Kidney, Liver और फेफड़ों का दुश्मन है सड़कों पर खड़ा पानी, डायबिटिज के मरीज रहें इससे दूर
punjabkesari.in Wednesday, Jul 08, 2026 - 07:42 PM (IST)
नारी डेस्क: पूरे भारत में मॉनसून ज़ोरों पर है और हर दिन मुंबई, दिल्ली, गुरुग्राम और दूसरे बड़े शहरों में पानी से भरी सड़कें देखने को मिल रही है, जिससे ना सिर्फ लोगों को आने- जाने में दिक्कत हो रही है बल्कि यह पानी कई बीमारियों को भी न्यौता देता है। सड़कों पर खड़े इस पानी में सीवर का पानी, कचरा, जानवरों का गोबर, इंडस्ट्रियल केमिकल और दूसरी कई गंदी चीज़ें मिली होती हैं। डॉक्टरों ने इससे होने वाले हेल्थ रिस्क को लेकर अलर्ट किया है।

बारिश के पानी से होती है ये समस्याएं
HT लाइफ़स्टाइल को दिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर ने बताया- थोड़ी देर के लिए भी इन खड़े हुए पानी के संपर्क में आने से कई तरह के इन्फेक्शन और चोट का खतरा हो सकता है, खासकर तब जब संपर्क में आने के बाद जरूरी सावधानी न बरती जाए। हेल्थ से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है स्किन और सॉफ्ट टिश्यू का इन्फेक्शन। डॉक्टर ने चेतावनी दी कि लोगों को अक्सर छोटे-मोटे कट, छाले, फटी एड़ियां या कीड़े के काटने जैसी समस्याएं होती हैं, जिनके बारे में उन्हें पता भी नहीं चलता। जब ये दूषित पानी के संपर्क में आते हैं तो बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे लालिमा, सूजन, दर्द और मवाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इन्फेक्शन फैलने से बढ़ता है खतरा
डॉक्टर कहते हैं- "अगर इनका इलाज न किया जाए, तो ये इन्फेक्शन फैल सकते हैं और गंभीर रूप ले सकते हैं। जिन्हें डायबिटीज है, जिनका ब्लड सर्कुलेशन ठीक नहीं है या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि एक छोटा सा कट भी तेज़ी से गंभीर समस्या बन सकता है। मॉनसून में लेप्टोस्पायरोसिस एक और बड़ी समस्या है। यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन दूषित पानी से फैलता है, जिसमें संक्रमित जानवरों, खासकर चूहों का पेशाब होता है। चूहे शहरी इलाकों में भी पाए जाते हैं, इसलिए भारी बारिश और बाढ़ के बाद इसका खतरा बढ़ जाता है। इसके शुरुआती लक्षण है बुखार, मांसपेशियों में दर्द, तेज़ सिरदर्द, ठंड लगना, उल्टी, आंखें लाल होना। इसके लक्षण अक्सर वायरल बीमारी जैसे ही होते हैं और लोग इन्हें नजरअंदाज़ कर देते हैं। हालांकि, इलाज न कराने पर लेप्टोस्पायरोसिस से किडनी, लिवर, फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है और यह जानलेवा भी हो सकता है।

सड़कों पर भरे पानी से लग सकती है चोट
बाढ़ के पानी के संपर्क में आने से पेट और आंतों में संक्रमण भी हो सकता है। अगर गलती से दूषित पानी पी लिया जाए या वह खाने-पीने की चीज़ों के संपर्क में आ जाए, तो इससे दस्त, उल्टी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए ये समस्याएं और भी गंभीर हो सकती हैं। डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि कि संक्रमण और चोटें भी कुछ ऐसे छिपे हुए खतरे हैं। पानी से भरी सड़कों पर अक्सर पानी गंदला होता है और उसके नीचे टूटे हुए कांच, खुली धातु, कीलें, पत्थर और दूसरी नुकीली चीज़ें छिपी हो सकती हैं। व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और उसे कट लग सकता है या कोई नुकीली चीज़ चुभ सकती है। ऐसी चोटों से न सिर्फ़ बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है, बल्कि टिटनेस से बचाव की ज़रूरत भी पड़ सकती है।
घर आते ही करें ये काम
अगर आप बाढ़ के पानी के संपर्क में आए हैं, तो घर पहुंचते ही साबुन और साफ़ पानी से अच्छी तरह धो लें। अपने पैरों और हाथों पर लगे कट या खरोंच का खास ध्यान रखें। गीले कपड़े, जूते और मोज़े बदलकर साफ़ और सूखे कपड़े पहनें। गीले जूते या मोज़े ज़्यादा देर तक न पहनें, क्योंकि इनसे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है और फंगल इन्फेक्शन हो सकता है। अपने पैरों के तलवों को देखें कि कहीं कोई कट तो नहीं है; अगर छोटा सा भी कट हो, तो उसे अच्छी तरह साफ़ करें और उसका इलाज करें। अगर बुखार, मांसपेशियों में तेज़ दर्द, लगातार उल्टी, दस्त, घाव वाली जगह पर ज़्यादा लाली या सूजन, आंखें पीली पड़ना या पेशाब कम आना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

