दर्द की दवा सोच-समझकर लें, बिना डॉक्टर की सलाह के लेने से किडनी हो सकती है खराब
punjabkesari.in Wednesday, Sep 23, 2026 - 10:47 AM (IST)
नारी डेस्क: सिरदर्द हुआ तो दर्द की गोली ले ली, बुखार आया तो घर में रखी एंटीबायोटिक शुरू कर दी... बहुत से लोग छोटी-मोटी तकलीफ में खुद से दवा लेने लगते हैं। लेकिन यही आदत लंबे समय में सेहत के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। खासकर कुछ दर्द निवारक दवाओं के जरूरत से ज्यादा या गलत इस्तेमाल से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी को लेकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने लोगों के साथ-साथ डॉक्टरों, फार्मासिस्ट, दवा विक्रेताओं और अस्पतालों के लिए सलाह जारी की है। संगठन ने दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल सोच-समझकर और जिम्मेदारी से करने पर जोर दिया है।
बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचें
CDSCO की हालिया एडवाइजरी में खासतौर पर NSAIDs यानी कुछ आम दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक्स के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने को कहा गया है। दवाओं की बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े नियम पहले से मौजूद हैं और संगठन ने इनका पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। आम लोगों के लिए इसका सीधा मतलब है कि हर दर्द या बुखार में अपनी मर्जी से दवा लेना सही आदत नहीं है। अगर कोई परेशानी बार-बार हो रही है या दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रही, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

वायरल बुखार में हर बार एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं
सर्दी-जुकाम, फ्लू और कई सामान्य वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक काम नहीं करती, क्योंकि एंटीबायोटिक्स बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसे में खुद से एंटीबायोटिक शुरू करने से बीमारी का सही इलाज होने में देरी हो सकती है और अनावश्यक दवा लेने से नुकसान भी हो सकता है। इसलिए डॉक्टर ने जितनी मात्रा और जितने दिनों के लिए एंटीबायोटिक लिखी है, उसे उसी तरह लेना चाहिए। अपनी मर्जी से खुराक बदलना या बीच में दवा बंद करना भी सही नहीं है।
बची हुई दवा दोबारा न खाएं
कई घरों में ऐसा होता है कि किसी बीमारी में बची हुई दवाएं बाद में उसी तरह के लक्षण आने पर फिर से इस्तेमाल कर ली जाती हैं। CDSCO ने इस तरह की आदत से बचने की सलाह दी है। किसी और के लिए लिखी गई दवा खुद न लें और अपनी बची हुई एंटीबायोटिक किसी दूसरे व्यक्ति को भी न दें। हर बार एक जैसे लक्षण होने का मतलब यह नहीं है कि बीमारी भी वही है। अगर दर्द, बुखार या कोई दूसरा लक्षण लगातार बना हुआ है, तो बार-बार खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाना ज्यादा सुरक्षित है।
दवाओं की गुणवत्ता पर भी रखी जा रही है नजर
देश में दवाओं की गुणवत्ता की नियमित जांच भी की जाती है। हर महीने अलग-अलग जगहों से दवाओं के नमूने लेकर उनकी जांच की जाती है। जांच में अगर कोई दवा तय गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो उसे Not of Standard Quality (NSQ) यानी निर्धारित गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं माना जाता। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में हुई जांच में 220 दवा नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए। इनमें केंद्रीय प्रयोगशालाओं में जांचे गए 29 नमूने और राज्य प्रयोगशालाओं में जांचे गए 191 नमूने शामिल बताए गए हैं। इन दवाओं से जुड़े निर्माताओं को संबंधित बैच को बाजार से वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं।

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दिल्ली से एक नकली दवा का नमूना भी सामने आया
जांच के दौरान दिल्ली से लिया गया एक नमूना नकली यानी spurious drug भी पाया गया। बताया गया कि इस दवा को दूसरे ब्रांड के नाम का इस्तेमाल करके गैरकानूनी तरीके से बनाया गया था। मामले में नियमानुसार कानूनी जांच शुरू की गई है। नकली या गलत तरीके से ब्रांड नाम इस्तेमाल करने वाली दवाएं मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं, इसलिए ऐसी दवाओं पर नियामक एजेंसियां कार्रवाई करती हैं।
दवा दुकानदारों और अस्पतालों को भी सलाह
CDSCO ने दवा विक्रेताओं को डॉक्टर की पर्ची वाली दवाएं नियमों के मुताबिक बेचने और बिना उचित प्रिस्क्रिप्शन के ऐसी दवाओं की बिक्री से बचने की सलाह दी है। अस्पतालों को भी दवाओं के सही इस्तेमाल की निगरानी और मरीजों को उचित जानकारी देने की व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया है।
छोटी-सी सावधानी, बड़ी परेशानी से बचा सकती है
दर्द या बुखार होने पर तुरंत गोली खा लेना आसान लगता है, लेकिन हर बार इसका कारण एक जैसा नहीं होता। खासकर अगर दर्द बार-बार हो रहा है, लंबे समय तक बना हुआ है या दवा लेने के बावजूद आराम नहीं मिल रहा, तो इसकी वजह जानना जरूरी है। इसलिए घर में रखी पुरानी दवा या किसी दूसरे व्यक्ति की दवा लेने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लें। दवा सही बीमारी, सही खुराक और सही अवधि में लेना ही सुरक्षित तरीका है।

