कैंसर इलाज में नई उम्मीद, ट्यूमर तक सीधे दवा पहुंचाएगी माइक्रोजेल तकनीक
punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 11:54 AM (IST)
नारी डेस्क : रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने माइक्रोजेल कणों पर किया अहम प्रयोग। तापमान में बदलाव से इन कणों के व्यवहार को नियंत्रित करने की कोशिश, भविष्य में ट्यूमर तक दवा पहुंचाने वाली तकनीक में मिल सकती है मदद। कैंसर के इलाज में दवा को पूरे शरीर में फैलाने के बजाय सीधे उस हिस्से तक पहुंचाना, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, इलाज को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। इसी दिशा में रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट (RRI) के भारतीय वैज्ञानिकों ने माइक्रोजेल कणों को लेकर एक अहम प्रयोग किया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि तापमान में बदलाव करके कुछ समय के लिए जमे हुए माइक्रोजेल कणों को दोबारा तरल जैसा व्यवहार करने की स्थिति में लाया जा सकता है। इससे भविष्य में इन कणों की गति और व्यवहार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह अभी शुरुआती स्तर का वैज्ञानिक शोध है। इसे कैंसर का तैयार इलाज नहीं माना जा सकता। शोध में वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि कणों की गति को पूरी तरह नियंत्रित करना आसान नहीं था।
क्या है माइक्रोजेल का पूरा मामला?
इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने बेहद छोटे कणों का इस्तेमाल किया, जिन्हें माइक्रोजेल कहा जाता है। इनकी खासियत यह है कि ये अपने वजन से कई गुना अधिक पानी सोख सकते हैं। वैज्ञानिकों ने माइक्रोजेल कणों को पानी में मिलाकर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार किया। कणों की संख्या इतनी अधिक रखी गई कि वे एक-दूसरे में फंस गए और आसानी से अपनी जगह नहीं बदल पा रहे थे। वैज्ञानिक भाषा में इस स्थिति को 'जाम्ड सिस्टम' कहा जाता है। इसके बाद तापमान में बदलाव करके इन कणों के व्यवहार को बदलने की कोशिश की गई। कुछ परिस्थितियों में कणों का समूह जमे हुए सिस्टम की तरह व्यवहार करने के बजाय तरल जैसा व्यवहार करने लगा।

दवा पहुंचाने में कैसे आ सकती है काम?
माइक्रोजेल का इस्तेमाल दवा पहुंचाने वाली तकनीकों में पहले से किया जाता रहा है। ये कण अपने अंदर दवा को समाहित कर सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में उसे रिलीज करने में मदद कर सकते हैं। इस अध्ययन में इस्तेमाल किए गए माइक्रोजेल करीब 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान बढ़ने पर सिकुड़ने लगते हैं। तापमान के साथ होने वाले इस बदलाव का इस्तेमाल भविष्य में यह नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है कि दवा कब और किस परिस्थिति में रिलीज हो। यही वजह है कि वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आगे चलकर माइक्रोजेल आधारित तकनीक को ट्यूमर जैसे लक्षित हिस्सों तक दवा पहुंचाने के लिए विकसित किया जा सकता है।

अभी लंबा है इलाज तक का रास्ता
यह शोध कैंसर के मरीजों के लिए सीधे तौर पर उपलब्ध इलाज नहीं है। अभी यह समझना जरूरी है कि प्रयोगशाला में मिले नतीजों को वास्तविक शरीर में इस्तेमाल करने के लिए कई और चरणों की जरूरत होगी। वैज्ञानिकों को यह भी पता लगाना होगा कि इन कणों को शरीर के अंदर सुरक्षित तरीके से लक्षित हिस्से तक कैसे पहुंचाया जाए और दवा को सही समय पर नियंत्रित तरीके से कैसे रिलीज किया जाए। इसलिए फिलहाल इसे भविष्य की लक्षित दवा पहुंचाने वाली तकनीक की दिशा में एक शुरुआती वैज्ञानिक कदम माना जा सकता है।

