भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से किया था भोलेनाथ पर वार! बहुत ही हैरान करने वाली है कथा

punjabkesari.in Wednesday, May 24, 2023 - 06:02 PM (IST)

भगवान विष्णु का एक नाम चक्रधर भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी एक उंगली में सुर्दशन चक्र रहता है। कहा जाता है कि ये चक्र अमोघ (जिसका निशाना अचूक हो) है और जिस पर भी इसका प्रहार होता है, ये उसका अंत करके ही लौटता है।

PunjabKesari

भगवान विष्णु ने जब श्री कृष्ण के रुप में अवतार लिया था तब भी उनके पास यह चक्र था। इसी चक्र से इन्होंने जरासंध को पराजित किया था, शिशुपाल का वध भी इसी चक्र से किया गया था। श्री कृष्ण अवतार में यह चक्र भगवान श्री कृष्ण को परशुराम जी से प्राप्त हुआ था क्योंकि रामावतार में परशुराम जी को भगवान राम ने चक्र सौंप दिया था और कृष्णावातार में वापस करने के लिए कहा था। लेकिन भगवान विष्णु जी के पास ये चक्र कैसा आया, इसके पीछे एक बड़ी ही रोचक कहानी है....

PunjabKesari

इस तरह से मिला था भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र

वामन पुराण में कहा गया है कि श्रीदामा नामक एक असुर हुआ करता था। उसने सभी देवताओं को हरा दिया और फिर अंहकार में आकर  भगवान विष्णु के श्रीवत्स को छीनने की योजना बनाई। इससे भगवान विष्णु क्रोधित हो गए और श्रीदामा को दंडित करने के लिए भगवान शिव की तपस्या में करने लगे। भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने भगवान विष्णु को एक चक्र प्रदान किया जिसका नाम सुदर्शन चक्र था। भगवान शिव ने कहा कि यह अमोघ है, इसका प्रहार कभी खाली नहीं जाता। भगवान विष्णु ने कहा कि ,'ये अमोघ है इसे परखने के लिए मैं सबसे पहले इसका प्रहार आप पर ही करना चाहता हूं'।

PunjabKesari

भगवान शिव ने कहा अगर आप यह चाहते हैं तो प्रहार करके देख लीजिए। सुदर्शन चक्र के प्रहार से भगवान शिव के तीन खंड हो गए। इसके बाद भगवान विष्णु को अपने किए पर प्रयश्चित होने लगा और शिव की आराधना करने लगे।

भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि सुदर्शन चक्र के प्रहार से मेरा प्राकृत विकार ही कटा है। मैं और मेरा स्वभाव को क्षति नहीं पहुंची है। इसके बाद भगवान विष्णु ने श्रीदामा से युद्ध किया और सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया। सुदर्शन चक्र इसके बाद हमेशा के लिए भगवान विष्णु  का हिस्सा बन गया।
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Charanjeet Kaur

static