इन दवाओं से युवा और बिना डायबिटीज वाले लोगों का तेजी से कम हो रहा वजन

punjabkesari.in Thursday, Apr 16, 2026 - 02:04 PM (IST)

नारी डेस्क: आज के समय में हमारे देश में नई पीढ़ी और कम उम्र के लोग मोटापे से काफी परेशान है। वो जल्द से जल्द अपना मोटापा कम करना चाहते है। इसलिए कई दवाओं का इस्तेमाल करते है। अब उनकी इन दवाओं पर एक स्टडी की गई है, जिसने सबको चौंका दिया। इस स्टडी में सामने आया है कि बिना डायबिटीज वाले लोगों और कम उम्र के मरीजों में वजन तेजी से कम होता है। देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि यह स्टडी वास्तविक परिस्थितियों में की गई है। चलिए अब हम आपको बताते है कि युवाओं और बिना डायबिटीज वाले लोगों का वजन तेजी से क्यों घट रहा है...

150 लोगों पर की गई रिसर्च 
इस स्टडी में देखा गया कि मोटापे से परेशान लोगों पर इन दवाओं का क्या असर हो रहा है। ओवरवेट और मोटापे से जूझ रहे 150 लोगों पर ये रिसर्च की गई है। इन लोगों को 6 महीने तक इंजेक्शन के जरिए सेमाग्लूटाइड और टिरजेपेटाइड जैसी दवाएं दी गई। यह दवाएं GLP-1 थेरेपी से जुड़ी हुई है, जो पहले टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए विकसित की गई थी, लेकिन अब इन दवाओं का इस्तेमाल मोटापा कम करने के लिए भी किया जाता है।

ऐसे रहे स्टडी के नतीजे
इन दवाओं पर की गई स्टडी के नतीजे इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित हुए हैं। स्टडी के मुताबिक, जिन 150 लोगों पर ये रिसर्च की गई थी उनमें से करीब 41 प्रतिशत प्रतिभागियों का वजन 10% से ज्यादा कम हुआ है। कुल मिलाकर औसत वजन घटने की दर 8.2 प्रतिशत रही। स्टडी में डायबिटीज और बिना डायबिटीज के लोगों के बीच अंतर भी साफ देखा गया। जिन लोगों को डायबिटीज की बीमारी नहीं थी, उनका वजन तेजी से कम हुआ। इन मरीजों का वजन औसतन 11.21 प्रतिशत तक घटा। वहीं, डायबिटीज वाले मरीजों में यह कमी करीब 5.48 प्रतिशत रही।

किन दवाओं का हुआ ज्यादा असर? 
स्टडी में सामने आया कि टिरजेपेटाइड लेने वाले मरीजों का वजन तेजी से कम हुआ। इस दवा के साथ औसत वजन में 8.60 प्रतिशत की कमी देखी गई। जबकि सेमाग्लूटाइड लेने वालों में यह दर 5.62 प्रतिशत रही। इस रिसर्च में ये भी सामने आया कि जिन लोगों ने पहले कभी जीएलपी-1 थेरेपी नहीं ली, उनका भी वजन तेजी से कम हुआ है। स्टडी में ये भी सामने आया कि जो कम उम्र वाले लोग होते है, उनमें वजन कम होने की प्रक्रिया तेज होती है। इस रिसर्च के दौरान युवाओं का वजन तेजी से घटा है। 10 प्रतिशत युवा और नए मरीजों ने वजन घटाने का लक्ष्य तेजी से पूरा कर लिया।

कब दिखता है इन दवाओं का असर? 
स्टडी के अनुसार एक्सपर्ट्स का कहना है कि मरीज के शरीर पर इन दवाओं का असर आमतौर पर 12 से 18 महीनों के बीच दिखाई देता है। रिसर्च के दौरान 10 प्रतिशत से ज्यादा वजन घटाने में औसतन 9.5 महीने का समय लगा। स्टडी में ये भी पाया गया कि जिन मरीजों को डायबिटीज के साथ मोटापा भी है, उनमें वजन कम होना थोड़ा मुश्किल होता है। भारतीय मरीजों में मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्या ज्यादा खतरनाक होती है और इन्सुलिन रेजिस्टेंस भी ज्यादा पाया जाता है। वहीं, डायबिटीज के मरीज पहले भी कई दवाएं ले रहे होते है, जिसमें इंसुलिन भी होता है। इसकी वजह से उनका वजन तेजी से नहीं घटना और वजन घटने की प्रक्रिया कम हो जाती है।

रिसर्च के ये नतीजे ऐसे समय में सामने आए जब सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) का पेटेंट खत्म हो गया है। सेमाग्लूटाइड एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है, जिसका उपयोग टाइप 2 मधुमेह को नियंत्रित करने और वजन घटाने के लिए किया जाता है। अब इसका पेटेंट खत्म होने के बाद देश में तेजी से बढ़ते एंटी ओबेसिटी मार्केट में कई जेनेरिक वर्शन का रास्ता साफ हो गया है। जिसने देश में इन दवाओं की बिक्री को और बढ़ावा दिया है।
 


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Content Editor

Pooja Gill

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