कीमो में बाल झड़ने का दर्द Pankaj Bhadouria ने किया बयां, कहा- महिलाओं में होते है ये बदलाव

punjabkesari.in Sunday, Aug 16, 2026 - 04:10 PM (IST)

नारी डेस्क : कैंसर का इलाज सिर्फ शरीर पर ही असर नहीं डालता, बल्कि मरीज की भावनाओं और आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकता है। हाल ही में MasterChef India की पहली सीजन की विजेता पंकज भदौरिया ने कीमोथेरेपी के दौरान बाल झड़ने का अपना दर्द सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने कंघी में आए बालों का गुच्छा दिखाते हुए बताया कि यह पल उनके लिए बेहद भावुक कर देने वाला था। दरअसल, कीमोथेरेपी के दौरान बाल झड़ना एक आम साइड इफेक्ट हो सकता है, लेकिन इसका असर हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। कई महिलाओं के लिए बाल सिर्फ खूबसूरती का हिस्सा नहीं होते, बल्कि उनकी पहचान, आत्मविश्वास और खुद को देखने के तरीके से भी जुड़े होते हैं। इसलिए बालों का अचानक झड़ना भावनात्मक रूप से काफी मुश्किल अनुभव बन सकता है।

कीमोथेरेपी से क्यों झड़ने लगते हैं बाल?

कीमोथेरेपी की कुछ दवाएं तेजी से बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने का काम करती हैं। लेकिन शरीर में कुछ स्वस्थ कोशिकाएं भी तेजी से बढ़ती हैं, जिनमें बालों के फॉलिकल्स की कोशिकाएं शामिल हैं। इसी वजह से कुछ कीमोथेरेपी दवाओं के दौरान बाल पतले होने या झड़ने लगते हैं। बालों का असर सिर्फ सिर तक सीमित नहीं रहता। कुछ मरीजों में भौंहों, पलकों और शरीर के अन्य हिस्सों के बाल भी कम या पूरी तरह झड़ सकते हैं। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सी दवा, कितनी डोज और किस तरह का उपचार दिया जा रहा है।

PunjabKesari

आईने में खुद को बदलता देखना क्यों मुश्किल होता है?

कैंसर के इलाज के दौरान मरीज पहले से ही कई शारीरिक बदलावों से गुजर रहा होता है। सर्जरी के निशान, वजन में बदलाव, त्वचा में परिवर्तन और बालों का झड़ना उसके पुराने रूप को बदल सकते हैं। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, कैंसर और उसका इलाज व्यक्ति की self-image यानी खुद के बारे में उसकी मानसिक छवि को प्रभावित कर सकता है। शरीर में आए बदलावों को लेकर दुख, गुस्सा, शर्मिंदगी या असहजता महसूस करना असामान्य नहीं है। यही वजह है कि जब कोई महिला आईने में खुद को पहले से बिल्कुल अलग देखती है, तो उसके लिए उस बदलाव को स्वीकार करना आसान नहीं होता।

यें भी पढ़ें : कैंसर का दुश्मन है ये फल! सिर्फ दो महीने मिलता है, जानिए इसके गजब के फायदे

महिलाओं के लिए बालों का झड़ना इतना बड़ा भावनात्मक झटका क्यों?

बाल चेहरे को एक अलग पहचान देते हैं। कई महिलाओं के लिए लंबे समय से हेयरस्टाइल, बालों की लंबाई और उनका लुक उनकी पर्सनैलिटी का हिस्सा रहा होता है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, कैंसर के इलाज के दौरान बाल झड़ना सबसे ज्यादा दिखाई देने वाले और परेशान करने वाले साइड इफेक्ट्स में से एक हो सकता है। कुछ लोगों के लिए बाल उनकी पहचान, रिश्तों और संस्कृति से जुड़े होते हैं। कीमोथेरेपी से होने वाला हेयर लॉस बॉडी इमेज, भावनात्मक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है। इसलिए बालों को लेकर दुखी होना किसी भी तरह से 'छोटी बात' या 'सिर्फ खूबसूरती की चिंता' नहीं है।

कैंसर के दौरान कंट्रोल खोने का एहसास भी बढ़ सकता है

कैंसर के इलाज में मरीज को कई ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है जिन्हें वह खुद नियंत्रित नहीं कर सकता। डॉक्टर की अपॉइंटमेंट, टेस्ट, सर्जरी, कीमोथेरेपी और दवाओं का पूरा शेड्यूल उसकी रोजमर्रा की जिंदगी बदल देता है। ऐसे में बालों का झड़ना उस बदलाव का एक ऐसा हिस्सा है जिसे हर बार आईने में देखा जा सकता है। इसलिए कुछ मरीजों को ऐसा महसूस हो सकता है कि उनके शरीर और उनकी पहचान पर उनका नियंत्रण कम हो रहा है।

PunjabKesari

शर्म, गुस्सा और उदासी महसूस होना सामान्य है

बाल झड़ने के बाद कुछ मरीजों को लोगों के सामने जाने में झिझक हो सकती है। उन्हें अपने लुक को लेकर असहजता, शर्मिंदगी, गुस्सा या उदासी महसूस हो सकती है। NCI के अनुसार, कैंसर और उसके इलाज से शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर anger और grief यानी गुस्सा और दुख महसूस करना स्वाभाविक है। इसलिए परिवार और करीबी लोगों के लिए जरूरी है कि वे मरीज की भावनाओं को 'बाल तो वापस आ जाएंगे' कहकर नजरअंदाज न करें। पहले उसकी परेशानी को समझना और सुनना ज्यादा जरूरी है। बता दें की कैंसर के इलाज से शरीर में होने वाले बदलावों का असर रिश्तों और आत्मविश्वास पर भी पड़ सकता है। बाल झड़ने के अलावा सर्जरी के निशान, वजन में बदलाव या शरीर के दूसरे हिस्सों में हुए बदलाव भी व्यक्ति को अपने आकर्षण और पहचान को लेकर असुरक्षित महसूस करा सकते हैं। NCI के अनुसार, शरीर की छवि को लेकर चिंता कभी-कभी intimacy और sexual confidence को भी प्रभावित कर सकती है।

क्या कीमो के बाद बाल दोबारा आते हैं?

अधिकतर मामलों में कीमोथेरेपी से होने वाला हेयर लॉस अस्थायी होता है। NCI के मुताबिक, कीमोथेरेपी खत्म होने के बाद कई लोगों में लगभग 2 से 3 महीने में बाल दोबारा उगना शुरू हो सकते हैं। शुरुआत में बालों की बनावट या रंग पहले से अलग भी हो सकता है। हालांकि हर मरीज का अनुभव अलग होता है और कुछ उपचारों में लंबे समय तक या स्थायी बाल झड़ने का जोखिम भी हो सकता है। इसलिए अपने डॉक्टर से यह पूछना बेहतर है कि इस्तेमाल की जा रही विशेष दवा से बालों पर क्या असर पड़ने की संभावना है।

यें भी पढ़ें : सिर्फ 1-2 दिन में ही Periods हो जाते खत्म तो Expert ने बताया इसे सबसे खराब

इस मुश्किल दौर में मरीज की कैसे मदद करें?

परिवार और दोस्तों का भावनात्मक सहयोग इस समय काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
मरीज की भावनाओं को नजरअंदाज न करें।
'बाल तो वापस आ जाएंगे' कहकर उसकी परेशानी को छोटा न समझें।
अगर वह बात करना चाहती है तो उसकी बात ध्यान से सुनें।
विग, स्कार्फ, कैप या अन्य विकल्प चुनने में उसकी पसंद का सम्मान करें।
जरूरत महसूस होने पर कैंसर काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
बालों और स्कैल्प की देखभाल के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
NCI भी बाल झड़ने से जुड़ी भावनाओं को किसी भरोसेमंद व्यक्ति, परिवार या सपोर्ट ग्रुप के साथ साझा करने की सलाह देता है।

PunjabKesari

बालों का झड़ना सिर्फ एक साइड इफेक्ट नहीं

कीमोथेरेपी के दौरान बालों का झड़ना शरीर में होने वाला एक बदलाव जरूर है, लेकिन मरीज के लिए इसका मतलब इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। यह उसकी पहचान, आत्मविश्वास और अपने शरीर को देखने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। इसलिए कैंसर के इलाज के दौरान मरीज की शारीरिक सेहत के साथ उसकी भावनात्मक सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। पंकज भदौरिया का अनुभव भी यही याद दिलाता है कि कैंसर की लड़ाई सिर्फ दवाओं और टेस्ट तक सीमित नहीं होती। इसके साथ कई भावनात्मक चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Monika

Related News

static