लापता हो रहे बच्चों को लेकर SC परेशान, राज्यों से कहा- बाल तस्करी पर ध्यान दो नहीं तो हालात बिगड़ जाएंगेे

punjabkesari.in Saturday, Apr 11, 2026 - 12:39 PM (IST)

नारी डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने बाल तस्करी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई है और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं, इसलिए बाल तस्करी को हल्के में न लें। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि अगर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश तत्काल कार्रवाई नहीं करते हैं, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। एक याचिका की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि इस मामले में केवल राज्य सरकार और उसका गृह विभाग ही पूरी सतर्कता से कार्रवाई कर सकता है।

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बाल तस्करी हो रही है बेकाबू

जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा- "कृपया इस मुद्दे को बहुत, बहुत गंभीरता से लें। बाल तस्करी बेकाबू होती जा रही है। पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं। अगर आप सभी इस पर ध्यान नहीं देंगे, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी और इस मामले में केवल राज्य सरकार और उसका गृह विभाग ही पूरी सतर्कता से कार्रवाई कर सकता है"। जस्टिस ने कहा- "एक अदालत के तौर पर हम निगरानी कर सकते हैं, लेकिन आखिरकार कार्रवाई तो राज्य सरकार, पुलिस और अन्य एजेंसियों को ही करनी होगी। इसलिए  यह हमारा विनम्र अनुरोध है।" अदालत ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 15 अप्रैल, 2025 के अपने फैसले में जारी निर्देशों का पालन करने का अंतिम अवसर भी दिया। इस फैसले का उद्देश्य संगठित तस्करी नेटवर्क को खत्म करना था।


लापता बच्चों को लेकर कोर्ट चिंतित

पीठ ने यह चेतावनी भी दी कि यदि अनुपालन रिपोर्ट (compliance reports) दाखिल नहीं की जाती है, तो उन राज्यों को "चूक करने वाले" (defaulting) राज्यों के रूप में माना जाएगा। 15 अप्रैल, 2025 के फैसले में कई संस्थागत सुधारों को अनिवार्य किया गया था, जिसमें तस्करी के मामलों में मुकदमों को छह महीने के भीतर, प्रतिदिन के आधार पर पूरा करना शामिल था। शीर्ष अदालत ने, तस्करी के संवेदनशील हॉटस्पॉट की निगरानी के लिए राज्य-स्तरीय समितियां गठित करने के निर्देश देने के अलावा, अधिकारियों से यह भी कहा था कि लापता बच्चों के मामलों को तब तक तस्करी का मामला ही माना जाए, जब तक कि इसके विपरीत कुछ साबित न हो जाए।

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15 राज्यों को कोर्ट ने दिया आखिरी मौका

सुनवाई के दौरान, एमिकस क्यूरी (amicus curiae) - यानी अदालत की सहायता के लिए नियुक्त वकील  ने... इस मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 15 राज्यों ने अभी तक ऐसी कमेटियां नहीं बनाई हैं। इसके बाद बेंच ने इन राज्यों को एक आखिरी मौका दिया और निर्देश दिया कि इन कमेटियों के गठन और कामकाज की पूरी जानकारी 18 अप्रैल तक जमा किए जाने वाले हलफनामों में दी जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी। 
 


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vasudha

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