45 साल तक लबादा के नीचे क्यों छिपा रहा अली खामेनेई का दाहिना हाथ?

punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 11:46 AM (IST)

नारी डेस्क : ईरान ने “ऑपरेशन फतह-ए-जंग” के तहत एक साथ सात देशों पर मिसाइल हमले किए हैं। सबसे पहले निशाना इजराइल था, इसके बाद सऊदी अरब, बहरीन, कतर, जॉर्डन, यूएई और कुवैत में स्थित अमेरिकी बेसों को हवाई और मिसाइल हमलों से टारगेट किया गया। इस हमले से ठीक पहले अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर हमला किया। जिसमे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गईं, जिसने पूरे देश और उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया। ईरान के लोग भावुक हुए, लेकिन खामेनेई से जुड़ी कई खबरें सामने आई है। इस बीच ये भी ध्यान में आया की ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अक्सर लबादा के नीचे दाहिना हाथ रखते थ और वह उससे कोई काम नहीं करते थे। इसका कारण यह था कि 1981 में उनके ऊपर हुए एक जानलेवा हमले में उनका दाहिना हाथ स्थायी रूप से काम करना बंद हो गया था। उस हमले में उनकी जान तो बच गई, लेकिन उन्होंने अपना दाहिना हाथ खो दिया, और तब से वह हमेशा लबादा के नीचे ही रहता है।

1981 का हमले में खो दिया था दाहिना हाथ

खामेनेई जब ईरान के राष्ट्रपति थे, तब 27 जून 1981 को तेहरान की एक मस्जिद में नमाज़ के बाद वे समर्थकों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने उनके सामने टेबल पर टेप रिकॉर्डर रखा और उसे चला दिया। करीब एक मिनट बाद रिकॉर्डर से सीटी जैसी आवाज आई और तेज़ विस्फोट हो गया।

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इस विस्फोट में खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके दाहिने हाथ और फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचा। कई महीनों के इलाज के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन दाहिना हाथ स्थायी रूप से लकवाग्रस्त हो गया। बताया जाता है कि इस हमले की जिम्मेदारी उस समय सक्रिय धार्मिक शासन विरोधी उग्र संगठनों पर डाली गई थी।

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एक ही हाथ का करते थे इस्तेमाल?

स्थायी चोट के बाद खामेनेई ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में दाहिने हाथ को लबादा के नीचे रखना शुरू किया। माना जाता है कि यह फैसला निजता, गरिमा और सार्वजनिक छवि बनाए रखने के लिए लिया गया। खामेनेई ने उस दौर में कहा था, मुझे इस हाथ की ज़रूरत नहीं। अगर मेरा दिमाग और मेरी ज़ुबान काम करती रहें, तो वही काफ़ी है। इसके बाद उन्होंने बाएं हाथ से लिखना सीखा और धार्मिक-राजनीतिक नेतृत्व में आगे बढ़ते गए।

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लंबे समय तक नेतृत्व (Leadership)

समाचार वेबसाइट के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई ने लगभग 35 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया, जिससे वे दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शामिल हो गए। दरअसल, उनकी मौत को ईरानी शासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे देश के नेतृत्व पर दबाव और बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिका और इज़राइल पहले ही ईरान की सत्ता संरचना को कमजोर करने की बात कह चुके हैं।
 


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Monika

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