भारत के इन मंदिरों में पुरुषों की नो एंट्री,पर महिलाओं के लिए हैं बहुत खास जानिए वजह
punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 11:22 AM (IST)
नारी डेस्क : भारत में मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ की जगह नहीं हैं, बल्कि यहां अलग-अलग तरह की सदियों पुरानी परंपराएं भी देखने को मिलती हैं। देश के किसी मंदिर में पूजा का तरीका अलग है तो कहीं किसी खास त्योहार के दौरान नियम बदल जाते हैं। आपने अक्सर ऐसे मंदिरों के बारे में सुना होगा जहां महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं होती, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जहां पुरुषों के प्रवेश पर खास मौकों पर रोक रहती है? इन मंदिरों से जुड़े नियम हर जगह एक जैसे नहीं हैं। कहीं पुरुषों की एंट्री सिर्फ किसी खास त्योहार या पूजा के दौरान बंद रहती है, तो कहीं शादीशुदा पुरुषों के लिए अलग नियम हैं। इन परंपराओं के पीछे मंदिरों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं बताई जाती हैं।
आइए जानते हैं भारत के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में, जहां पुरुषों को खास मौकों पर प्रवेश नहीं मिलता या उनके लिए विशेष नियम लागू होते हैं।
अट्टुकल भगवती मंदिर, केरल
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित अट्टुकल भगवती मंदिर महिलाओं की बड़ी धार्मिक भागीदारी के लिए जाना जाता है। यहां हर साल अट्टुकल पोंगाला उत्सव आयोजित किया जाता है। इस उत्सव में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होती हैं और देवी को पोंगाला अर्पित करती हैं। यह आयोजन इतना प्रसिद्ध है कि इसमें भारी संख्या में महिला श्रद्धालु हिस्सा लेती हैं। उत्सव के खास समय में मंदिर परिसर और आसपास का इलाका महिलाओं की धार्मिक गतिविधियों से भर जाता है। इसी दौरान पुरुषों के प्रवेश को लेकर विशेष प्रतिबंध लागू किए जाते हैं।

चक्कुलाथुकावु भगवती मंदिर, केरल
केरल का चक्कुलाथुकावु भगवती मंदिर भी अपनी अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां हर साल नारी पूजा नाम की विशेष रस्म आयोजित की जाती है। इस पूजा के दौरान महिलाओं की खास भूमिका होती है। परंपरा के अनुसार, मंदिर के पुरुष पुजारी महिला श्रद्धालुओं के पैर धोकर उनका सम्मान करते हैं। इसी विशेष पूजा के दौरान पुरुषों के मंदिर में प्रवेश पर रोक रहती है। इस परंपरा को देवी शक्ति की आराधना और महिलाओं के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।
कामाख्या मंदिर, असम
गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी कामाख्या की पूजा की जाती है और मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक परंपराएं बेहद खास मानी जाती हैं। मंदिर का सबसे चर्चित आयोजन अंबुबाची मेला है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान देवी कामाख्या के मासिक धर्म का समय माना जाता है। इसी वजह से कुछ दिनों के लिए मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद रहते हैं। इस दौरान मंदिर में सामान्य दर्शन नहीं होते और पुरुषों के प्रवेश को लेकर भी विशेष नियम लागू रहते हैं। अंबुबाची मेले के दौरान देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
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कन्याकुमारी भगवती अम्मन मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित भगवती अम्मन मंदिर देवी कुमारी को समर्पित है। मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण यहां पुरुषों के प्रवेश को लेकर खास परंपरा बताई जाती है। मान्यता के अनुसार, शादीशुदा पुरुषों को मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं होती, जबकि संन्यासी पुरुष मंदिर के द्वार तक जा सकते हैं। इस परंपरा को देवी के कुमारी स्वरूप और उनके तप से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि मंदिर के नियम बाकी कई मंदिरों से अलग नजर आते हैं।

ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर
राजस्थान के पुष्कर में स्थित जगतपिता ब्रह्मा मंदिर भी अपनी अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि यहां सभी पुरुषों के प्रवेश पर रोक नहीं है।
बताया जाता है कि शादीशुदा पुरुषों के लिए मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर विशेष प्रतिबंध है। इसके पीछे ब्रह्मा और देवी सरस्वती से जुड़ी एक पौराणिक कथा बताई जाती है। मान्यता के अनुसार, एक यज्ञ के दौरान देवी सरस्वती के समय पर नहीं पहुंचने के कारण ब्रह्मा ने गायत्री से विवाह कर यज्ञ पूरा किया। इसी कथा से जुड़ी मान्यताओं के कारण मंदिर में कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है।
हर मंदिर की परंपरा है अलग
भारत के इन मंदिरों को देखकर यह समझ आता है कि देश में धार्मिक परंपराओं की कितनी विविधता है। कहीं महिलाओं की धार्मिक भागीदारी को खास महत्व दिया जाता है, तो कहीं देवी के स्वरूप या पौराणिक मान्यताओं के आधार पर पुरुषों के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इन मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर रोक हर समय नहीं होती। कई जगह यह नियम सिर्फ किसी खास पूजा, उत्सव या निर्धारित अवधि के दौरान लागू होता है। इसलिए मंदिर जाने से पहले वहां के मौजूदा नियमों और दर्शन व्यवस्था की जानकारी लेना बेहतर रहता है।

