरी
punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 10:26 AM (IST)
नारी डेस्क: ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में जटिल सर्जरी और लंबे इलाज की तस्वीर बनने लगती है। आम धारणा यही है कि दिमाग में मौजूद किसी भी ट्यूमर को निकालने के लिए सिर की हड्डी खोलकर ऑपरेशन करना पड़ता है। लेकिन मेडिकल साइंस में ऐसी तकनीकें भी मौजूद हैं, जिनमें कुछ खास ट्यूमर तक नाक के रास्ते पहुंचकर सर्जरी की जाती है। इसे एंडोस्कोपिक एंडोनैसल सर्जरी या कई मामलों में ट्रांसस्फेनॉइडल सर्जरी कहा जाता है। इसमें डॉक्टर नाक के रास्ते एक छोटे कैमरे यानी एंडोस्कोप की मदद से खोपड़ी के आधार तक पहुंचते हैं और उपयुक्त स्थिति में ट्यूमर को हटाते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ब्रेन ट्यूमर को नाक के रास्ते निकाला जा सकता है। सर्जरी का फैसला ट्यूमर की जगह, आकार, आसपास की नसों और रक्त वाहिकाओं से उसकी दूरी जैसी कई बातों को देखकर किया जाता है।
नाक के रास्ते ब्रेन तक कैसे पहुंचते हैं
इस सर्जरी में डॉक्टर नाक के अंदर से एक पतला एंडोस्कोप डालते हैं। यह रास्ता नाक के पीछे मौजूद स्फेनॉइड साइनस तक जाता है। इसी प्राकृतिक मार्ग का इस्तेमाल करते हुए सर्जन खोपड़ी के आधार के उन हिस्सों तक पहुंच बनाते हैं, जहां कुछ विशेष प्रकार के ट्यूमर मौजूद होते हैं। कैमरे की मदद से सर्जन अंदर के हिस्से को स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। इसके बाद विशेष सर्जिकल उपकरणों की मदद से ट्यूमर को हटाने की कोशिश की जाती है। इस तकनीक में सिर के ऊपर बड़ा चीरा लगाने की जरूरत कई मामलों में नहीं पड़ती, लेकिन यह एक जटिल न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया है और इसे विशेषज्ञ टीम द्वारा ही किया जाता है।

सबसे ज्यादा किस ब्रेन ट्यूमर में होती है यह सर्जरी
नाक के रास्ते की एंडोस्कोपिक सर्जरी का सबसे जाना-पहचाना इस्तेमाल पिट्यूटरी एडेनोमा जैसे ट्यूमर के इलाज में होता है। पिट्यूटरी ग्रंथि दिमाग के आधार के पास स्थित होती है और नाक के पीछे से स्फेनॉइड साइनस के रास्ते इसके क्षेत्र तक पहुंच बनाई जा सकती है। इसी वजह से उपयुक्त मरीजों में पिट्यूटरी ट्यूमर को निकालने के लिए ट्रांसस्फेनॉइडल या एंडोस्कोपिक एंडोनैसल तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, हर पिट्यूटरी ट्यूमर के लिए भी एक ही सर्जिकल तरीका जरूरी नहीं होता। ट्यूमर की स्थिति और उसके आसपास के महत्वपूर्ण हिस्सों से संबंध को देखकर उपचार की योजना बनाई जाती है।
क्या दूसरे स्कल-बेस ट्यूमर भी नाक से निकाले जा सकते हैं
कुछ अन्य स्कल-बेस ट्यूमर, यानी खोपड़ी के आधार पर विकसित होने वाले ट्यूमर में भी एंडोस्कोपिक एंडोनैसल तकनीक का इस्तेमाल संभव है। खासतौर पर ऐसे मामलों में यह तरीका उपयोगी हो सकता है, जहां ट्यूमर का स्थान नाक और साइनस के रास्ते से सुरक्षित तरीके से पहुंचने योग्य हो। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर स्कल-बेस ट्यूमर को नाक के रास्ते निकालना संभव या सुरक्षित नहीं होता। ट्यूमर अगर महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं, नसों या दिमाग के दूसरे संवेदनशील हिस्सों से जुड़ा हुआ है, तो डॉक्टर को कोई दूसरा सर्जिकल तरीका चुनना पड़ सकता है। कई बार एंडोस्कोपिक और पारंपरिक सर्जरी के तरीकों को मिलाकर भी उपचार किया जाता है।
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कैसे तय होता है कि ट्यूमर नाक से निकलेगा या नहीं
सर्जरी का रास्ता केवल ट्यूमर के 'ब्रेन में होने' से तय नहीं होता। डॉक्टर सबसे पहले यह देखते हैं कि ट्यूमर वास्तव में कहां मौजूद है और आसपास की संरचनाओं के साथ उसका संबंध कैसा है। इसके लिए आमतौर पर एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन जांचों से ट्यूमर का आकार, उसकी सटीक स्थिति और आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं के बारे में जानकारी मिलती है। इसके आधार पर न्यूरोसर्जन और अन्य विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि नाक के रास्ते सर्जरी करना सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हो सकता है या नहीं।
ब्रेन ट्यूमर के कौन से लक्षण दिख सकते हैं
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। यह इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर दिमाग के किस हिस्से में है, उसका आकार कितना है और वह आसपास के ऊतकों पर कितना दबाव डाल रहा है। लगातार बढ़ता या पहले से अलग तरह का सिरदर्द एक संकेत हो सकता है। इसके साथ बार-बार उल्टी, नजर धुंधली या दोहरी दिखाई देना, बोलने में परेशानी, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन, चलने और संतुलन बनाने में दिक्कत जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में दौरे पड़ना या बेहोशी जैसी समस्या भी हो सकती है। अचानक बहुत तेज सिरदर्द, तेजी से बढ़ती कमजोरी, बोलने में गंभीर परेशानी या दौरा पड़ने जैसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है। हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर ही है। कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

क्या नाक से सर्जरी होने का मतलब है कि ऑपरेशन आसान है
नाक के रास्ते सर्जरी होने का मतलब यह नहीं है कि यह कोई सामान्य या आसान ऑपरेशन है। खोपड़ी के आधार और पिट्यूटरी ग्रंथि के आसपास कई बेहद महत्वपूर्ण नसें, रक्त वाहिकाएं और अन्य संवेदनशील संरचनाएं मौजूद होती हैं। इसलिए इस तरह की सर्जरी में विशेषज्ञता और सावधानी बेहद जरूरी होती है। कुछ मरीजों के लिए यह तकनीक सिर के ऊपर से की जाने वाली सर्जरी की तुलना में कम आक्रामक विकल्प हो सकती है, लेकिन इसका चुनाव हमेशा मरीज की मेडिकल स्थिति और ट्यूमर की विशेषताओं के आधार पर किया जाता है।
हर ब्रेन ट्यूमर के लिए नहीं है नाक वाला रास्ता
सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि नाक के रास्ते ब्रेन ट्यूमर निकालने की तकनीक सभी ब्रेन ट्यूमर के लिए नहीं है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से उन ट्यूमर में किया जाता है, जिन तक इस रास्ते से सुरक्षित और प्रभावी ढंग से पहुंच बनाई जा सकती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति की रिपोर्ट में ब्रेन या स्कल-बेस ट्यूमर का पता चलता है, तो केवल ट्यूमर का नाम देखकर सर्जरी का तरीका तय नहीं किया जा सकता। एमआरआई, सीटी स्कैन और मरीज की पूरी मेडिकल स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद न्यूरोसर्जन यह तय करते हैं कि एंडोस्कोपिक एंडोनैसल सर्जरी उपयुक्त है या किसी अन्य तरीके की जरूरत है।

