“सबका ध्यान सिर्फ बच्चे पर चला जाता है…” मां बनने के बाद Kiara Advani ने शेयर की दिल की बात
punjabkesari.in Tuesday, May 12, 2026 - 04:57 PM (IST)
नारी डेस्क: मां बनना हर महिला की जिंदगी का बेहद खास अनुभव होता है, लेकिन इसके साथ कई भावनात्मक और मानसिक बदलाव भी आते हैं। अक्सर बच्चे के जन्म के बाद पूरा परिवार और रिश्तेदार नवजात की देखभाल में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि नई मां की भावनाओं और जरूरतों पर ध्यान कम हो जाता है। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री Kiara Advani ने भी इसी मुद्दे पर खुलकर बात की।
पॉडकास्ट में कही दिल की बात
हाल ही में Kiara Advani ने Raj Shamani के पॉडकास्ट में मां बनने के बाद आने वाले बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद ज्यादातर लोगों का पूरा ध्यान सिर्फ बेबी पर ही रहता है, जबकि नई मां भी शारीरिक और भावनात्मक रूप से काफी कुछ महसूस कर रही होती है। उन्होंने इशारों में बताया कि इस समय मां को भी उतने ही प्यार, देखभाल और समझ की जरूरत होती है जितनी बच्चे को।

नई मां का हाल-चाल पूछना भी जरूरी
अक्सर लोग बच्चे को देखने आते हैं और पूरा समय उसी के बारे में बात करते हैं। लेकिन नई मां कैसा महसूस कर रही है, उसकी तबीयत कैसी है या वह मानसिक रूप से कैसी स्थिति में है, यह पूछना भी उतना ही जरूरी है। नई मां से कुछ मिनट बैठकर बात करना, उसकी बातों को ध्यान से सुनना और उसे यह महसूस कराना कि उसकी भावनाएं भी मायने रखती हैं, उसके आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है।
सिर्फ बच्चे नहीं, मां की जरूरतों को भी समझें
बच्चे के जन्म के बाद परिवार का पूरा फोकस अक्सर बेबी की जरूरतों पर चला जाता है उसे दूध मिला या नहीं, वह सो रहा है या नहीं, डायपर बदलना है या नहीं। लेकिन इसी बीच कई बार मां की जरूरतें पीछे छूट जाती हैं। नई मां को भी आराम, भावनात्मक सहारे और थोड़ी मदद की जरूरत होती है। अगर परिवार और पति इस बात को समझें, तो मां खुद को अकेला महसूस नहीं करती और इस नए दौर को ज्यादा सहज तरीके से संभाल पाती है।

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इस समय नई मां को जज करने से बचें
प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसकी वजह से नई मां कभी थकान, कभी उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस कर सकती है। ऐसे समय में उसकी बातों या व्यवहार को जज करने के बजाय उसे समझने की जरूरत होती है। जब परिवार उसका साथ देता है और बिना आलोचना किए उसकी भावनाओं को समझता है, तो वह मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत महसूस करती है।
छोटे-छोटे कामों में मदद बहुत मायने रखती है
नई मां के लिए छोटी-छोटी मदद भी बड़ी राहत बन सकती है। जैसे बच्चे को कुछ देर संभाल लेना, डायपर बदलने में मदद करना, बोतल साफ कर देना या घर के छोटे-मोटे कामों में हाथ बंटाना। इन छोटी बातों से मां को थोड़ा आराम मिल जाता है और वह खुद को बेहतर महसूस करती है।
मां को खुद के लिए भी समय मिलना चाहिए
बच्चे की देखभाल के बीच नई मां अक्सर खुद को पूरी तरह भूल जाती है। इसलिए जरूरी है कि परिवार ऐसा माहौल बनाए जहां वह कुछ समय अपने लिए भी निकाल सके। चाहे थोड़ी देर आराम करना हो, हल्का संगीत सुनना हो, टहलना हो या बस कुछ देर अकेले बैठना—ये छोटी चीजें भी नई मां को मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस कराने में मदद करती हैं।


