Tokyo Olympics में छाई मीराबाई चानू की ये बालियां, मां ने बताई इसके पीछे की कहानी

2021-07-24T18:26:16.883

टोक्यो ओलंपिक्स का आगाज हो चुका है और भारत को पहला मेडल भी मिल गया है। बतां दें कि महिला वेट लिफ्टर मीराबाई चानू ने भारत को सिल्वर मेडल दे कर गौरवान्वित किया है। वहीं इस दौरान मीराबाई चानू के एतिहासिक रजत पदक के अलावा  उनके कानों में पहनी ओलंपिक के छल्लों के आकार की बालियों ने भी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खूब खींचा। बतां दें कि यह बालियां उनकी मां ने पांच साल पहले अपने जेवर बेचकर उन्हें उपहार के तौर पर दी थी।

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बेटी को रजत पदक मिलने पर नहीं थम रहे मां के खुशी के आंसू
मीराबाई इन बालियों को अपना गोल्डन लक मानती थी जिसका असर भी देखने को मिला। मीराबाई की मां को उम्मीद थी कि इससे उनका भाग्य चमकेगा। बतां दें कि रियो 2016 खेलों में मीराबाई कमाल नहीं कर पाई थी लेकिन इस बार टोक्यो खेलों में पदक जीत उन्होंने केवल अपनी मां का ही नहीं ब्लकि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। वहीं बेटी की इस कामयाबी पर  उनकी मां सेखोम ओंग्बी तोम्बी लीमा के खुशी के आंसू रुक ही नहीं रहे हैं। 

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अपने जेवर बेच मीराबाई  को दी थी ओलंपिक की ये बालियां
मीराबाई की मां लीमा ने मणिपुर में अपने घर से एक इंटरव्यू में कहा कि मैंने बालियां टीवी पर देखी थी, मैंने ये उसे 2016 में रियो ओलंपिक से पहले दी थी, मैंने मेरे पास पड़े सोने और अपनी बचत से इन्हें बनवाया था, जिससे कि उसका भाग्य चमके और उसे सफलता मिले।

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उन्होंने कहा कि इन्हें देखकर मेरे आंसू निकल गए और जब उसने पदक जीता तब भी, उसके पिता (सेखोम कृति मेइतेई) की आंखों में भी आंसू थे।  खुशी के आंसू।  उसने अपनी कड़ी मेहनत से सफलता हासिल की। 

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बतां दें कि मीराबाई ने महिला 49 किग्रा वर्ग में रजत पदक के साथ ओलंपिक में भारोत्तोलन पदक के भारत के 21 साल के इंतजार को खत्म किया और टोक्यो खेलों में भारत को पदक दिला कर ओलंपिक का खाता खोल दिया है।

26 साल की मीराबाई चानू ने कुल 202 किग्रा (87 किग्रा+115 किग्रा) वजन उठाकर 2000 सिडनी ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली कर्णम मल्लेश्वरी से बेहतर प्रदर्शन किया।


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Content Writer

Anu Malhotra

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