मछली खाकर दूध पीने से क्या शरीर पर हो जाता है सफेद दाग? जानिए ये सच्चाई है या बस वहम

punjabkesari.in Monday, Jun 01, 2026 - 03:40 PM (IST)

नारी डेस्क: हम अक्सर अच्छी और पौष्टिक चीजें खाते हैं, लेकिन अगर उन्हें गलत कॉम्बिनेशन (गलत चीजों के साथ) खा लिया जाए, तो वो फायदे की जगह शरीर को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। जब हम मछली और दूध की बात करते हैं, तो हममें से ज़्यादातर लोगों को अपनी दादी-नानी और मां की बातें याद आती हैं, जो हमें हमेशा यह सिखाती थीं कि इन दोनों को कभी भी एक साथ नहीं खाना चाहिए, वरना इससे त्वचा की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। तो क्या मछली और दूध का मेल अच्छा है या बुरा? आज जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

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वैज्ञानिक तथ्य

वैज्ञानिक तौर पर इस खाने के मेल से बचने का सिर्फ़ एक ही कारण है और वह यह कि अगर आपको इन दोनों में से किसी भी चीज से एलर्जी हो। ऐसी कोई भी स्टडी नहीं हुई है जो यह साबित कर सके कि इस मेल से शरीर पर कोई बुरा असर पड़ सकता है। अगर आप इन चीज़ों को अलग-अलग देखें, तो इनमें पोषक तत्वों की मात्रा काफी ज़्यादा होती है, यही वजह है कि कई संस्कृतियों में सेहत में तेजी से सुधार लाने के लिए इन दोनों (डेयरी और मछली) के मेल का इस्तेमाल किया जाता है। वैज्ञानिक रूप से मान्य कारण यह है कि अगर मछली ठीक से पकी हुई न हो, या अगर आपको लैक्टोज़ इनटॉलेरेंस (दूध से बनी चीज़ें न पचना) हो, या फिर आपको मछली/सीफ़ूड से एलर्जी हो, तो ही इस खाने के मेल से त्वचा पर चकत्ते और दूसरी समस्याएं हो सकती हैं।


क्या कहता है आयुर्वेद 

आयुर्वेद के अनुसार, दूध और मछली दो अलग-अलग तरह के खान-पान से आते हैं यानी मछली एक मांसाहारी भोजन है, जबकि दूध, भले ही वह जानवरों से मिलने वाला उत्पाद हो, एक शाकाहारी भोजन है। आयुर्वेदिक दर्शन को ध्यान में रखते हुए, यह मेल सही नहीं माना जाता, क्योंकि दोनों के खान-पान का तरीका अलग है और साथ ही, हमारे शरीर पर दोनों का असर भी एक-दूसरे से बिल्कुल उल्टा होता है। चूंकि दूध का असर ठंडा होता है और मछली का असर गर्म, इसलिए इन दोनों का मेल शरीर में एक असंतुलन पैदा करता है, जिससे शरीर के अंदर कुछ रासायनिक बदलाव हो सकते हैं।

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दाेनों को एक साथ खाने से पाचन तंत्र होता है प्रभावित 

आयुर्वेद का यह सिद्धांत कि कुछ चीज़ों का असर ठंडा होता है और कुछ का गर्म कई पोषण विशेषज्ञों (nutritionists) द्वारा भी समर्थित है। यही कारण है कि वे आपको इस मेल से बचने की सलाह देते हैं। हालांकि कई संस्कृतियों में इस मेल का सेवन किया जाता है, फिर भी इससे बचने की ही सलाह दी जाती है खासकर तब, जब आपका इम्यून सिस्टम (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) कमज़ोर हो। जब इस तरह के भोजन के मेल से होने वाले असर की बात आती है, तो इम्यून सिस्टम की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। ये दोनों ही चीजें अपने आप में प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत हैं, लेकिन इनकी बनावट एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती है; इसलिए, इन्हें पचाने के लिए शरीर को अलग-अलग तरह के पाचक रसों (digestive juices) की ज़रूरत पड़ती है। इस असंतुलन के कारण पाचन तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर के अंदर होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं में बदलाव आ सकता है और आपका इम्यून सिस्टम और भी ज़्यादा कमजोर पड़ सकता है।
 


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vasudha

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