श्राद्ध पक्ष में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं पितर
punjabkesari.in Thursday, Oct 01, 2026 - 04:19 PM (IST)
नारी डेस्क : पितृ पक्ष का पावन समय चल रहा है और श्राद्ध कर्म संपन्न करने के लिए अब कुछ ही दिन बाकी हैं। हिंदू धर्म में यह समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का माना जाता है। इस दौरान पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध कर्म करते समय कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। माना जाता है कि विधि-विधान से श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
श्राद्ध कर्म के लिए सही समय और स्थान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध से जुड़े मुख्य कर्म अपराह्न यानी दोपहर के बाद के समय में करना शुभ माना जाता है। श्राद्ध कर्म के लिए घर की निजी भूमि या किसी पवित्र तीर्थ स्थल का चयन किया जा सकता है। कर्मकांड करते समय स्थान की स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखने की मान्यता है।

भोजन में इन चीजों को माना गया है शुभ
श्राद्ध के भोजन में गाय का घी, दूध और दही शामिल करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा जौ, मटर, कांगनी और खासतौर पर काले तिल का प्रयोग महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि तिल श्राद्ध कर्म में विशेष पवित्रता रखते हैं। इस दौरान कुशा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
चांदी के बर्तनों और दान की मान्यता
शास्त्रीय मान्यताओं में श्राद्ध कर्म के दौरान चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल शुभ माना गया है। अगर सामर्थ्य हो तो चांदी का दान भी किया जा सकता है। हालांकि, दान हमेशा अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार ही करना चाहिए।
ब्राह्मण को पहले से दें निमंत्रण
मान्यता के अनुसार, श्राद्ध के लिए ब्राह्मण को एक दिन पहले ही सम्मानपूर्वक भोजन का निमंत्रण देना चाहिए। उन्हें स्वच्छ और आरामदायक आसन पर बैठाकर आदरपूर्वक भोजन कराया जाता है। भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और वस्त्र देने की भी परंपरा है।

पंचबलि का रखें ध्यान
श्राद्ध के दिन बनाए गए भोजन में से पंचबलि के लिए भी हिस्सा निकालने की परंपरा है। इसमें गाय, देवता, कौआ, कुत्ता और चींटियों के निमित्त भोजन अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस परंपरा के जरिए सभी जीवों के प्रति सम्मान और सेवा का भाव व्यक्त किया जाता है।
परिवार के लोगों के भोजन का क्रम
परंपरा के अनुसार, श्राद्ध कर्म में पहले ब्राह्मणों और पंचबलि के निमित्त भोजन अर्पित करने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य भोजन करते हैं। इसका उद्देश्य श्राद्ध कर्म को श्रद्धा और नियमपूर्वक पूरा करना माना जाता है।
बहन, जमाई और भांजे को भी कराएं भोजन
कुछ धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध के अवसर पर बहन, जमाई और भांजे को भी घर बुलाकर भोजन कराने का महत्व बताया गया है। अगर ये रिश्तेदार उसी शहर में रहते हों, तो उन्हें सम्मानपूर्वक आमंत्रित करने की परंपरा है।

भूखे व्यक्ति को खाली हाथ न लौटाएं
श्राद्ध के दिन अगर कोई जरूरतमंद, भूखा व्यक्ति या भिखारी घर के दरवाजे पर आए तो उसे यथासंभव भोजन कराना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जरूरतमंद की सेवा और अन्नदान पुण्यदायी माना जाता है।
श्रद्धा सबसे जरूरी
पितृ पक्ष में किए जाने वाले कर्मकांडों को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियमों में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष श्राद्ध विधि को अपनाने से पहले अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह लेना उचित है। अंततः श्राद्ध का मुख्य भाव पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

