गाय के दूध से कई गुना ज्यादा प्रोटीन! इतना पावरफुल होता है Cockroach Milk
punjabkesari.in Thursday, Jun 11, 2026 - 10:34 AM (IST)
नारी डेस्क: दूध का नाम सुनते ही आमतौर पर गाय, भैंस या फिर बादाम और सोया मिल्क का ख्याल आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसा जीव, जिसे देखते ही ज्यादातर लोग डर जाते हैं, उसका दूध दुनिया के सबसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जा सकता है? सुनने में यह बात भले ही अजीब लगे, लेकिन वैज्ञानिकों की कुछ रिसर्च ने "कॉकरोच मिल्क" को लेकर दुनियाभर में दिलचस्पी बढ़ा दी है। हालांकि यह कोई ऐसा दूध नहीं है जिसे बाजार से खरीदकर आसानी से पिया जा सके, लेकिन इसकी पोषण क्षमता को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से अध्ययन कर रहे हैं।
कौन-सा कॉकरोच देता है दूध
सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि घरों में दिखाई देने वाले सामान्य कॉकरोच दूध नहीं देते। कॉकरोच की एक विशेष प्रजाति, जिसे पैसिफिक बीटल कॉकरोच कहा जाता है, इस मामले में अलग है। यह दुनिया की उन चुनिंदा प्रजातियों में शामिल है जो अंडे देने के बजाय सीधे बच्चों को जन्म देती हैं। अपने विकसित हो रहे बच्चों को पोषण देने के लिए मादा कॉकरोच एक विशेष प्रकार का पोषक द्रव बनाती है, जिसे बाद में वैज्ञानिकों ने "कॉकरोच मिल्क" का नाम दिया।

आखिर क्या होता है कॉकरोच मिल्क
जब मादा पैसिफिक बीटल कॉकरोच के शरीर में बच्चे विकसित हो रहे होते हैं, तब उनके पोषण के लिए एक विशेष तरल पदार्थ बनता है। यह पदार्थ बच्चों की आंत में जाकर क्रिस्टल के रूप में जमा हो जाता है। इन्हीं पोषक क्रिस्टल्स का अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इनमें प्रोटीन, फैट और आवश्यक अमीनो एसिड्स की मात्रा काफी अधिक होती है। यही वजह है कि इसे कॉकरोच मिल्क कहा जाने लगा।
क्यों माना जा रहा है इतना पौष्टिक
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि इन क्रिस्टल्स में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इनमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड्स, स्वस्थ वसा और ऊर्जा प्रदान करने वाले तत्व शामिल हैं। रिसर्च के अनुसार, यह पोषक मिश्रण शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने की क्षमता रखता है। इसकी खास बात यह है कि क्रिस्टल्स धीरे-धीरे टूटते हैं, जिससे पोषक तत्वों की आपूर्ति लगातार बनी रहती है। इसी कारण इसे भविष्य के संभावित सुपरफूड के रूप में भी देखा जा रहा है।
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क्या सचमुच गाय के दूध से ज्यादा ताकतवर है
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि कॉकरोच मिल्क के क्रिस्टल्स में कैलोरी और पोषक तत्वों का घनत्व सामान्य दूध की तुलना में काफी अधिक होता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसकी तुलना सीधे गाय या भैंस के दूध से करना पूरी तरह सही नहीं होगा, क्योंकि दोनों की संरचना और उपयोग अलग-अलग हैं। फिलहाल यह शोध का विषय है और इसे आम खाद्य पदार्थ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाता।

एक गिलास दूध के लिए लगेंगे सैकड़ों कॉकरोच
कॉकरोच मिल्क को व्यावहारिक रूप से तैयार करना बेहद मुश्किल काम है। वैज्ञानिकों के अनुसार, बहुत कम मात्रा में मिलने वाले इन क्रिस्टल्स को इकट्ठा करने के लिए बड़ी संख्या में कॉकरोचों की आवश्यकता पड़ती है। यही कारण है कि फिलहाल इसे व्यावसायिक स्तर पर तैयार करना संभव नहीं है। वैज्ञानिक अब इसकी संरचना को समझकर लैब में कृत्रिम रूप से तैयार करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।
मेडिकल रिसर्च में भी बढ़ रही दिलचस्पी
कॉकरोच केवल इस अनोखे दूध की वजह से ही नहीं, बल्कि मेडिकल रिसर्च के कारण भी चर्चा में हैं। कई देशों में वैज्ञानिक कॉकरोच से मिलने वाले जैविक तत्वों पर शोध कर रहे हैं। कुछ अध्ययनों में इनके उपयोग से संक्रमणरोधी दवाओं, घाव भरने वाली क्रीम और पाचन संबंधी उपचारों की संभावनाएं तलाशने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन शोधों पर अभी और काम होना बाकी है।
क्या भविष्य का सुपरफूड बन सकता है?
फिलहाल कॉकरोच मिल्क आम लोगों की डाइट का हिस्सा नहीं है और न ही बाजार में उपलब्ध है। लेकिन इसकी पोषण क्षमता को लेकर वैज्ञानिक समुदाय की रुचि लगातार बढ़ रही है। यदि भविष्य में वैज्ञानिक इसकी संरचना को सफलतापूर्वक लैब में तैयार कर पाते हैं, तो संभव है कि यह एक नए प्रकार के हाई-प्रोटीन सप्लीमेंट या न्यूट्रिशनल फूड के रूप में सामने आए। फिलहाल इसे एक दिलचस्प वैज्ञानिक खोज के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर शोध जारी है।


