"पीरियड्स आना लड़कियों की गलती नहीं ..." स्कूलों में Sanitary Pads को लेकर SC ने दिया बड़ा आदेश

punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 03:49 PM (IST)

नारी डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक आदेश में कहा कि हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा। स्कूल में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि स्कूलों में चालू और स्वच्छ, लिंग के आधार पर अलग-अलग शौचालय हों। कोर्ट ने कक्षा 6-12 तक की किशोर लड़कियों के स्कूलों में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय नीति 'स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति' को पूरे भारत में लागू करने का निर्देश दिया।


लड़कियों की कोई गलती नहीं: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जो जीवन का अधिकार है उसमें मासिक धर्म से जुड़ा स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है।  कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- ‘हम हर उस बच्ची को यह संदेश देना चाहते हैं जो शायद इसलिए स्कूल नहीं जा पाती क्योंकि उसके शरीर को बोझ समझा जाता है, लेकिन इसमें उसकी कोई गलती नहीं है.’ । कोर्ट ने कहा कि हमारे ये शब्द अदालतों और कानूनी समीक्षा रिपोर्टों से परे समाज के हर तबके तक पहुंचने चाहिए। 


एक्स्ट्रा इनरवियर, यूनिफॉर्म रखने के भी निर्देश

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने ये निर्देश दिए कि- सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में हर स्कूल, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट, ASDM-694 मानकों के अनुसार बनाए गए ऑक्सीज़ो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन मुफ्त में उपलब्ध कराएं। ये सैनिटरी नैपकिन लड़कियों को आसानी से मिलने चाहिए।  निर्देश में कहा गया-  सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह पक्का करना होगा कि शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में हर स्कूल, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट, में पीरियड्स हाइजीन मैनेजमेंट कॉर्नर बनाए जाएं। इसमें पीरियड्स की इमरजेंसी से निपटने के लिए एक्स्ट्रा इनरवियर, यूनिफॉर्म, डिस्पोजेबल पैड और दूसरी ज़रूरी चीज़ें होनी चाहिए।


लड़के और लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट के निर्देश

पीठ ने कहा- सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करें कि शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में हर स्कूल, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट में इस्तेमाल करने लायक पानी की सुविधा वाले अलग-अलग जेंडर के लिए टॉयलेट हों। स्कूलों में सभी मौजूदा या नए बने टॉयलेट इस तरह से डिज़ाइन, बनाए और मेंटेन किए जाएं कि प्राइवेसी और एक्सेसिबिलिटी सुनिश्चित हो, जिसमें दिव्यांग बच्चों की ज़रूरतों का भी ध्यान रखा जाए। सभी स्कूल के शौचालयों में काम करने वाली धुलाई की सुविधाएं होनी चाहिए और हर समय साबुन और पानी उपलब्ध होना चाहिए। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static