IUI और IVF में क्या अंतर है? जानें कौन सा फर्टिलिटी ट्रीटमेंट कब ज़रूरी होता है
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 05:57 PM (IST)
नारी डेस्क: आज के समय में कई कपल्स को नैचुरली प्रेग्नेंट होने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में डॉक्टर कई तरह के फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का सुझाव देते हैं, जैसे IUI (इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन) और IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन)। हालांकि, बहुत से कपल्स के मन में सवाल उठता है कि इन दोनों में क्या अंतर है और कौन-सा ट्रीटमेंट उनकी कंडीशन के लिए सही रहेगा।
IUI क्या है?
IUI, या इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन, एक सरल फर्टिलिटी प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में महिला के ओव्यूलेशन (अंडा निकलने) के समय पुरुष के शुक्राणु को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है। इससे शुक्राणुओं को अंडे तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है और प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ जाती है। इस प्रक्रिया के लिए पुरुष के स्पर्म को पहले खास तरीके से वॉश किया जाता है, ताकि केवल स्वस्थ और गतिशील शुक्राणु ही उपयोग में लाए जाएं। IUI की प्रक्रिया बेहद सरल होती है और आमतौर पर क्लिनिक में 5–10 मिनट में पूरी हो जाती है। इसे आमतौर पर उन कपल्स को सुझाया जाता है, जिनके पुरुष में लो स्पर्म काउंट या कम गतिशीलता है। इसके अलावा, जब किसी कपल को अनएक्सप्लेंड इंफर्टिलिटी (जांच में कोई स्पष्ट कारण न मिले) हो या गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) से संबंधित समस्या हो, तो भी IUI एक असरदार विकल्प बन सकता है।

हालांकि, हर महिला के लिए IUI उपयुक्त नहीं होता। यदि महिला को गंभीर फैलोपियन ट्यूब की समस्या, पेल्विक इंफेक्शन का इतिहास या एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर स्थिति है, तो डॉक्टर आमतौर पर IUI की सलाह नहीं देते। IUI की सफलता दर कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे महिला की उम्र, इन्फर्टिलिटी का कारण और प्रजनन में इस्तेमाल होने वाली दवाएं। औसतन, हर साइकल में IUI की सफलता दर लगभग 20% होती है।
IVF क्या है?
IVF, या इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, IUI की तुलना में एक अधिक जटिल और तकनीकी प्रक्रिया है। इसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है। जब फर्टिलाइजेशन हो जाता है और भ्रूण बन जाता है, तो उसे महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। भ्रूण यूट्रस की दीवार में स्थापित होने पर ही प्रेग्नेंसी संभव होती है। IVF प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, इसलिए इसमें लगभग 4–6 सप्ताह का समय लगता है। डॉक्टर इस प्रक्रिया में महिला की हार्मोन थेरैपी, अंडाणु निकालने की प्रक्रिया और भ्रूण ट्रांसफर सभी स्टेप्स को ध्यान से नियंत्रित करते हैं।
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IVF की जरूरत उन कपल्स को होती है जो गंभीर इन्फर्टिलिटी का सामना कर रहे हों या जिनकी हेल्थ कंडीशन के कारण प्राकृतिक तरीके से प्रेग्नेंट होना मुश्किल हो। इसके अलावा, उच्च उम्र में माता या पिता बनने वाले कपल्स भी IVF का सहारा लेते हैं। IVF उन महिलाओं और पुरुषों के लिए भी उपयोगी है जिनमें फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक, एंडोमेट्रियोसिस, लो स्पर्म काउंट, गर्भाशय में फाइब्रॉइड, PCOS या अन्य अंडाशय संबंधी समस्याएं हों। यदि कपल सरोगेट मदर का उपयोग कर रहा है, तो भी IVF का इस्तेमाल किया जाता है।
IUI और IVF में मुख्य अंतर
IUI और IVF के बीच मुख्य अंतर यह है कि IUI में फर्टिलाइजेशन महिला के शरीर के अंदर होता है, जबकि IVF में फर्टिलाइजेशन लैब में बाहर किया जाता है। IUI की प्रक्रिया सरल और कम समय लेने वाली है, जबकि IVF जटिल और कई चरणों में होती है। IUI की सफलता दर हर साइकल में लगभग 20% होती है, जबकि IVF की सफलता दर महिला की उम्र, इन्फर्टिलिटी के कारण और दवाओं के उपयोग पर निर्भर करती है।

IUI का उपयोग हल्की समस्या या कम स्पर्म से संबंधित मामलों में किया जाता है, जबकि IVF गंभीर समस्या, उच्च उम्र, ब्लॉक ट्यूब्स या अन्य मेडिकल स्थितियों में ज्यादा कारगर होता है।
दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य एक ही है कपल्स को माता-पिता बनने में मदद करना। IUI सरल, त्वरित और कम जटिलता वाली प्रक्रिया है, जबकि IVF जटिल, लंबी और तकनीकी प्रक्रिया है। सही ट्रीटमेंट का चुनाव महिला और पुरुष की मेडिकल हिस्ट्री, उम्र और प्रजनन स्वास्थ्य के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।

