धीरे-धीरे आंखों की रोशनी छीन सकती है यह बीमारी, समय रहते पहचानें Glaucoma के संकेत
punjabkesari.in Friday, Oct 23, 2026 - 03:43 PM (IST)
नारी डेस्क : आंखें हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। इनकी मदद से हम अपने आसपास की दुनिया को देख पाते हैं, लेकिन आंखों से जुड़ी कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं, जो धीरे-धीरे देखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इनमें ग्लूकोमा (Glaucoma) भी शामिल है। इसे कई बार ‘Silent Thief of Sight’ यानी रोशनी चुराने वाली बीमारी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण नजर नहीं आते। कई लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक उनकी नजर पर असर पड़ना शुरू नहीं हो जाता। National Eye Institute (NEI) के अनुसार, समय पर आंखों की जांच और इलाज से ग्लूकोमा के कारण होने वाले नुकसान को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं क्या है ग्लूकोमा, इसके लक्षण क्या हैं और किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा रहता है।
क्या है ग्लूकोमा (Glaucoma)?
National Eye Institute के अनुसार, ग्लूकोमा आंखों से जुड़ी बीमारियों का एक समूह है, जो ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) को नुकसान पहुंचा सकता है। ऑप्टिक नर्व आंखों से मिलने वाली दृश्य जानकारी को दिमाग तक पहुंचाने का काम करती है। जब इस नर्व को नुकसान पहुंचता है, तो व्यक्ति की देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ग्लूकोमा के कई प्रकारों में आंख के अंदर दबाव बढ़ना एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। ऐसा तब हो सकता है, जब आंख के अंदर मौजूद तरल पदार्थ ठीक से बाहर नहीं निकल पाता। हालांकि, कुछ लोगों में आंखों का दबाव सामान्य होने के बावजूद भी ग्लूकोमा हो सकता है। इसलिए सिर्फ आंखों का दबाव मापना इस बीमारी का पता लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

ग्लूकोमा की शुरुआत में क्यों नहीं दिखते लक्षण?
ग्लूकोमा की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इसके शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति को सामान्य रूप से देखने में परेशानी महसूस नहीं होती, जबकि आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, देखने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित हो सकती है। शुरुआत में आंखों के किनारों यानी साइड विजन (Peripheral Vision) से दिखाई देने वाली चीजों को देखने में परेशानी हो सकती है। आगे चलकर नजर में खाली हिस्से या ब्लाइंड स्पॉट दिखाई दे सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर स्थिति में स्थायी रूप से रोशनी भी जा सकती है।
ग्लूकोमा कितने प्रकार का होता है?
ओपन-एंगल ग्लूकोमा (Open-Angle Glaucoma)
यह ग्लूकोमा का एक प्रमुख प्रकार है। इसमें आंख के अंदर मौजूद तरल पदार्थ की निकासी धीरे-धीरे प्रभावित होती है। इसके कारण ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है। इस बीमारी में शुरुआती दौर में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए नियमित आंखों की जांच जरूरी है।
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एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा (Angle-Closure Glaucoma)
इस प्रकार में आंख के अंदर तरल पदार्थ के बाहर निकलने का रास्ता अचानक या तेजी से बंद हो सकता है। इससे आंखों का दबाव तेजी से बढ़ सकता है। यदि अचानक तेज आंख दर्द, आंख लाल होना, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द या जी मिचलाने जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। यह स्थिति आंखों की रोशनी के लिए खतरनाक हो सकती है।
नॉर्मल-टेंशन ग्लूकोमा (Normal-Tension Glaucoma)
इस प्रकार में आंखों का दबाव सामान्य सीमा में रहने के बावजूद ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि केवल आंखों के दबाव की जांच से ग्लूकोमा के सभी मामलों का पता नहीं लगाया जा सकता।

कंजेनिटल ग्लूकोमा (Congenital Glaucoma)
यह ग्लूकोमा का दुर्लभ प्रकार है, जो जन्म के समय या बचपन में दिखाई दे सकता है। इसमें आंख के अंदर तरल पदार्थ की निकासी सामान्य रूप से नहीं हो पाती। बच्चे की आंखों में असामान्य पानी आना, रोशनी से परेशानी या आंख का आकार बड़ा दिखाई देना जैसे संकेत हों, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए।
सेकेंडरी ग्लूकोमा (Secondary Glaucoma)
जब किसी दूसरी बीमारी, आंख में चोट, सर्जरी या कुछ दवाओं के कारण ग्लूकोमा विकसित होता है, तो उसे सेकेंडरी ग्लूकोमा कहा जाता है। इसके कुछ प्रकारों में डायबिटीज से जुड़ी आंखों की समस्याओं, आंखों में सूजन या अन्य स्थितियों की भूमिका हो सकती है।
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ग्लूकोमा के लक्षण क्या हैं?
ग्लूकोमा के लक्षण इसके प्रकार और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करते हैं। शुरुआती दौर में लक्षण नहीं दिखना आम बात है। हालांकि, बीमारी बढ़ने पर ये बदलाव महसूस हो सकते हैं
साइड विजन कमजोर होना: आंखों के किनारों से दिखाई देने वाली चीजों को देखने में परेशानी हो सकती है।
नजर में खाली हिस्से दिखना: देखने के क्षेत्र में कुछ जगहों पर चीजें दिखाई देना कम हो सकता है
धुंधला दिखाई देना: कुछ प्रकार के ग्लूकोमा में नजर अचानक धुंधली हो सकती है।
तेज आंख दर्द और लालिमा: अचानक तेज दर्द, लाल आंख, धुंधली नजर और जी मिचलाना एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी सहायता जरूरी है।
ध्यान रखें कि हर व्यक्ति में ये सभी लक्षण दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। खासकर ओपन-एंगल ग्लूकोमा लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ सकता है।

किन लोगों को ग्लूकोमा का खतरा ज्यादा रहता है?
ग्लूकोमा किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है। इनमें शामिल हैं
60 साल से अधिक उम्र के लोग: बढ़ती उम्र के साथ ग्लूकोमा का खतरा बढ़ सकता है।
परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास: माता-पिता, भाई-बहन या परिवार के अन्य सदस्यों को यह बीमारी रही हो, तो अपना जोखिम डॉक्टर से समझें।
आंखों का दबाव अधिक होना: आंखों के अंदर दबाव बढ़ना ग्लूकोमा का महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।
डायबिटीज या अन्य आंखों की समस्याएं: कुछ बीमारियां और आंखों से जुड़ी स्थितियां ग्लूकोमा के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।
आंख में चोट या कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल: खासकर स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग डॉक्टर की निगरानी में होना चाहिए।
जो लोग जोखिम वाले समूह में आते हैं, उन्हें नेत्र विशेषज्ञ से पूछना चाहिए कि कितने अंतराल पर आंखों की जांच करवानी चाहिए।
कैसे पता चलता है ग्लूकोमा?
ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए नेत्र विशेषज्ञ आंखों की विस्तृत जांच करते हैं। इसमें पुतलियों को फैलाकर आंख के अंदरूनी हिस्सों और ऑप्टिक नर्व की जांच की जा सकती है। जरूरत के अनुसार आंखों का दबाव मापने और विजुअल फील्ड टेस्ट के जरिए यह भी देखा जाता है कि देखने की क्षमता के किन हिस्सों पर असर पड़ा है। सिर्फ चश्मे का नंबर जांचना या आंखों का दबाव मापना ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। नियमित और व्यापक आंखों की जांच से बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में होने की संभावना बढ़ती है।
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क्या ग्लूकोमा का इलाज संभव है?
ग्लूकोमा से ऑप्टिक नर्व को हो चुका नुकसान आमतौर पर वापस ठीक नहीं किया जा सकता। हालांकि, समय पर इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोकने या उसकी रफ्तार कम करने में मदद मिल सकती है। इलाज का तरीका बीमारी के प्रकार और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।
ग्लूकोमा के प्रमुख उपचार
आई ड्रॉप्स और दवाएं: आंखों का दबाव कम करने और ऑप्टिक नर्व को आगे होने वाले नुकसान से बचाने के लिए डॉक्टर दवाएं दे सकते हैं।
लेजर ट्रीटमेंट: कुछ मामलों में आंख के अंदर तरल पदार्थ की निकासी बेहतर बनाने या दबाव कम करने के लिए लेजर उपचार किया जाता है।
सर्जरी: यदि दवाओं या लेजर से पर्याप्त नियंत्रण नहीं होता, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित इस्तेमाल और फॉलो-अप जांच बेहद जरूरी है। अपनी मर्जी से आई ड्रॉप्स बंद न करें और न ही किसी दूसरे व्यक्ति की दवा इस्तेमाल करें।
आंखों की रोशनी बचाने के लिए क्या करें?
ग्लूकोमा को हमेशा रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन नियमित जांच से इसका जल्दी पता लगाने और समय पर इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है। अगर परिवार में किसी को ग्लूकोमा रहा है, उम्र अधिक है या आंखों से जुड़ी कोई समस्या है, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच का सही अंतराल पूछें।
नोट: अगर अचानक तेज आंख दर्द, आंख लाल होना, धुंधली नजर और जी मिचलाने जैसे लक्षण हों, तो इंतजार न करें और तुरंत इमरजेंसी में जाएं। ग्लूकोमा में समय पर जांच और इलाज आंखों की बची हुई रोशनी को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

