हर समय थकान क्यों रहती है? नींद पूरी होने के बाद भी शरीर दे रहा है ये संकेत, न करें नजरअंदाज
punjabkesari.in Sunday, Oct 25, 2026 - 05:14 PM (IST)
नारी डेस्क: कई बार रात में 7 से 8 घंटे की नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही शरीर भारी लगता है। दिनभर सुस्ती बनी रहती है, किसी काम में मन नहीं लगता और थोड़ी-सी मेहनत करने पर भी थकान महसूस होने लगती है। अक्सर लोग इसे काम का दबाव या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर आराम करने के बाद भी शरीर में ताजगी नहीं लौट रही, तो इसकी वजह खानपान में कमी, तनाव या सेहत से जुड़ी कोई परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर शरीर की ऊर्जा कम क्यों महसूस हो रही है और किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।
खानपान में गड़बड़ी भी हो सकती है वजह
आजकल की व्यस्त दिनचर्या में कई लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं या लंबे समय तक कुछ नहीं खाते। कुछ लोग भूख लगने पर भी चाय-बिस्कुट या हल्के स्नैक्स से काम चला लेते हैं। ऐसी आदतों के कारण शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। शरीर को ठीक से काम करने के लिए प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी12 और दूसरे पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इनकी कमी होने पर रोजमर्रा के काम भी मुश्किल लग सकते हैं। अपने खाने में दालें, चना, राजमा, दूध-दही, अंडे (यदि खाते हैं), हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें। समय पर भोजन करें और कोशिश करें कि हर दिन संतुलित आहार लें। केवल पेट भरना ही काफी नहीं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण देना भी जरूरी है।

शरीर में पानी की कमी तो नहीं
कई बार दिनभर काम में व्यस्त रहने के कारण लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, मुंह सूखना, चक्कर आना और पेशाब का रंग गहरा होना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। गर्म मौसम में, व्यायाम के दौरान या ज्यादा पसीना आने पर शरीर को अधिक तरल पदार्थों की जरूरत हो सकती है। दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी पीने की आदत डालें। हालांकि, जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सही नहीं है। अगर डॉक्टर ने किसी बीमारी के कारण पानी की मात्रा सीमित रखने की सलाह दी है, तो उसी का पालन करें।
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तनाव और चिंता भी छीन सकते हैं ऊर्जा
अगर दिमाग लगातार काम, परिवार, पैसों या दूसरी परेशानियों के बारे में सोचता रहता है, तो शरीर को आराम मिलने के बावजूद ताजगी महसूस नहीं होती। लंबे समय तक तनाव में रहने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसका असर एकाग्रता, काम करने की क्षमता और मूड पर भी पड़ सकता है। कई बार व्यक्ति रात में सो तो जाता है, लेकिन सुबह उठने पर भी थका हुआ महसूस करता है। इसकी एक वजह मानसिक दबाव भी हो सकता है।
दिनभर काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लें। थोड़ी देर टहलें, हल्की एक्सरसाइज करें और अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालें। सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना भी मददगार हो सकता है। अगर चिंता लगातार बनी रहती है या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करने में संकोच न करें।
आयरन की कमी या एनीमिया हो सकता है कारण
अगर पर्याप्त नींद लेने और ठीक से खाना खाने के बाद भी लगातार कमजोरी बनी रहती है, तो शरीर में आयरन की कमी इसकी एक वजह हो सकती है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है, जिसमें शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में थकान और कमजोरी के साथ चक्कर आना, त्वचा का पीला पड़ना, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज महसूस होना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। महिलाओं में ज्यादा रक्तस्राव वाली माहवारी, गर्भावस्था या भोजन से पर्याप्त आयरन न मिलना इसके संभावित कारण हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में थकान का मतलब एनीमिया होना नहीं है। अगर थकान लंबे समय से बनी हुई है, तो डॉक्टर की सलाह से खून की जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आयरन की कमी की पुष्टि करने के लिए जांच करा सकते हैं। बिना सलाह के आयरन की गोलियां लेना शुरू न करें।

विटामिन बी12 की कमी को भी न करें नजरअंदाज
विटामिन बी12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर थकान, कमजोरी और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों को हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन भी महसूस हो सकता है। जो लोग पशु-आधारित खाद्य पदार्थ नहीं खाते, उनमें विटामिन बी12 की कमी का जोखिम अधिक हो सकता है। हालांकि, इसकी कमी दूसरे कारणों से भी हो सकती है, जैसे शरीर में विटामिन को ठीक से अवशोषित न कर पाना। लगातार थकान या हाथ-पैरों में झनझनाहट जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत के अनुसार विटामिन बी12 की जांच कराई जा सकती है। बिना जांच और चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट लेना सही नहीं है।
थायरॉइड की समस्या भी दे सकती है संकेत
थायरॉइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब यह ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती, तो हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या हो सकती है। इसमें व्यक्ति को लगातार थकान, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, त्वचा में रूखापन और वजन बढ़ने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि, ये लक्षण दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं। इसलिए केवल थकान या वजन बढ़ने के आधार पर थायरॉइड की बीमारी मान लेना सही नहीं है।
अगर थकान के साथ ऐसे दूसरे लक्षण भी लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार थायरॉइड की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
डायबिटीज और नींद से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं वजह
लगातार थकान कभी-कभी डायबिटीज जैसी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। अगर थकान के साथ बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना या बिना कोशिश के वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा, कुछ लोगों को सोते समय सांस लेने में रुकावट आती है। इसे स्लीप एपनिया कहा जाता है। इस समस्या में रातभर नींद आने के बावजूद शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। तेज खर्राटे, नींद के दौरान सांस रुकने की शिकायत और सुबह उठने पर सिरदर्द इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। ऐसे लोग दिन में भी सुस्ती महसूस कर सकते हैं। कुछ संक्रमण, दवाओं के दुष्प्रभाव और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी लगातार थकान का कारण बन सकती हैं। इसलिए अगर थकान लंबे समय से बनी हुई है, तो इसकी असली वजह पता लगाना जरूरी है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
कभी-कभार थकान होना सामान्य है, खासकर जब काम ज्यादा हो या नींद पूरी न हुई हो। लेकिन अगर पर्याप्त आराम के बावजूद कई हफ्तों तक थकान बनी रहती है, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं या इसके साथ दूसरे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। सीने में दर्द, गंभीर सांस की परेशानी या बेहोशी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

