220 फीट गहरे बोरवेल में गिरे निरवैर सिंह की नहीं बची जान, 21 घंटे तक लड़ा जिंदगी से

punjabkesari.in Wednesday, Jul 01, 2026 - 11:59 AM (IST)

नारी डेस्क:  हरियाणा के अंबाला जिले में 220 फुट गहरे बोरवेल में गिरे चार वर्षीय बच्चे को 21 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद बुधवार तड़के बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। निरवैर सिंह को मंगलवार सुबह शुरू हुए विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त बचाव अभियान के बाद बुधवार तड़के तीन बजकर 40 मिनट पर बोरवेल से बाहर निकाला गया और उसे तुरंत एम्बुलेंस से अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल ले जाया गया। 

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बोरवेल से बाहर मृत मिला बच्चा

अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के तुरंत बाद घटनास्थल पर ही उसकी प्रारंभिक जांच की गई थी। बच्चे के जीवित होने के कोई संकेत नहीं मिले, जिसके बाद उसे अस्पताल लाया गया और वहां आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किए गए। हालांकि तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया है। डॉक्टर ने बताया कि मौत के सही कारण और समय की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।


इस तरह बोरवेल में गिरा बच्चा

 यह घटना मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे अंबाला जिले के धन्यौड़ा गांव में हुई। निरवैर सिंह अपने पिता मनजीत के साथ खेत में अपने दादा करनैल सिंह के लिए खाना लेकर गया था। खेत पर पहुंचने के बाद मनजीत काम में लग गए और करनैल सिंह खाना खाने लगे। खेलते-खेलते निरवैर की नजर खुले बोरवेल पर पड़ी और वह उसमें मिट्टी डालने लगा। माना जा रहा है कि जब वह बोरवेल के अंदर झांकने के लिए झुका, तभी आसपास की गीली मिट्टी धंस गई और उसका पैर फिसलने से वह बोरवेल में गिर गया। मनजीत ने बताया कि अचानक तेज आवाज सुनकर उनका ध्यान उधर गया। वह तुरंत बोरवेल के पास पहुंचे और निरवैर को आवाज लगाई। बच्चे के बोरवेल में गिरने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पहले अपने स्तर पर उसे निकालने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर सुबह करीब साढ़े सात बजे प्रशासन को सूचना दी। 

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लाख कोशिश के बाद भी बच नहीं सका बच्चा

सूचना मिलते ही उपायुक्त (डीसी) अजय सिंह तोमर अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद बचाव दलों ने व्यापक अभियान शुरू किया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना और जिला प्रशासन ने बच्चे को जीवित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। मनजीत और उनकी पत्नी जसबीर कौर की एक बड़ी बेटी भी है। उन्होंने बताया कि निरवैर का इसी वर्ष पास के भनोखेड़ी गांव के एक स्कूल में नर्सरी कक्षा में दाखिला कराया गया था। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में निरवैर अपनी नानी के घर गया हुआ था और स्कूल एक जुलाई से खुलने के कारण वह सोमवार को ही वापस लौटा था। हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज भी मंगलवार शाम घटनास्थल पर पहुंचे। उपायुक्त ने मंगलवार को कहा था कि बोरवेल को खुला छोड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश पुलिस को दे दिए गए हैं। 

किसानों को दी गई बोरवेल ढकने की नसीहत

तोमर ने किसानों से अपने खेतों में बोरवेल को खुला न छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि यदि बोरवेल ढका होता तो यह हादसा टाला जा सकता था। पंजाब के होशियारपुर में भी पिछले महीने ऐसी ही घटना हुई थी, जिसमें चार वर्षीय एक बच्चा अपने घर के पास नए बोरवेल में गिर गया था। हालांकि कई बचाव एजेंसियों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने करीब नौ घंटे तक चले अभियान के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के एक गांव में 2006 में बोरवेल में गिरे पांच वर्षीय प्रिंस को बचाने के लिए भी बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था। करीब 48 घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। 


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Content Writer

vasudha

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