हर चौथे मरीज को हेपेटाइटिस-बी, एक साल में 9 हजार से ज्यादा लोगों की हुई स्क्रीनिंग

punjabkesari.in Monday, Oct 19, 2026 - 11:49 AM (IST)

नारी डेस्क:  दिल्ली में हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राजधानी में हुई जांच के आंकड़ों के मुताबिक, हेपेटाइटिस-बी की स्क्रीनिंग कराने वाले करीब हर चौथे व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई। वहीं, हेपेटाइटिस-सी की जांच कराने वाले लगभग हर पांचवें व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ये आंकड़े बताते हैं कि इन दोनों बीमारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने और संक्रमित मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने की जरूरत है।

एक साल में 9 हजार से ज्यादा लोगों की हुई जांच

पिछले साल अप्रैल से इस साल मार्च तक दिल्ली में हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की जांच की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान 9,152 लोगों की हेपेटाइटिस-बी के लिए स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 2,414 लोगों में संक्रमण पाया गया। यानी जांच कराने वाले करीब 26 प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित मिले। इसी अवधि में हेपेटाइटिस-सी की जांच के लिए 8,973 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 1,875 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यह कुल जांच का करीब 21 प्रतिशत है। हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित पाए गए मरीजों में से 669 लोगों को इलाज शुरू करने के लिए उपचार पर रखा गया, जबकि 688 मरीजों ने अपना इलाज पूरा कर लिया। ये आंकड़े इस बात की अहमियत बताते हैं कि केवल संक्रमण की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों को समय पर उपचार से जोड़ना भी जरूरी है।

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क्या है हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी

हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी दोनों ही वायरस के कारण होने वाले संक्रमण हैं, जो मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करते हैं। कई बार शुरुआत में इनके लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में व्यक्ति को लंबे समय तक संक्रमण का पता नहीं चलता और इलाज में देरी हो सकती है। अगर इन बीमारियों की समय पर पहचान और इलाज न हो, तो कुछ मरीजों में लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए जिन लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक है, उनके लिए जांच कराना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

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इन लोगों को संक्रमण का खतरा ज्यादा

हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी संक्रमित खून और कुछ विशेष परिस्थितियों में शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैल सकते हैं। कुछ स्थितियों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

एक ही सुई का इस्तेमाल करना: इस्तेमाल की गई सुई या सिरिंज को साझा करने से संक्रमित खून दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच सकता है।

इंजेक्शन के जरिए नशीले पदार्थ लेना: सुई या इंजेक्शन साझा करने वाले लोगों में संक्रमण का जोखिम अधिक होता है।

असुरक्षित यौन संबंध: विशेष रूप से हेपेटाइटिस-बी असुरक्षित यौन संपर्क के जरिए फैल सकता है।

टैटू या पियर्सिंग बनवाना: यदि इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण ठीक से स्टरलाइज न किए गए हों, तो संक्रमण का खतरा रहता है।

खून चढ़वाना या चिकित्सा प्रक्रिया: असुरक्षित खून या दूषित चिकित्सा उपकरणों के संपर्क से संक्रमण फैल सकता है। सुरक्षित रक्त की जांच और संक्रमण-नियंत्रण के नियम इस जोखिम को कम करते हैं।

स्वास्थ्य कर्मी: सुई चुभने या संक्रमित खून के संपर्क में आने से स्वास्थ्य कर्मियों को भी खतरा हो सकता है।

हालांकि, केवल इन परिस्थितियों में से किसी एक का अनुभव होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति संक्रमित है। संक्रमण की पुष्टि जांच से ही की जा सकती है।

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दिल्ली में सरकारी केंद्रों पर मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राजधानी में उपचार केंद्रों के माध्यम से जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, लोकनायक अस्पताल में एक मॉडल उपचार केंद्र और सात सामान्य उपचार केंद्र हैं। इसके अलावा राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल और एम्स के सुंदर नगरी स्थित आउटरीच क्लीनिक में भी उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इन केंद्रों पर केंद्र सरकार की सहायता से पात्र मरीजों को निशुल्क स्क्रीनिंग और इलाज की सुविधा दी जाती है। इससे उन लोगों को मदद मिल सकती है, जिन्हें संक्रमण का खतरा है या जिनकी जांच में बीमारी की पुष्टि हुई है।

संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें

हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। बच्चों और जोखिम वाले वयस्कों को टीकाकरण के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। हेपेटाइटिस-सी से बचाव के लिए फिलहाल कोई टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसका इलाज संभव है।संक्रमण से बचने के लिए हमेशा नई और स्टरलाइज की गई सुई का इस्तेमाल करें, इंजेक्शन साझा न करें, टैटू बनवाते समय साफ-सुथरे उपकरणों का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं। यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण का खतरा रहा है, तो उसे डॉक्टर की सलाह लेकर जांच करानी चाहिए। समय पर जांच, सही जानकारी और उचित इलाज से हेपेटाइटिस के गंभीर परिणामों के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसलिए लक्षणों का इंतजार करने के बजाय जोखिम होने पर जांच कराने और स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने को प्राथमिकता दें।
 


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Content Editor

Priya Yadav

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