हफ्ते में 3 बार से कम जा रहे हैं टॉयलेट? शरीर में दिख रहे इन संकेतों को न करें इग्नोर

punjabkesari.in Sunday, Nov 01, 2026 - 12:18 PM (IST)

 नारी डेस्क: आजकल बहुत से लोग कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं। किसी का पेट कई दिनों तक ठीक से साफ नहीं होता, तो किसी को मल त्याग करते समय काफी जोर लगाना पड़ता है। अक्सर लोग इसके पीछे पानी कम पीने को ही सबसे बड़ी वजह मानते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि शरीर में पानी की कमी कब्ज की समस्या बढ़ा सकती है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसी आदतें और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं, जो इसका कारण बन सकती हैं। यहां तक कि कुछ गंभीर बीमारियों में भी कब्ज एक लक्षण के रूप में दिखाई दे सकती है। इसलिए अगर आपको बार-बार यह समस्या हो रही है, तो इसे केवल खानपान की गड़बड़ी समझकर नजरअंदाज न करें।

क्या होती है कब्ज की समस्या

NIDDK (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज) के अनुसार, कब्ज की स्थिति तब बनती है जब मल बड़ी आंत से बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। इस दौरान बड़ी आंत मल से ज्यादा पानी सोख लेती है, जिससे मल सूखा और सख्त हो जाता है। इसी वजह से मल त्याग करना मुश्किल हो सकता है। कब्ज होने पर व्यक्ति को सामान्य से कम बार मल त्याग होता है और कई बार पेट साफ न होने का एहसास भी बना रहता है। इसके कुछ आम लक्षण हैं: हफ्ते में तीन बार से कम मल त्याग होना। मल का सख्त, सूखा या गांठदार होना। मल त्याग करते समय जोर लगाना या दर्द महसूस होना। शौच के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास होना। अगर ये परेशानियां बार-बार हो रही हैं या लंबे समय तक बनी हुई हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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पानी के अलावा इन कारणों से भी हो सकती है कब्ज

कब्ज के पीछे सिर्फ पानी की कमी जिम्मेदार नहीं होती। हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें और शरीर से जुड़ी समस्याएं भी इस परेशानी को बढ़ा सकती हैं।

खाने में फाइबर की कमी: फाइबर पाचन को बेहतर रखने और मल को नरम बनाने में मदद करता है। अगर आपकी डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें कम हैं, तो कब्ज की परेशानी हो सकती है।

शारीरिक गतिविधि कम करना: जो लोग दिनभर एक ही जगह बैठे रहते हैं और पैदल चलने या व्यायाम के लिए समय नहीं निकालते, उनमें भी कब्ज की समस्या हो सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि आंतों की सामान्य गति बनाए रखने में मदद करती है।

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मल त्याग की इच्छा को रोकना: कई लोग ऑफिस, सफर या किसी दूसरे कारण से शौच जाने की इच्छा को बार-बार टालते रहते हैं। ऐसा करने से भी मल सख्त हो सकता है और कब्ज की परेशानी बढ़ सकती है।

कुछ दवाओं का सेवन: आयरन सप्लीमेंट, कुछ दर्द निवारक दवाएं, एंटासिड और कुछ अन्य दवाओं के कारण कब्ज हो सकती है। अगर किसी दवा के बाद यह समस्या शुरू हुई है, तो डॉक्टर से बात करें। अपनी मर्जी से दवा बंद न करें।

 हार्मोन और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं: हाइपोथायरायडिज्म यानी थायरॉयड हार्मोन की कमी, डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं भी कब्ज का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा सीलिएक डिजीज और पाचन तंत्र की कुछ बीमारियों में भी यह परेशानी हो सकती है।

दिमाग और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं: पार्किंसंस डिजीज जैसी बीमारियां, दिमाग या रीढ़ की हड्डी में चोट और नसों से जुड़ी कुछ परेशानियां आंतों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इससे मल त्याग की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।

क्या कब्ज कैंसर का भी संकेत हो सकती है?

कब्ज की समस्या होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर है। ज्यादातर मामलों में इसके पीछे खानपान, पानी की कमी, कम शारीरिक गतिविधि या दूसरी सामान्य वजहें होती हैं। हालांकि, कुछ कैंसर और उनके इलाज के दौरान कब्ज की परेशानी हो सकती है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) के अनुसार, कोलन कैंसर, रेक्टल कैंसर और ओवेरियन कैंसर जैसी बीमारियों में कब्ज की समस्या दिखाई दे सकती है। कुछ मामलों में ब्रेन ट्यूमर या उससे जुड़े प्रभावों के कारण भी मल त्याग प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा कीमोथेरेपी और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं भी कब्ज पैदा कर सकती हैं। अगर कब्ज के साथ मल में खून आना, बिना कोशिश के वजन कम होना, लगातार पेट दर्द, एनीमिया या मल त्याग की आदतों में अचानक बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। खासकर अगर परिवार में आंतों के कैंसर का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।

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इन आसान तरीकों से कब्ज की परेशानी कम करने में मिल सकती है मदद

अगर कब्ज की वजह रोजमर्रा की आदतें हैं, तो उनमें कुछ बदलाव करके राहत पाने में मदद मिल सकती है। इसके लिए अपने दिनभर के रूटीन में इन बातों को शामिल करें। पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पिएं: दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र, मौसम, गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से तरल पदार्थ लें। गर्म पानी या कोई गर्म पेय कुछ लोगों को मल त्याग में मदद कर सकता है।

रोजाना थोड़ा समय व्यायाम के लिए निकालें: कब्ज से बचने के लिए रोजाना पैदल चलना, साइकिल चलाना या हल्का योग करना फायदेमंद हो सकता है। अगर आप लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, तो बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलें।

भोजन का समय तय रखें: रोजाना लगभग एक ही समय पर खाना खाने की आदत बनाएं। इससे शरीर की पाचन प्रक्रिया और मल त्याग का रूटीन बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। शौच जाने की इच्छा को बार-बार न रोकें।

डाइट में फाइबर बढ़ाएं: अपने भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें, ओट्स और साबुत अनाज शामिल करें। फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं और इसके साथ पर्याप्त पानी भी पिएं। अगर आपको पहले से कोई पाचन संबंधी बीमारी है, तो डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

क्या कैंसर का इलाज संभव है

कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस प्रकार का है, किस अंग में है और किस स्टेज में इसका पता चला है। कई कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता चलने पर इलाज के अच्छे विकल्प उपलब्ध होते हैं। कुछ मामलों में मरीज पूरी तरह ठीक भी हो सकते हैं, जबकि अन्य में बीमारी को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाता है।

इसलिए शरीर में लगातार होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कब्ज लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे, तो डॉक्टर से जांच करवाएं।

ध्यान रखें: कब्ज एक आम समस्या है, लेकिन बार-बार होने वाली परेशानी को सिर्फ पानी की कमी मानकर टालना सही नहीं है। सही खानपान, नियमित व्यायाम और समय पर मेडिकल जांच से इसकी वजह पता लगाने और राहत पाने में मदद मिल सकती है।
  

 


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Content Editor

Priya Yadav

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