रिपोर्ट में हुआ खुलासा: इन लोगों को होता है Cancer का ज्यादा खतरा, WHO ने बताए कारण

punjabkesari.in Friday, Oct 16, 2026 - 12:04 PM (IST)

नारी डेस्क : कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसका खतरा कई कारणों से बढ़ सकता है। तंबाकू का सेवन, शराब पीना, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और वायु प्रदूषण जैसे कारक कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, कुछ संक्रमण, बढ़ती उम्र और आनुवंशिक कारण भी कैंसर की आशंका से जुड़े होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर के कई मामलों को जोखिम कारकों से बचकर और समय रहते जांच व इलाज करवाकर रोका या नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कैंसर कैसे होता है, किन लोगों में इसका खतरा अधिक हो सकता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए।

कैसे होता है कैंसर?

कैंसर तब विकसित होता है, जब शरीर की कुछ सामान्य कोशिकाओं में बदलाव होने लगते हैं और वे अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। ये असामान्य कोशिकाएं आसपास के ऊतकों में फैल सकती हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच सकती हैं। कैंसर बनने की प्रक्रिया कई चरणों में आगे बढ़ सकती है। हालांकि, हर कैंसर का विकास एक जैसा नहीं होता और इसके कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं।

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कैंसर होने के प्रमुख कारण क्या हैं?

WHO के अनुसार, कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले कारकों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में समझा जा सकता है।
भौतिक कारक: सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों और आयनाइजिंग रेडिएशन के संपर्क में आने से कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
रासायनिक कारक: तंबाकू के धुएं में मौजूद हानिकारक पदार्थ, एस्बेस्टस, शराब और आर्सेनिक जैसे पदार्थ कैंसर के जोखिम से जुड़े हैं।
जैविक कारक: कुछ वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमण भी कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इनमें ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV), हेपेटाइटिस बी और सी वायरस तथा हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया शामिल हैं। 

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किन लोगों में कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है?

कुछ आदतें, स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां और पर्यावरणीय कारक कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, किसी जोखिम कारक का मौजूद होना यह नहीं बताता कि व्यक्ति को कैंसर जरूर होगा।
तंबाकू का सेवन करने वाले लोग: सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है।
शराब पीने वाले लोग: शराब का सेवन मुंह, गले, लिवर, स्तन और आंतों सहित कई प्रकार के कैंसर से जुड़ा है।
अस्वस्थ खानपान करने वाले लोग: असंतुलित आहार, फल-सब्जियों का कम सेवन और अधिक वजन कुछ कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
शारीरिक रूप से कम सक्रिय लोग: लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम की कमी, खासकर अधिक वजन के साथ, कुछ कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है।
प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोग: वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
कुछ संक्रमण से प्रभावित लोग: HPV, हेपेटाइटिस बी या सी और H. pylori जैसे संक्रमण कुछ विशेष प्रकार के कैंसर से जुड़े हैं।
बढ़ती उम्र वाले लोग: उम्र बढ़ने के साथ कैंसर का जोखिम बढ़ता है। इसकी एक वजह समय के साथ कोशिकाओं में बदलाव और जोखिम कारकों के संपर्क का जमा होना है।
परिवार में कैंसर का इतिहास रखने वाले लोग: कुछ कैंसर में आनुवंशिक बदलाव और पारिवारिक इतिहास भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे लोगों को डॉक्टर से अपने जोखिम और जांच के बारे में सलाह लेनी चाहिए।

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कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?

कैंसर के हर मामले को रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें अपनाकर इसके जोखिम को कम किया जा सकता है।
तंबाकू और तंबाकू से बने उत्पादों से पूरी तरह दूर रहें।
शराब का सेवन न करें या इससे बचने का प्रयास करें।
संतुलित आहार लें और भोजन में फल-सब्जियों को शामिल करें।
नियमित शारीरिक गतिविधि करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें।
धूप में निकलते समय त्वचा को UV किरणों से बचाएं।
डॉक्टर की सलाह और स्थानीय टीकाकरण दिशा-निर्देशों के अनुसार HPV और हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं।
कार्यस्थल पर हानिकारक रसायनों और रेडिएशन से बचाव के निर्धारित नियमों का पालन करें।
घर और आसपास के वातावरण में वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करने का प्रयास करें।
WHO और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के 2026 के विश्लेषण के अनुसार, दुनिया भर में 2022 में सामने आए नए कैंसर मामलों में लगभग 37 प्रतिशत मामले ऐसे जोखिम कारकों से जुड़े थे, जिनसे बचाव संभव हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर कैंसर को रोका जा सकता है, लेकिन बचाव के उपाय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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कैंसर की शुरुआती पहचान कैसे करें?

कैंसर के लक्षण उसके प्रकार और शरीर में प्रभावित हिस्से के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है
जैसे: शरीर में बिना स्पष्ट कारण गांठ या सूजन होना।
बिना कोशिश किए वजन लगातार कम होना।
लंबे समय तक खांसी रहना या आवाज में बदलाव होना।
मल-मूत्र की आदतों में लगातार बदलाव होना।
किसी घाव का लंबे समय तक ठीक न होना।
असामान्य रक्तस्राव या शरीर के किसी हिस्से से खून आना।
लगातार थकान या ऐसा दर्द होना जिसका कारण स्पष्ट न हो।
ये लक्षण कैंसर के अलावा दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए इन्हें देखकर घबराने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाएं, खासकर जब कोई लक्षण लगातार बना रहे या बढ़ रहा हो।

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क्या नियमित कैंसर स्क्रीनिंग जरूरी है?

कैंसर की स्क्रीनिंग का उद्देश्य कुछ कैंसर को लक्षण सामने आने से पहले पहचानना है। हालांकि, हर व्यक्ति को हर तरह की स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं होती। उम्र, लिंग, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर उचित जांच की सलाह दे सकते हैं। किसी असामान्य रिपोर्ट का मतलब भी अपने आप कैंसर होना नहीं है; पुष्टि के लिए अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है।
नोट: कैंसर का जोखिम हर व्यक्ति में अलग होता है। यदि आपको कोई लगातार बना रहने वाला असामान्य लक्षण दिखाई दे या परिवार में कैंसर का इतिहास हो, तो डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच और सही इलाज कई प्रकार के कैंसर में बेहतर परिणाम पाने में मदद कर सकते हैं।


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Content Editor

Monika

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