बिहार के इस मंदिर पर बनी है फिल्म The Vvaan, जहां सूर्यास्त के बाद जाना है सख्त मना
punjabkesari.in Friday, Sep 25, 2026 - 06:42 PM (IST)
नारी डेस्क: सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फ़िल्म 'द व्वान: फ़ोर्स ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट' ने पटना के पास एक कम मशहूर मंदिर की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। यह फ़िल्म बिहटा के 'वन देवी मंदिर' से जुड़ी लोक-कथाओं पर आधारित है, यह सदियों पुराना मंदिर स्थानीय परंपराओं और कहानियों से घिरा हुआ है। हाल ही में फिल्म के मेकर्स न बताया कि उन्हें 'द वन' की कहानी की प्रेरणा कहां से मिली और कैसे फिल्म बनाने का सोचा।

वन देवी मंदिर कहां है?
माँ वन देवी मंदिर पटना ज़िले में बिहटा के पास स्थित है। यह पटना से लगभग 35 किलोमीटर दूर, अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों के मिलन-स्थल के नज़दीक है। यह मंदिर एक ऐसे ग्रामीण इलाके में है जो स्थानीय लोगों के अनुसार, कभी घने जंगल से घिरा हुआ था। कई मशहूर मंदिरों के उलट, जहां देवता को एक भव्य मूर्ति के रूप में दिखाया जाता है, यहां वन देवी की पूजा एक पवित्र पिंड के रूप में की जाती है। स्थानीय परंपराएं इस मंदिर को विंध्याचल की मां विंध्यवासिनी से भी जोड़ती हैं।
16वीं सदी में बना था ये मंदिर
स्थानीय परंपराओं में आम तौर पर इस मंदिर को कई सदियों पुराना बताया जाता है और माना जाता है कि यह 16वीं सदी में बना था। हालांकि, किसी पक्के पुरातात्विक रिकॉर्ड से इसकी सही ऐतिहासिक तारीख़ का स्वतंत्र रूप से पता नहीं चलता है, इसलिए 16वीं सदी में इसके बनने की बात को मंदिर के मौखिक इतिहास का ही एक हिस्सा माना जाना चाहिए। इस मंदिर से जुड़ी लोक-कथाओं के अनुसार, आज के मंदिर के आस-पास के जंगल में अंधेरा होने के बाद जाना मुश्किल माना जाता था। पीढ़ियों से चली आ रही इस बात से एक परंपरा बन गई कि लोगों को सूरज डूबने के बाद जंगल में नहीं जाना चाहिए।
सूरज डूबने के बाद यहां के जंगलों में जाने की है मनाही
मंदिर के पुजारी ने एक इंटरव्यू में बताया कि- इस मंदिर के पीछे की कहानी यह है कि इसे 16वीं सदी में बनाया गया था। जंगल में कुछ ऐसी चीजें थीं जो आस-पास के लोगों को परेशान करती थीं। एक परंपरा थी कि लोगों को सूरज डूबने के बाद जंगल में जाने की मनाही थी। यह लोक-कथा आज भी प्रचलित है। वन देवी मंदिर कोई आम ऐतिहासिक स्मारक नहीं है जिसकी बनावट बहुत शानदार हो या जहां पर्यटकों के लिए बड़ा कॉम्प्लेक्स बना हो। इसकी खासियत इसकी लोकेशन और यहां की जीवित परंपराएं हैं। यह मंदिर बिहार के एक ऐसे पहलू को जानने का मौका देता है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं एक ऐसा पहलू जहाँ धार्मिक रीति-रिवाज गांव की ज़िंदगी और स्थानीय लोक-कथाओं से गहराई से जुड़े हुए हैं। सूरज डूबने के बाद यहां न जाने की पाबंदी को भी इसी नज़रिए से देखा जाना चाहिए। मंदिर के बारे में मौजूद जानकारी इसे एक पुरानी स्थानीय परंपरा बताती है, ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि रात में यहां कोई अलौकिक घटना होती है।

मंदिर को लेकर है कई मान्यताएं
मान्यता है कि मंदिर के कपाट बंद होने के बाद यहां कोई नहीं ठहरता और पुजारी तक घर चले जाते हैं। सूर्यास्त के बाद यहां किसी के भी जाने पर पाबंदी है। ऐसा माना जाता है कि उसके बाद खुद देवी वहां विचरण करती हैं। फिल्म के डायरेक्टर दीपक मिश्रा ने बताया थ्सस कि कहानी को फिल्म का रूप देना और उसे उसी दुनिया के मुताबिक बनाना आसान नहीं था। इसके लिए सिर्फ नॉर्मल शूटिंग काफी नहीं थी। इसलिए आज की तकनीक के साथ, एनिमेशन और काफी स्पेशल इफेक्ट्स का भी इस्तेमाल किया गया। 'द वन' 25 सितंबर को थिएटर्स में रिलीज हुई । फिल्म में सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल, अनूप सोनी और अजय राजू भी हैं।

