‘पापा हैं तो हमारी दुनिया है...’ एक बेटी ने दी किडनी, दूसरी ने लीवर, जिंदगी बचाने के लिए बनीं फरिश्ता

punjabkesari.in Thursday, Jun 18, 2026 - 03:54 PM (IST)

नारी डेस्क: कहते हैं बेटियां घर की रौनक होती हैं, लेकिन गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों ने यह साबित कर दिया कि जरूरत पड़ने पर बेटियां अपने माता-पिता की सबसे बड़ी ताकत भी बन जाती हैं। फादर्स डे से ठीक पहले सामने आई यह कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है। जब एक पिता की जिंदगी पर संकट आया और डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि उन्हें बचाने के लिए तुरंत लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत है, तब उनकी दोनों बेटियां बिना किसी हिचकिचाहट के आगे आईं और अपने अंग दान कर पिता को नई जिंदगी दे दी।

गंभीर बीमारी ने पूरे परिवार को झकझोर दिया

गाजियाबाद के मोरटा गांव निवासी 45 वर्षीय जयंत त्यागी पिछले करीब एक साल से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। जयंत त्यागी कारोबारी होने के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सेक्टर संयोजक भी रह चुके हैं। करीब तीन महीने पहले उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। जांच के लिए उन्हें नोएडा के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी किडनी और लीवर दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो चुके हैं। चिकित्सकों ने परिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जल्द प्रत्यारोपण नहीं हुआ तो उनकी जान बचाना मुश्किल हो सकता है। यह खबर सुनते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

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बेटियों ने लिया जिंदगी बदल देने वाला फैसला

ऐसे कठिन समय में जयंत त्यागी की दोनों बेटियां उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आईं। 22 वर्षीय रिषिका त्यागी, जिन्होंने हाल ही में बीटेक की पढ़ाई पूरी की है, ने अपनी एक किडनी दान करने का निर्णय लिया। वहीं 19 वर्षीय खुशी त्यागी, जो बीटेक प्रथम वर्ष की छात्रा हैं, ने अपने लीवर का एक हिस्सा पिता को देने का फैसला किया। परिवार के लोगों ने दोनों बेटियों को समझाने की कोशिश की। सभी को उनकी सेहत और भविष्य की चिंता थी। लेकिन बेटियों का जवाब सुनकर हर किसी की आंखें भर आईं। उनका कहना था कि अगर उनके पिता ही नहीं रहेंगे, तो पढ़ाई, करियर और बाकी सारी उपलब्धियों का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।

मां की जगह खुद बनीं पिता की उम्मीद

बेटियों ने परिवार को यह भी समझाया कि अगर उनकी मां अंगदान करती हैं और भविष्य में उनकी तबीयत खराब हो जाती है, तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। यही सोचकर दोनों बहनों ने खुद आगे आने का फैसला किया। उनके इस निर्णय ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया।

होने वाले ससुराल ने भी दिखाई बड़ी सोच

इस कहानी का एक और प्रेरणादायक पहलू बड़ी बेटी रिषिका से जुड़ा है। उनकी शादी आने वाले कुछ महीनों में होने वाली है। आमतौर पर ऐसे मामलों में लोग भविष्य को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताते हैं, लेकिन रिषिका के होने वाले ससुराल वालों ने जो किया, उसने समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया। जब उन्हें रिषिका के अंगदान के फैसले के बारे में पता चला तो उन्होंने न सिर्फ इसका समर्थन किया, बल्कि उनकी हिम्मत और संवेदनशीलता की खुलकर सराहना भी की। परिवार का कहना है कि होने वाले ससुराल पक्ष ने गर्व के साथ कहा कि ऐसी साहसी और संस्कारी बेटी को अपने घर की बहू बनाना उनके लिए सम्मान की बात है।

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घंटों चला ऑपरेशन, मिली नई जिंदगी

सभी मेडिकल जांचों के बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की कि दोनों बेटियां अपने पिता के लिए सबसे उपयुक्त डोनर हैं। कानूनी और चिकित्सीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद नोएडा के एक निजी अस्पताल में ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू हुई। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कई घंटों तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद किडनी और लीवर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक पूरा किया। डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और पिता को नई जिंदगी मिल गई।

तेजी से हो रहा है स्वास्थ्य में सुधार

अस्पताल प्रशासन के अनुसार बड़ी बेटी रिषिका की हालत अब सामान्य है। वहीं जयंत त्यागी और छोटी बेटी खुशी को कुछ समय तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। तीनों की सेहत में लगातार सुधार देखा जा रहा है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है।सोशल मीडिया पर बेटियों को मिल रहा सलाम जैसे ही इस घटना की जानकारी लोगों तक पहुंची, हर तरफ इन दोनों बेटियों की चर्चा शुरू हो गई। अस्पताल में परिवार का हाल जानने के लिए रिश्तेदारों, शुभचिंतकों और सामाजिक संगठनों के लोगों का आना-जाना लगा रहा। सोशल मीडिया पर भी हजारों लोग इन दोनों बहनों की तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि जहां आज रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है, वहीं इन बेटियों ने अपने त्याग और प्रेम से पूरी दुनिया को परिवार का असली मतलब समझा दिया।

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बेटियां सिर्फ घर की शान नहीं, परिवार की ताकत भी हैं

रिषिका और खुशी की यह कहानी सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उन तमाम बेटियों को सलाम है जो हर मुश्किल घड़ी में अपने माता-पिता के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहती हैं। इन दोनों बहनों ने साबित कर दिया कि बेटियां केवल घर की खुशियां नहीं होतीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने माता-पिता के लिए जिंदगी की सबसे मजबूत ढाल भी बन सकती हैं।
  
 
 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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