सावन सोमवार पर शिव पूजा से पहले जानें जरूरी नियम, वरना अधूरी रह सकती है आपकी साधना
punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 10:15 AM (IST)
नारी डेस्क: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इस पूरे माह में पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भोलेनाथ का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं।
हालांकि, केवल उपवास रखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार व्रत के दौरान शुद्ध आचरण, सात्विक जीवनशैली और पूजा के नियमों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। यदि व्रत के दौरान इन बातों की अनदेखी की जाए, तो साधना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। इसलिए सावन सोमवार का व्रत रखने से पहले इसके महत्वपूर्ण नियमों को जान लेना जरूरी है।

क्यों रखा जाता है सावन सोमवार का व्रत
धार्मिक मान्यता है कि सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान किए गए शिव पूजन, अभिषेक, मंत्र जाप और व्रत का विशेष पुण्य मिलता है। अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना के लिए यह व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए सावन सोमवार का उपवास करती हैं। इसके अलावा कई श्रद्धालु मानसिक शांति, करियर में सफलता, आर्थिक उन्नति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना से भी यह व्रत करते हैं।
व्रत की शुरुआत कैसे करें
सावन सोमवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठने का प्रयास करें। स्नान के बाद साफ-सुथरे और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए पूरे श्रद्धाभाव से व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और शांत मन से भगवान की आराधना प्रारंभ करें।
शिवलिंग का अभिषेक सही विधि से करें
सावन सोमवार की पूजा में शिवलिंग का अभिषेक सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अभिषेक के लिए स्वच्छ जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वह ताजा, साबुत और बिना कीड़े लगा हुआ हो। पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्राष्टकम का पाठ भी किया जा सकता है।

ये भी पढ़ें: 21 साल की युवती को कभी नहीं आए Periods, पेरेंट्स ने करवाया इलाज तो जांच में सामने आई ये बीमारी
व्रत के दौरान रखें सात्विक आहार
यदि आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे हैं और फलाहार कर रहे हैं, तो केवल सात्विक खाद्य पदार्थों का ही सेवन करें। दूध, दही, मौसमी फल, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा और सूखे मेवे व्रत के दौरान उपयुक्त माने जाते हैं। वहीं इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। सात्विक भोजन के साथ मन और विचारों की शुद्धता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
केवल भोजन का नहीं, व्यवहार का भी रखें संयम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत का अर्थ केवल भोजन का त्याग करना नहीं है। इस दिन क्रोध, झूठ, कटु वचन, विवाद और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण करना और सकारात्मक विचारों को अपनाना व्रत की पवित्रता को बढ़ाता है।
दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व
सावन सोमवार के दिन जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शुभ माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि व्रत के साथ किया गया दान पुण्यफल में वृद्धि करता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
क्या सभी लोगों को निर्जला व्रत रखना चाहिए
हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग-अलग होती है। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, गर्भावस्था है, बुजुर्ग हैं या चिकित्सक ने उपवास से मना किया है, तो ऐसे लोगों को निर्जला व्रत रखने के बजाय फलाहार या हल्का सात्विक भोजन करना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से श्रद्धा और आस्था का महत्व अधिक माना गया है, इसलिए स्वास्थ्य की अनदेखी करना उचित नहीं है।

व्रत का पारण कब और कैसे करें
सावन सोमवार की पूजा, शिव आरती और भगवान को भोग अर्पित करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। पारण हमेशा सात्विक भोजन से करना चाहिए और भोजन से पहले भगवान का प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु शाम की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर स्थानीय परंपराओं के अनुसार पारण का समय निर्धारित किया जाता है।
सावन सोमवार व्रत में रखें इन बातों का विशेष ध्यान
सावन सोमवार का व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक माना जाता है। यदि श्रद्धा, नियम और सात्विक आचरण के साथ भगवान शिव की पूजा की जाए, तो यह व्रत जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है। इसलिए व्रत के दौरान पूजा-विधि के साथ-साथ व्यवहार, खान-पान और स्वास्थ्य का भी संतुलित ध्यान रखना आवश्यक है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों में पूजा-विधि और व्रत संबंधी नियमों में भिन्नता हो सकती है।)

